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Bulandshahar News: बच्ची को जन्म देने वाली किशोरी का पुलिस की देख-रेख में हो रहा उपचार
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बुलंदशहर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी परिसर में बच्ची को जन्म देने वाली किशोरी का पुलिस देखरेख में उपचार चल रहा है। वहीं, बच्ची एसएनसीयू वार्ड में भर्ती है। इसकी देखभाल वार्ड में तैनात चिकित्सक और स्टाफ नर्स कर रहे हैं। बच्ची को जन्म देने का कारण पुलिस जांच के बाद पता चल पाएगा।
अगौता क्षेत्र के एक गांव निवासी एक गर्भवती किशोरी शनिवार रात अपनी मां के साथ जिला अस्पताल पहुंची। पेट दर्द व सिर दर्द की बात कह ईएमओ व फार्मासिस्ट से रेफर कराने की मांग की। ईएमओ डाॅ. हितेश कुमार और फार्मासिस्ट मनोज कुमार गौतम का कहना है कि रेफर करने के दौरान उसे इंतजार करने को कहा। किशोरी नजर बचाकर इमरजेंसी परिसर में खाली पड़े रेड जोन कक्ष में चली गई और एक पुत्री को जन्म देकर शौचालय में घुस गई। कपड़े खून से सने होने पर व नवजात बच्चा मिलने पर किशोरी ने उसे अपना मानने से इंकार कर दिया। इमरजेंसी स्टाफ ने मां-बेटी व नवजात को जिला महिला अस्पताल के सुपुर्द कर दिया। साथ ही नगर कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। रविवार को किशोरी का अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी में उपचार किया गया। वहीं, नवजात बच्ची का एसएनसीयू वार्ड में उपचार चल रहा है। जहां वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी देखभाल एसएनसीयू वार्ड का स्टाफ कर रहा है।
36 घंटे से मां से दूर है बच्ची
एसएनसीयू वार्ड में डॉ. अरुण व डॉ. अभिषेक की देखरेख में बच्ची का उपचार हो रहा है। समय-समय पर वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स सुनील, कृष्णा, किरण, कौशल्या आदि उसे गोद में लेकर खिलाते रहते हैं। इनका कहना है कि 36 घंटे से बच्ची मां से दूर है। उसकी कमी बच्ची को न खले इसलिए समय-समय पर कोई न कोई स्टाफ नर्स उसके पास जाकर दुलारती रहती है।
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बच्ची को जिला महिला अस्पताल की जगह जिला अस्पताल में जन्म देने का क्या कारण रहा। यह पुलिस जांच कर बता पाएगी। फिलहाल नवजात बच्ची और उसकी मां दोनों स्वस्थ हैं। किशोरी का पुलिस देखरेख में उपचार चल रहा है। - डॉ. अजय पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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अगौता क्षेत्र के एक गांव निवासी एक गर्भवती किशोरी शनिवार रात अपनी मां के साथ जिला अस्पताल पहुंची। पेट दर्द व सिर दर्द की बात कह ईएमओ व फार्मासिस्ट से रेफर कराने की मांग की। ईएमओ डाॅ. हितेश कुमार और फार्मासिस्ट मनोज कुमार गौतम का कहना है कि रेफर करने के दौरान उसे इंतजार करने को कहा। किशोरी नजर बचाकर इमरजेंसी परिसर में खाली पड़े रेड जोन कक्ष में चली गई और एक पुत्री को जन्म देकर शौचालय में घुस गई। कपड़े खून से सने होने पर व नवजात बच्चा मिलने पर किशोरी ने उसे अपना मानने से इंकार कर दिया। इमरजेंसी स्टाफ ने मां-बेटी व नवजात को जिला महिला अस्पताल के सुपुर्द कर दिया। साथ ही नगर कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। रविवार को किशोरी का अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी में उपचार किया गया। वहीं, नवजात बच्ची का एसएनसीयू वार्ड में उपचार चल रहा है। जहां वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी देखभाल एसएनसीयू वार्ड का स्टाफ कर रहा है।
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36 घंटे से मां से दूर है बच्ची
एसएनसीयू वार्ड में डॉ. अरुण व डॉ. अभिषेक की देखरेख में बच्ची का उपचार हो रहा है। समय-समय पर वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स सुनील, कृष्णा, किरण, कौशल्या आदि उसे गोद में लेकर खिलाते रहते हैं। इनका कहना है कि 36 घंटे से बच्ची मां से दूर है। उसकी कमी बच्ची को न खले इसलिए समय-समय पर कोई न कोई स्टाफ नर्स उसके पास जाकर दुलारती रहती है।
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बच्ची को जिला महिला अस्पताल की जगह जिला अस्पताल में जन्म देने का क्या कारण रहा। यह पुलिस जांच कर बता पाएगी। फिलहाल नवजात बच्ची और उसकी मां दोनों स्वस्थ हैं। किशोरी का पुलिस देखरेख में उपचार चल रहा है। - डॉ. अजय पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल