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रूद्र चंडी महायज्ञ में ताड़का वध की कथा सुनाई
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इलिया। स्थानीय कस्बा स्थित बस स्टैंड के समीप चल रहे नौ दिवसीय रूद्र चंडी महायज्ञ में सोमवार को भक्तों ने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और विधि विधान से पूजा अर्चना की। वहीं यज्ञ कुंड की परिक्रमा को लोगों की भीड़ जुटी। शाम के वक्त चल रहे रामकथा में मानस मर्मज्ञ जगदीश आचार्य महाराज ने भक्तों ने ताड़का वध की कथा सुनाई।
रूद्रचंडी महायज्ञ की शुरूआत शनिवार को कलश यात्रा के साथ हुई थी। कलशों की स्थापना कर यज्ञ कुंड में आहुति डालने क सिलसिला चल रहा है। वहीं शाम के वक्त जगदीश आचार्य महाराज भक्तों को राम कथा सुना रहे हैं। सोमवार की सुबह भक्तों ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और इसके बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि से विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। शाम को राम कथा में जगदीश आचार्य महाराज ने भक्तों को विश्वामित्र के राम लक्ष्मण को साथ ले जाने और ताड़का वध की कथा सुनाई। कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कथा में आदर्श समाज की झलक मिलती है। कहा कि गुरु विश्वामित्र के मांगने पर राम और लक्ष्मण पिता दशरथ की आज्ञा पाकर ताड़का वन में गए। यहां यज्ञ में बाधा पहुंचाने वाली ताड़का का वध किया। बाद में सीता स्वयंर के लिए मिथिला पहुंचे। रास्ते में भगवान राम ने शिला बनी अहिल्या का उद्धार किया। विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण का गंगावतरण की कथा सुनाई।
रूद्रचंडी महायज्ञ की शुरूआत शनिवार को कलश यात्रा के साथ हुई थी। कलशों की स्थापना कर यज्ञ कुंड में आहुति डालने क सिलसिला चल रहा है। वहीं शाम के वक्त जगदीश आचार्य महाराज भक्तों को राम कथा सुना रहे हैं। सोमवार की सुबह भक्तों ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और इसके बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि से विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। शाम को राम कथा में जगदीश आचार्य महाराज ने भक्तों को विश्वामित्र के राम लक्ष्मण को साथ ले जाने और ताड़का वध की कथा सुनाई। कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कथा में आदर्श समाज की झलक मिलती है। कहा कि गुरु विश्वामित्र के मांगने पर राम और लक्ष्मण पिता दशरथ की आज्ञा पाकर ताड़का वन में गए। यहां यज्ञ में बाधा पहुंचाने वाली ताड़का का वध किया। बाद में सीता स्वयंर के लिए मिथिला पहुंचे। रास्ते में भगवान राम ने शिला बनी अहिल्या का उद्धार किया। विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण का गंगावतरण की कथा सुनाई।
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