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सिकंदराबाद में मां की गोद के स्पर्श का होता है एहसास : संतोष आनंद
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सिकंदराबाद में मां की गोद के स्पर्श का होता है एहसास : संतोष आनंद
सिकंदराबाद। सिकंदराबाद मेरी मातृभूमि है। मातृभूमि को प्रणाम करने के लिए मैं अकसर सिकंदराबाद आता हूं। सिकंदराबाद पहुंचने पर मुझे मां की गोद के स्पर्श का एहसास होता है। यह बातें एक निजी कार्य के लिए सिकंदराबाद पहुंचे मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने कहीं।
उन्होंने बताया कि सिकंदराबाद उनकी मातृभूमि है। इससे उन्हें सिकंदराबाद से विशेष लगाव है। जब कभी भी उनका मन उदास होता है तो वह सिकंदराबाद पहुंचकर अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं और पुरानी यादों को ताजा कर अपने दुखों को भूला देते हैं। बताया कि फिल्मी दुनिया में जब उनके गीत धूम मचा रहे थे और उनका सितारा बुलंदी पर था। उस समय भी समय निकालकर सिकंदराबाद आते थे। कोट के पुल के पास पहुंचते ही उन्हें सिकंदराबाद की खुशबू आने लगती थी। घर पहुंचने पर मां की गोद में सिर रखकर सो जाते थे। मां उन्हें दुलार करती थीं और मोहल्ले में होने वाली बातों को बताती थीं। मां की गोद में सिर रखकर कब उन्हें नींद आ जाती थी, पता ही नहीं चलता था। आज भी सिकंदराबाद पहुंचने पर उन्हें मां की गोद के स्पर्श और पिता के प्यार का एहसास होता है।
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सिकंदराबाद। सिकंदराबाद मेरी मातृभूमि है। मातृभूमि को प्रणाम करने के लिए मैं अकसर सिकंदराबाद आता हूं। सिकंदराबाद पहुंचने पर मुझे मां की गोद के स्पर्श का एहसास होता है। यह बातें एक निजी कार्य के लिए सिकंदराबाद पहुंचे मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने कहीं।
उन्होंने बताया कि सिकंदराबाद उनकी मातृभूमि है। इससे उन्हें सिकंदराबाद से विशेष लगाव है। जब कभी भी उनका मन उदास होता है तो वह सिकंदराबाद पहुंचकर अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं और पुरानी यादों को ताजा कर अपने दुखों को भूला देते हैं। बताया कि फिल्मी दुनिया में जब उनके गीत धूम मचा रहे थे और उनका सितारा बुलंदी पर था। उस समय भी समय निकालकर सिकंदराबाद आते थे। कोट के पुल के पास पहुंचते ही उन्हें सिकंदराबाद की खुशबू आने लगती थी। घर पहुंचने पर मां की गोद में सिर रखकर सो जाते थे। मां उन्हें दुलार करती थीं और मोहल्ले में होने वाली बातों को बताती थीं। मां की गोद में सिर रखकर कब उन्हें नींद आ जाती थी, पता ही नहीं चलता था। आज भी सिकंदराबाद पहुंचने पर उन्हें मां की गोद के स्पर्श और पिता के प्यार का एहसास होता है।
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