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Bulandshahar News: पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए ग्रामीणों ने किए धार्मिक अनुष्ठान
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पहासू के बनैल गांव में पशुओं की बीमारी से बचाव के लिए जलाए गए खप्पर। स्रोत- वीडियो ग्रैब
पहासू। क्षेत्र के गांव बनैल में वर्षा ऋतु में होने वाली बीमारियों से पशुओं के बचाव के लिए ग्रामीणों ने धार्मिक अनुष्ठान किए। मां चामुंडा की प्रार्थना की पशुओं के स्वस्थ रहने की कामना की। इसके अलावा अन्य गांवों में भी पूजा का आयोजन किया गया।
बनैल गांव निवासी भानु प्रकाश ने बताया कि बारिश के बाद पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए गांव में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां चामुंडा की कृपा से पशुओं में बरसात के बाद होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। गांव में हवन के बाद प्रसाद बांट कर पशुधन को बीमारियों से रक्षा की कामना की जाती है।
चामुंडा मां के खप्पर में लोबान और गंधक रखी धूनी को गांव के सभी पशुओं को सुंघाया तथा पीछे से हाथ में मशाल लिए ग्रामीण चलते रहे। इस दौरान ग्रामीण ने पूजा के दौरान जोर-जोर से आवाज भी लगाई। गांव में चूल्हे नहीं जले और उपलों की आंच में भोजन बनाया गया।
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वहीं पशु चिकित्सक डॉ. धिरेंद्र सिंह का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान लोगों की आस्था से जुड़े होते हैं, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। बीमारी से बचाव के लिए पशुओं का समय समय पर टीकाकरण कराया जाना चाहिए।
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बनैल गांव निवासी भानु प्रकाश ने बताया कि बारिश के बाद पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए गांव में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां चामुंडा की कृपा से पशुओं में बरसात के बाद होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। गांव में हवन के बाद प्रसाद बांट कर पशुधन को बीमारियों से रक्षा की कामना की जाती है।
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चामुंडा मां के खप्पर में लोबान और गंधक रखी धूनी को गांव के सभी पशुओं को सुंघाया तथा पीछे से हाथ में मशाल लिए ग्रामीण चलते रहे। इस दौरान ग्रामीण ने पूजा के दौरान जोर-जोर से आवाज भी लगाई। गांव में चूल्हे नहीं जले और उपलों की आंच में भोजन बनाया गया।
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वहीं पशु चिकित्सक डॉ. धिरेंद्र सिंह का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान लोगों की आस्था से जुड़े होते हैं, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। बीमारी से बचाव के लिए पशुओं का समय समय पर टीकाकरण कराया जाना चाहिए।