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शहर में हर तरफ जाम, गायब है ट्रैफिक प्लान
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शहर में हर तरफ जाम, गायब है ट्रैफिक प्लान
बुलंदशहर। शहर की सड़कों पर बेतरतीब खड़े और दौड़ते वाहन राहगीरों के लिए संकट बने हुए हैं। हालात यह है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा लोगों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कार्य योजना अमल में नहीं लाई जा रही है। इसके चलते मिनटों के सफर को पूरा करने में घंटों का समय लग रहा है। त्योहारी सीजन आने और सड़कों पर जाम से स्थिति और गंभीर हो रही है।
शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा बेलगाम तरीके से दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शाओं की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कोई ठोस प्लान न होने के कारण दिन भर सड़कें पूरी तरह से जाम रहती हैं। सड़कों को जाम मुक्त कराने के लिए न तो लंबे समय से कोई योजना तैयार की गई है और न ही पुरानी योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए कदम उठाया गया है। ट्रैफिक प्लान के अभाव में विभिन्न रूटों पर ई-रिक्शाओं की संख्या बढ़ गई है। जिसके चलते गलियों में भी जाम जैसी स्थिति बन गई है। शहर के मुख्य चौराहा काला आम, अंसारी रोड, बूरा बाजार, काली नदी रोड, बाईपास रोड, अस्पताल रोड, चौक बाजार, साठा समेत अन्य इलाकों में स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है, लेकिन अधिकारी इसमें सुधार करने के लिए प्रयासरत नहीं दिख रहे हैं।
चौराहों पर तैनात पुलिस भी नहीं गंभीर
चौराहों पर जाम की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए पुलिस भी गंभीर नहीं है। स्थिति यह है कि चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस भी अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से नहीं कर रही। अधिकतर समय चौराहों पर होमगार्ड ही ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं, जबकि पुलिसकर्मी पेड़ों के नीचे आराम फरमाते हैं।
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संचालन के इंतजार में खराब हो गई लाल बत्ती
करीब पांच साल पहले ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए 30 लाख की लागत से लगाई गई ट्रैफिक लाइट भी शोपीस बनी हुई हैं। हालत यह है कि अभी तक इन लाइटों को चालू करने के लिए भी ट्रैफिक पुलिस ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। जिसके चलते पांच साल पहले व्यवस्था सुधारने के लिए लगाए गए 30 लाख रुपये फिलहाल बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
चार साल पहले बनाया गया था रूट प्लान
करीब चार साल पहले ई-रिक्शाओं पर लगाम लगाने के लिए रूट प्लान तैयार किया गया था। इस दौरान ई-रिक्शाओं की संख्या निर्धारित करते हुए उनके रूट निर्धारित किए गए थे। ई-रिक्शाओं पर रूट नंबर अंकित करते हुए उन्हें निर्धारित रूट पर ही संचालित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद व्यवस्था पटरी पर लौटी थी, लेकिन कुछ समय बाद अधिकारियों ने इसे फिर नजरअंदाज कर दिया और हालात बद से बदतर हो गए।
ई-रिक्शाओं पर लगाम लगाने के लिए तैयारी की जा रही है। इसके लिए रूट प्लान तैयार करते हुए पालन कराया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट करते हुए सड़कों पर बेहतर व्यवस्था कराई जाएगी।
- सुरेंद्रनाथ तिवारी, एसपी सिटी
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बुलंदशहर। शहर की सड़कों पर बेतरतीब खड़े और दौड़ते वाहन राहगीरों के लिए संकट बने हुए हैं। हालात यह है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा लोगों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कार्य योजना अमल में नहीं लाई जा रही है। इसके चलते मिनटों के सफर को पूरा करने में घंटों का समय लग रहा है। त्योहारी सीजन आने और सड़कों पर जाम से स्थिति और गंभीर हो रही है।
शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा बेलगाम तरीके से दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शाओं की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कोई ठोस प्लान न होने के कारण दिन भर सड़कें पूरी तरह से जाम रहती हैं। सड़कों को जाम मुक्त कराने के लिए न तो लंबे समय से कोई योजना तैयार की गई है और न ही पुरानी योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए कदम उठाया गया है। ट्रैफिक प्लान के अभाव में विभिन्न रूटों पर ई-रिक्शाओं की संख्या बढ़ गई है। जिसके चलते गलियों में भी जाम जैसी स्थिति बन गई है। शहर के मुख्य चौराहा काला आम, अंसारी रोड, बूरा बाजार, काली नदी रोड, बाईपास रोड, अस्पताल रोड, चौक बाजार, साठा समेत अन्य इलाकों में स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है, लेकिन अधिकारी इसमें सुधार करने के लिए प्रयासरत नहीं दिख रहे हैं।
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चौराहों पर तैनात पुलिस भी नहीं गंभीर
चौराहों पर जाम की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए पुलिस भी गंभीर नहीं है। स्थिति यह है कि चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस भी अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से नहीं कर रही। अधिकतर समय चौराहों पर होमगार्ड ही ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं, जबकि पुलिसकर्मी पेड़ों के नीचे आराम फरमाते हैं।
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संचालन के इंतजार में खराब हो गई लाल बत्ती
करीब पांच साल पहले ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए 30 लाख की लागत से लगाई गई ट्रैफिक लाइट भी शोपीस बनी हुई हैं। हालत यह है कि अभी तक इन लाइटों को चालू करने के लिए भी ट्रैफिक पुलिस ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। जिसके चलते पांच साल पहले व्यवस्था सुधारने के लिए लगाए गए 30 लाख रुपये फिलहाल बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
चार साल पहले बनाया गया था रूट प्लान
करीब चार साल पहले ई-रिक्शाओं पर लगाम लगाने के लिए रूट प्लान तैयार किया गया था। इस दौरान ई-रिक्शाओं की संख्या निर्धारित करते हुए उनके रूट निर्धारित किए गए थे। ई-रिक्शाओं पर रूट नंबर अंकित करते हुए उन्हें निर्धारित रूट पर ही संचालित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद व्यवस्था पटरी पर लौटी थी, लेकिन कुछ समय बाद अधिकारियों ने इसे फिर नजरअंदाज कर दिया और हालात बद से बदतर हो गए।
ई-रिक्शाओं पर लगाम लगाने के लिए तैयारी की जा रही है। इसके लिए रूट प्लान तैयार करते हुए पालन कराया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट करते हुए सड़कों पर बेहतर व्यवस्था कराई जाएगी।
- सुरेंद्रनाथ तिवारी, एसपी सिटी