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उम्मीद का उजियारा: संकट में इन्होंने कायम की नई मिसाल, संक्रमित होने पर भी दूसरों में जगाई आस
Sat, 02 Jan 2021 04:58 PM IST
प्राची प्रियम
चेतन शर्मा, बुलंदशहर
चेतन शर्मा, बुलंदशहर
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 02 Jan 2021 04:58 PM IST
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कठिन समय में इन्होंने कायम की मिसाल
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2020 स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर आया। कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए जान हथेली पर रखकर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ विभागीय अफसरों ने सेवा की एक नई मिसाल कायम की। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से लोग जब घरों में दुबके थे तब कोरोना योद्धा के रूप में परिवार छोड़कर लोगों की जान बचाने में जुट गए थे।
चुनौतियों के बीच एक-एक कर अफसर कोरोना संक्रमित होते चले गए, और एक कर्मी की जान भी चली गई। इसके बावजूद स्वास्थ्य अफसर और कर्मी सेवा से पीछे नहीं हटे।
लोगों के बीच जाकर संक्रमण से लड़ने की दी हिम्मत
डॉ. भवतोष शंखधर स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुरादाबाद से उनका स्थानांतरण बुलंदशहर किया गया। बताया कि जिले में कार्यभार संभालने के बाद सर्वप्रथम कोरोना योद्धा के रुप में खड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों को हिम्मत बढ़ाने का कार्य किया।
जिससे आपात स्थिति में कोई डगमगा न सके। इसी बीच स्वास्थ्य अफसरों के कोरोना पॉजिटिव आने पर सभी साथियों का हौसला बनाए रखा और कार्य में कोई ढील नहीं छोड़ी। बाद में स्वयं संक्रमित मिलने पर भी काम जारी रखा।
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संक्रमण के फैलाव को रोकना थी चुनौती
डॉ. रोहताश यादव स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के दौरान विभाग द्वारा सर्विलांस की जिम्मेदारी दी गई। जिसे निभाने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से कैसे लोगों को बचाया जाए।
कहां किस टीम को क्या करना है और कैसे संक्रमित लोगों की पहचान करनी है। इस कार्य के साथ-साथ विभाग की वीसी में शासन को हर तैयारी की पल-पल की खबर दी गई। साथियों से नजदीकि बनाए रखी और लोगों के बीच जाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का मंत्र दिया।
जिम्मेदारी के साथ-साथ कोरोना से किया बचाव डॉ. सुष्पेंद्र कुमार स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। विभाग में कोरोना संक्रमण मिलने पर स्वयं जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर भी कार्य किया। जिससे अन्य साथियों पर अधिक भार न पड़े।
विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका पालन कर रहा हूं और लोगों से समय-समय पर कोरोना से बचाव के लिए जागरूक कर रहा हूं। पालन करने से एक दिन हम अवश्य कोरोना से जंग जीतने में सफल होंगे।
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चुनौतियों के बीच एक-एक कर अफसर कोरोना संक्रमित होते चले गए, और एक कर्मी की जान भी चली गई। इसके बावजूद स्वास्थ्य अफसर और कर्मी सेवा से पीछे नहीं हटे।
लोगों के बीच जाकर संक्रमण से लड़ने की दी हिम्मत
डॉ. भवतोष शंखधर स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुरादाबाद से उनका स्थानांतरण बुलंदशहर किया गया। बताया कि जिले में कार्यभार संभालने के बाद सर्वप्रथम कोरोना योद्धा के रुप में खड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों को हिम्मत बढ़ाने का कार्य किया।
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जिससे आपात स्थिति में कोई डगमगा न सके। इसी बीच स्वास्थ्य अफसरों के कोरोना पॉजिटिव आने पर सभी साथियों का हौसला बनाए रखा और कार्य में कोई ढील नहीं छोड़ी। बाद में स्वयं संक्रमित मिलने पर भी काम जारी रखा।
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संक्रमण के फैलाव को रोकना थी चुनौती
डॉ. रोहताश यादव स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के दौरान विभाग द्वारा सर्विलांस की जिम्मेदारी दी गई। जिसे निभाने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से कैसे लोगों को बचाया जाए।
कहां किस टीम को क्या करना है और कैसे संक्रमित लोगों की पहचान करनी है। इस कार्य के साथ-साथ विभाग की वीसी में शासन को हर तैयारी की पल-पल की खबर दी गई। साथियों से नजदीकि बनाए रखी और लोगों के बीच जाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का मंत्र दिया।
जिम्मेदारी के साथ-साथ कोरोना से किया बचाव डॉ. सुष्पेंद्र कुमार स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। विभाग में कोरोना संक्रमण मिलने पर स्वयं जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर भी कार्य किया। जिससे अन्य साथियों पर अधिक भार न पड़े।
विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका पालन कर रहा हूं और लोगों से समय-समय पर कोरोना से बचाव के लिए जागरूक कर रहा हूं। पालन करने से एक दिन हम अवश्य कोरोना से जंग जीतने में सफल होंगे।
हम लोगों के लिए भी परीक्षा की घड़ी
डॉ. भूदेव प्रसाद स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना के दौरान मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिले इसकी जिम्मेदारी मिली। कहा कि शासन द्वारा समय-समय पर हिम्मत दी गई।
शुरुआत का समय हमारे लिए परीक्षा की घड़ी का समय रहा, जिसे हम सभी को पास होकर दिखाना था। बताया कि इस रोग के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। लोगों को शासन द्वारा बताए गए मूलमंत्र को अपनाने की समय-समय पर अपील कर रहे हैं।
आपदा आने पर भी नहीं मानी हार
डॉ. नरेश गोयल स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही कोरोना संक्रमण लोगों की जांच कराने के लिए नोडल प्रभारी का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। प्रतिदिन किस टीम द्वारा कितनी जांच की गई, कहां टीम को भेजा जाए और किस प्रकार कोरोना को चेन बनने से रोका जाए इस पर फोकस रहा। जिससे टीम का आत्मविश्वास न टूटे। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद बचाव के तरीके अपनाएं और जल्द स्वस्थ होकर साथियों के बीच लौटें।
दो बार संक्रमित होने के बाद कर रहे कार्य डॉ. परवेंद्र सिंह जिला अस्पताल में वरिष्ठ निश्चेतक के पद पर कार्यरत हैं और समय-समय पर कोविड मरीजों का उपचार कर रहे हैं। 9 माह के कार्यकाल के दौरान वह स्वयं दो बार कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।
इसके बावजूद वह संक्रमण मुक्त होने के बाद मरीजों की सेवा कर रहे हैं। बताया कि संक्रमण होने के दौरान एल-1 अस्पताल में मरीजों के साथ दिन व्यतीत किए और लोगों को संक्रमण से मुक्त होने के लिए योगा कराने के साथ अन्य टिप्स दिए। विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका बखूबी पालन कर रहा हूं।
नौकरी गई तो कारोबार में उतरकर बने आत्मनिर्भर
कोरोना काल में लोगों को कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ा। किसी ने अपने यहां काम कर रहे लोगों को नौकरी से निकाल दिया तो किसी ने वेतन में कटौती कर दी। इसके इतर शहर के लोगों ने कोरोना काल के दौरान नए आयाम स्थापित किए। जिससे परिवार के साथ अन्य लोगों की आजीविका चल सके। अमर उजाला की उम्मीद का उजियारा पहल के तहत लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं।
शुरुआत का समय हमारे लिए परीक्षा की घड़ी का समय रहा, जिसे हम सभी को पास होकर दिखाना था। बताया कि इस रोग के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। लोगों को शासन द्वारा बताए गए मूलमंत्र को अपनाने की समय-समय पर अपील कर रहे हैं।
आपदा आने पर भी नहीं मानी हार
डॉ. नरेश गोयल स्वास्थ्य विभाग में एसीएमओ के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही कोरोना संक्रमण लोगों की जांच कराने के लिए नोडल प्रभारी का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। प्रतिदिन किस टीम द्वारा कितनी जांच की गई, कहां टीम को भेजा जाए और किस प्रकार कोरोना को चेन बनने से रोका जाए इस पर फोकस रहा। जिससे टीम का आत्मविश्वास न टूटे। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद बचाव के तरीके अपनाएं और जल्द स्वस्थ होकर साथियों के बीच लौटें।
दो बार संक्रमित होने के बाद कर रहे कार्य डॉ. परवेंद्र सिंह जिला अस्पताल में वरिष्ठ निश्चेतक के पद पर कार्यरत हैं और समय-समय पर कोविड मरीजों का उपचार कर रहे हैं। 9 माह के कार्यकाल के दौरान वह स्वयं दो बार कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।
इसके बावजूद वह संक्रमण मुक्त होने के बाद मरीजों की सेवा कर रहे हैं। बताया कि संक्रमण होने के दौरान एल-1 अस्पताल में मरीजों के साथ दिन व्यतीत किए और लोगों को संक्रमण से मुक्त होने के लिए योगा कराने के साथ अन्य टिप्स दिए। विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है उसका बखूबी पालन कर रहा हूं।
नौकरी गई तो कारोबार में उतरकर बने आत्मनिर्भर
कोरोना काल में लोगों को कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ा। किसी ने अपने यहां काम कर रहे लोगों को नौकरी से निकाल दिया तो किसी ने वेतन में कटौती कर दी। इसके इतर शहर के लोगों ने कोरोना काल के दौरान नए आयाम स्थापित किए। जिससे परिवार के साथ अन्य लोगों की आजीविका चल सके। अमर उजाला की उम्मीद का उजियारा पहल के तहत लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं।
भाई के साथ मिलकर किया कारोबार
सिकंदराबाद तहसील क्षेत्र के गांव सिरोधन निवासी राकेश यादव हरियाणा के एक मिल्क प्लांट में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन लगने पर प्लांट बंद हो गया। प्लांट बंद होने पर राकेश यादव गांव आ गए।
बताया कि लॉकडाउन का कुछ समय तो आसानी से बीत गया। पैसे की कमी सामने आई तो मुंह बोले भाई सुरेंद्र के साथ मिलकर मावा, पनीर और घी बनाने का कार्य शुरू किया। काम की जानकारी थी तो कारोबार चलने लगा। बताया कि यह प्रेरणा प्रधानमंत्री द्वारा आत्म निर्भर बनने के लिए दिए गए मंत्र से मिली। अन्य लोग भी मेहनत कर सफलता हासिल कर सकते हैं।
आपदा को बनाया अवसर
भारती मांगलिक लखावटी ब्लॉक क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय औरंगाबाद की प्रधान अध्यापिका हैं। कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन टीचिंग के माध्यम से शिक्षा के नए आयाम स्थापित करने का जहां मौका मिला। वहीं, वेबिनार के माध्यम से तीज, किट्टी में भी एक सुखद अनुभव प्राप्त हुआ।
बताया कि जैसे हर परिस्थिति के दो पहलू होते हैं ठीक उसी प्रकार वर्ष 2020 सुख और दुख के पल लाया। इस दौरान सभी के जीवन में कुछ सृजनात्मक अनुभव गढ़ने का मौका भी मिला। बताया कि लॉकडाउन के दौरान बड़ा बेटा घर आ गया था। जो वर्क फ्रॉम होम के कारण संभव हो सका। इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों ने लॉकडाउन का लुफ्त उठाया।
नई-नई डिश बनाने का मौका मिला। कुछ सीखने का मौका मिला तो कुछ अन्य लोगों को सिखाने का। वास्तव में ऐसा लगा कि सकारात्मक नजरिए से आपदा को अवसर बनाया जा सकता है।
बताया कि लॉकडाउन का कुछ समय तो आसानी से बीत गया। पैसे की कमी सामने आई तो मुंह बोले भाई सुरेंद्र के साथ मिलकर मावा, पनीर और घी बनाने का कार्य शुरू किया। काम की जानकारी थी तो कारोबार चलने लगा। बताया कि यह प्रेरणा प्रधानमंत्री द्वारा आत्म निर्भर बनने के लिए दिए गए मंत्र से मिली। अन्य लोग भी मेहनत कर सफलता हासिल कर सकते हैं।
आपदा को बनाया अवसर
भारती मांगलिक लखावटी ब्लॉक क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय औरंगाबाद की प्रधान अध्यापिका हैं। कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन टीचिंग के माध्यम से शिक्षा के नए आयाम स्थापित करने का जहां मौका मिला। वहीं, वेबिनार के माध्यम से तीज, किट्टी में भी एक सुखद अनुभव प्राप्त हुआ।
बताया कि जैसे हर परिस्थिति के दो पहलू होते हैं ठीक उसी प्रकार वर्ष 2020 सुख और दुख के पल लाया। इस दौरान सभी के जीवन में कुछ सृजनात्मक अनुभव गढ़ने का मौका भी मिला। बताया कि लॉकडाउन के दौरान बड़ा बेटा घर आ गया था। जो वर्क फ्रॉम होम के कारण संभव हो सका। इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों ने लॉकडाउन का लुफ्त उठाया।
नई-नई डिश बनाने का मौका मिला। कुछ सीखने का मौका मिला तो कुछ अन्य लोगों को सिखाने का। वास्तव में ऐसा लगा कि सकारात्मक नजरिए से आपदा को अवसर बनाया जा सकता है।