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Bulandshahar News: शेयर के नाम पर रकम हड़पने वाली फार्मा कंपनी पर 31 साल बाद आया फैसला
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बुलंदशहर। शेयर आवंटन के नाम पर उपभोक्ताओं से रकम लेकर धोखाधड़ी और सेवा में घोर लापरवाही बरतने वाली फार्मा कंपनी पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग ने नई दिल्ली स्थित मैसर्स कि फार्मा लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को पीड़िता की पूरी धनराशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के साथ ही मानसिक क्षति व वाद व्यय अदा करने का सख्त आदेश दिया है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि नगर के मोहल्ला शीतलगंज निवासी लाज शर्मा ने 10 जून 1995 को मैसर्स कि-फार्मा लिमिटेड नई दिल्ली के कॉल मनी अकाउंट में 10 रुपये प्रति शेयर की दर से 2500 शेयरों के लिए कुल 25,750 जमा किए थे। इसके बाद पीड़िता के पति मुकुल शर्मा ने कंपनी से कई बार संपर्क साधा, तो हर बार बाजार में जल्द नया निर्गम लाने और धन सुरक्षित होने का झांसा दिया जाता रहा।
लंबे इंतजार के बाद भी जब कोई परिणाम नहीं निकला तो 2015 में पीड़िता ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजे। इनका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद पीड़िता ने सेबी और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के समक्ष गुहार लगाई। मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने खराब आर्थिक स्थिति का बहाना बनाते हुए भविष्य में शेयर बिकवाने का आश्वासन दिया लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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कंपनी ने न तो शेयर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए और न ही कोई लाभांश दिया। पीड़िता के पैसों का इस्तेमाल अपने अन्य व्यापारिक लाभ के लिए किया गया। इससे क्षुब्ध होकर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया।
आयोग ने इसे सेवा में भारी कमी और अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी के प्रबंध निदेशक 45 दिनों के भीतर पीड़िता को 25,750 जमा करने की तारीख 10 जून 1995 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करें। इसके अतिरिक्त मानसिक क्षतिपूर्ति के 10,000 और वाद व्यय के 10,000 भी अदा किए जाएं। निर्धारित 45 दिन में भुगतान न होने पर समस्त धनराशि पर 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
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न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि नगर के मोहल्ला शीतलगंज निवासी लाज शर्मा ने 10 जून 1995 को मैसर्स कि-फार्मा लिमिटेड नई दिल्ली के कॉल मनी अकाउंट में 10 रुपये प्रति शेयर की दर से 2500 शेयरों के लिए कुल 25,750 जमा किए थे। इसके बाद पीड़िता के पति मुकुल शर्मा ने कंपनी से कई बार संपर्क साधा, तो हर बार बाजार में जल्द नया निर्गम लाने और धन सुरक्षित होने का झांसा दिया जाता रहा।
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लंबे इंतजार के बाद भी जब कोई परिणाम नहीं निकला तो 2015 में पीड़िता ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजे। इनका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद पीड़िता ने सेबी और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के समक्ष गुहार लगाई। मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने खराब आर्थिक स्थिति का बहाना बनाते हुए भविष्य में शेयर बिकवाने का आश्वासन दिया लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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कंपनी ने न तो शेयर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए और न ही कोई लाभांश दिया। पीड़िता के पैसों का इस्तेमाल अपने अन्य व्यापारिक लाभ के लिए किया गया। इससे क्षुब्ध होकर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया।
आयोग ने इसे सेवा में भारी कमी और अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी के प्रबंध निदेशक 45 दिनों के भीतर पीड़िता को 25,750 जमा करने की तारीख 10 जून 1995 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करें। इसके अतिरिक्त मानसिक क्षतिपूर्ति के 10,000 और वाद व्यय के 10,000 भी अदा किए जाएं। निर्धारित 45 दिन में भुगतान न होने पर समस्त धनराशि पर 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।