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Bulandshahar News: काली नदी में और बढ़ा प्रदूषण, सतह पर दिख रहा झाग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 02 Mar 2025 10:31 PM IST
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Pollution increased in Kali river, foam visible on the surface
काली नदी में पानी पर तैरते सफेद झाग। संवाद
बुलंदशहर। दावे पर दावे और वादे पर वादे हुए लेकिन काली नदी की सफाई नहीं हो सकी। स्थिति यह है कि काली नदी में सफेद झाग बनने लगे हैं। इससे साफ है कि नदी का पानी और विषैला होता जा रहा है। इसका सीधा असर नदी के किनारे पड़ने वाले गांवों के एक लाख से अधिक लोगों पर पड़ रहा है।
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नदी गुलावठी क्षेत्र से जिले में प्रवेश करते हुए सौ किमी से अधिक का सफर पूरा कर अलीगढ़ जिले में प्रवेश कर जाती है। जिले में गुलावठी, बुलंदशहर, पहासू, शिकारपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों के 50 से अधिक नालों से होकर गंदा पानी और गंदगी नदी में डाला जा रही है। इसके चलते काली नदी इतनी प्रदूषित हो गई है, कि अब पानी में सफेद झाग बनने लगे हैं। नतीजतन नदी के आसपास के खेतों में की जा रही पैदावार भी दूषित पानी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।
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करीब आठ साल पहले काली नदी के पानी की केंद्रीय भूजल बोर्ड की ओर से जांच कराई गई थी। रिपोर्ट में पानी में मैग्नीज और लौह तत्वों की मौजूदगी सामान्य से 20 गुना अधिक तक पाई गई थी। जबकि ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम थी।
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50 करोड़ से होनी थी सफाई
करीब दो साल पहले काली नदी की सफाई के लिए शासन ने 50 करोड़ रुपये जारी करने का आश्वासन दिया और इसके लिए योजना भी बनाई गई लेकिन न तो धनराशि जारी की गई और न ही अधिकारियों ने अन्य किसी योजना के तहत काली की सफाई शुरू कराई। योजना के तहत काली नदी के दोनों ओर दो-दो सौ मीटर क्षेत्र में पौधे लगाते हुए गंदे नालों को काली में गिरने से रोका जाना था।

बांस प्रजाति के पौधे लगाकर कूड़ा रोकने का हो रहा प्रयास
नगर पालिका अधिकारियों ने शहर से निकलने वाले नालों से कूड़ा काली नदी में न पहुंचे, इसके लिए नालों के मुख पर बांस प्रजाति के पौधे लगाए थे। करीब 20 लाख रुपये की लागत से लगाए गए पौधे से कूड़ा रोकने के लिए कदम उठाए गए, लेकिन यह पौधे भी नष्ट हो गए हैं। इसके चलते अब भी कूड़ा नालों से काली नदी में पहुंच रहा है।



काली नदी में कूड़ा न पहुंचे, इसके लिए बांस प्रजाति के पौधे लगाए गए थे। कुछ पशु नाले में घुसकर पौधों को नष्ट कर चुके हैं, इसके चलते योजना सफल नहीं हो रही है। इसके लिए जल्द ही जांच कराते हुए पशु पालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अमित गौतम, सहायक अभियंता, जलकल विभाग नगर पालिका
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