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Bulandshahar News: सुमित के हत्यारों का अब तक पता नहीं लगा सकी पुलिस
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बुलंदशहर। स्याना हिंसा के दौरान जान गंवाने वाले सुमित कुमार के हत्यारों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका। कोर्ट के फैसले के दौरान मृतक सुमित के परिजन न्यायालय परिसर में मौजूद रहे लेकिन सुमित की हत्या के दोषियों पर कार्रवाई न होने पर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। अब परिजन न्याय की गुहार के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कह रहे हैं।
कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को सुमित के पिता अमरजीत की आंखें भर आईं। रुंधे गले से कहा कि उनके बेटे ने कोई अपराध नहीं किया था। पुलिस ने उसकी हत्या की और अब कोर्ट से भी उन्हें न्याय नहीं मिला। कहा कि आगरा फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट से साफ हुआ था कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित की हत्या एक ही हथियार से की गई थी लेकिन पुलिस अभी तक हथियार भी बरामद नहीं कर पाई। इसके अलावा एकमात्र स्वतंत्र गवाह मूला उर्फ मुकेश ने भी कोर्ट में गवाही दी थी कि पुलिस ने ही सुमित की हत्या की है।
हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
सुमित के पिता अमरजीत ने बताया कि उनका बेटा तीन दिसंबर को घर से बाजार जाने के लिए निकला था। हिंसा के दौरान वह मौके से गुजर रहा था तभी पुलिस ने उसकी हत्या कर दी। सूचना पर वह अपने भतीजे लोकेंद्र व अन्य परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे तो पुलिस ने उल्टा कार्रवाई करते हुए लोकेंद्र को भी मुख्य आरोपी बना दिया। अब कोर्ट से भी सुमित को न्याय नहीं मिला। लोकेंद्र को आजीवन कारावास की सजा देते हुए उनके परिवार को तबाह कर दिया। अब दोनों को न्याय दिलाने के लिए वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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पुलिस भर्ती की कोचिंग कर लौट रहा था सौरभ
हिंसा के आरोपियों में शामिल सौरभ की मां शशिप्रभा ने बताया कि उनका बेटा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। तीन दिसंबर की दोपहर वह कोचिंग कर लौट रहा था। भीड़ को देखकर वह मौके पर रुका था और केवल खड़ा हुआ वीडियो में कैद होने को आधार मानते हुए पुलिस ने सौरभ को दोषी बना दिया। कहा कि इंस्पेक्टर सुबोध और सुमित के साथ भी गलत हुआ था लेकिन इसके बाद पुलिस ने सौरभ जैसे कई युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया।
सजा के बाद कोर्ट परिसर में बिलखते रहे परिजन
कोर्ट से सजा की घोषणा के बाद दोषियों के परिजन कोर्ट परिसर में ही बिलखते रहे। परिजनों की आंखों में आंसू थे और वह अपने बच्चों, भाइयों को निर्दोष बता रहे थे। इस दौरान सचिन की मां ने रोते हुए कहा कि सचिन की नवंबर में शादी होनी है। वह बार-बार पूछ रहीं थीं कि शादी से पहले सचिन बाहर तो आ जाएगा। इस दौरान अन्य परिजन उन्हें ढांढस बंधाते हुए हाईकोर्ट में अपील करने और बरी होने की सांत्वना दे रहे थे।
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कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को सुमित के पिता अमरजीत की आंखें भर आईं। रुंधे गले से कहा कि उनके बेटे ने कोई अपराध नहीं किया था। पुलिस ने उसकी हत्या की और अब कोर्ट से भी उन्हें न्याय नहीं मिला। कहा कि आगरा फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट से साफ हुआ था कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित की हत्या एक ही हथियार से की गई थी लेकिन पुलिस अभी तक हथियार भी बरामद नहीं कर पाई। इसके अलावा एकमात्र स्वतंत्र गवाह मूला उर्फ मुकेश ने भी कोर्ट में गवाही दी थी कि पुलिस ने ही सुमित की हत्या की है।
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हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
सुमित के पिता अमरजीत ने बताया कि उनका बेटा तीन दिसंबर को घर से बाजार जाने के लिए निकला था। हिंसा के दौरान वह मौके से गुजर रहा था तभी पुलिस ने उसकी हत्या कर दी। सूचना पर वह अपने भतीजे लोकेंद्र व अन्य परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे तो पुलिस ने उल्टा कार्रवाई करते हुए लोकेंद्र को भी मुख्य आरोपी बना दिया। अब कोर्ट से भी सुमित को न्याय नहीं मिला। लोकेंद्र को आजीवन कारावास की सजा देते हुए उनके परिवार को तबाह कर दिया। अब दोनों को न्याय दिलाने के लिए वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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पुलिस भर्ती की कोचिंग कर लौट रहा था सौरभ
हिंसा के आरोपियों में शामिल सौरभ की मां शशिप्रभा ने बताया कि उनका बेटा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। तीन दिसंबर की दोपहर वह कोचिंग कर लौट रहा था। भीड़ को देखकर वह मौके पर रुका था और केवल खड़ा हुआ वीडियो में कैद होने को आधार मानते हुए पुलिस ने सौरभ को दोषी बना दिया। कहा कि इंस्पेक्टर सुबोध और सुमित के साथ भी गलत हुआ था लेकिन इसके बाद पुलिस ने सौरभ जैसे कई युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया।
सजा के बाद कोर्ट परिसर में बिलखते रहे परिजन
कोर्ट से सजा की घोषणा के बाद दोषियों के परिजन कोर्ट परिसर में ही बिलखते रहे। परिजनों की आंखों में आंसू थे और वह अपने बच्चों, भाइयों को निर्दोष बता रहे थे। इस दौरान सचिन की मां ने रोते हुए कहा कि सचिन की नवंबर में शादी होनी है। वह बार-बार पूछ रहीं थीं कि शादी से पहले सचिन बाहर तो आ जाएगा। इस दौरान अन्य परिजन उन्हें ढांढस बंधाते हुए हाईकोर्ट में अपील करने और बरी होने की सांत्वना दे रहे थे।