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जीतगढ़ी में डिस्टलरी के फर्जी बार कोड वाली जहरीली शराब की बोतलों ने बांटी मौत
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जीतगढ़ी में डिस्टलरी के फर्जी बार कोड वाली जहरीली शराब की बोतलों ने बांटी मौत
बुलंदशहर। सिकंदराबाद के जीतगढ़ी गांव में जिस जहरीली शराब को पीने से छह लोगों की मौतें हुईं वह डिस्टलरी के फर्जी बार कोड वाली बोतलों में पैक की गई थी। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद जहरीली शराब के पव्वों की जांच कराई तो पता चला कि शराब माफिया डिस्टलरी की खाली बोतलों में ही जहरीली शराब बेच रहे थे। इन बोतलों पर दर्ज बार कोड भी 2019 का है।
सिकंदराबाद के जीतगढ़ी गांव में शराब से मौतों के बाद ही पुलिस ने वहां से कुछ पव्वे बरामद किए थे। इन पव्वों को जांच के लिए भेजा गया क्योंकि इन पर डिस्टलरी का नाम लिखा था। डिस्टलरी के स्तर पर ही कोई चूक तो नहीं हुई यह जांचने के लिए भी इन पव्वों को सील करके भेजना जरूरी था। पुलिस जांच मतें पता चला है कि बोतलों पर जो बार कोड दर्ज है वह साल 2019 का है और साल 2020 में यह अमान्य है। इससे यह तथ्य पुष्ट होता है कि शराब माफिया ने डिस्टलरी की साल 2019 की पुरानी बोतलेें कबाड़ियों से खरीदीं और उनमें जहरीली शराब भरकर जीतगढ़ी गांव में कुलदीप के घर में चल रहे अवैध ठेके पर बेचने के लिए भेज दीं। यही शराब पीने से छह लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए। माफिया और तस्कर मिथाइल एल्कोहल और अन्य पदार्थ मिलाकर शराब बनाते हैं। सरकारी दुकानों पर बिकने वाली शराब ऑथराइज्ड डिस्टलरी से मानकों को पूरा कर और चेक होने बाद ही दुकानों पर भेजी जाती है।जीतगढ़ी गांव में मरे गए लोगों ने ने मिथाइल एल्कोहल से बनी शराब का सेवन किया था या नहीं यह विसरा की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनपदभर में कुछ समय पूर्व सिकंदराबाद क्षेत्र में एक गैंग द्वारा अवैध फैक्टरी चलाने का भंडाफोड़ हुआ था। आरोपी फैक्टरी में मिथाइल एल्कोहल का इस्तेमाल कर शराब बनाते थे। जिसमें उसकी मात्रा निर्धारित किए बिना ही तैयार किया जाता था, जो कि एक तरह से लोगों के लिए जहर है। उस दौरान सिकंदराबाद का यह क्षेत्र खुर्जा सर्किल में आता था। लेकिन, बाद में सिकंदराबाद सर्किल अलग हुआ और यह सिकंदराबाद सर्किल से जुड़ गया था। बताया जा रहा है कि बीते करीब दो वर्ष से यह गैंग एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। इसी कारण बीते कुछ समय से यह क्षेत्र जहरीली शराब का गढ़ बना हुआ है।
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बुलंदशहर। सिकंदराबाद के जीतगढ़ी गांव में जिस जहरीली शराब को पीने से छह लोगों की मौतें हुईं वह डिस्टलरी के फर्जी बार कोड वाली बोतलों में पैक की गई थी। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद जहरीली शराब के पव्वों की जांच कराई तो पता चला कि शराब माफिया डिस्टलरी की खाली बोतलों में ही जहरीली शराब बेच रहे थे। इन बोतलों पर दर्ज बार कोड भी 2019 का है।
सिकंदराबाद के जीतगढ़ी गांव में शराब से मौतों के बाद ही पुलिस ने वहां से कुछ पव्वे बरामद किए थे। इन पव्वों को जांच के लिए भेजा गया क्योंकि इन पर डिस्टलरी का नाम लिखा था। डिस्टलरी के स्तर पर ही कोई चूक तो नहीं हुई यह जांचने के लिए भी इन पव्वों को सील करके भेजना जरूरी था। पुलिस जांच मतें पता चला है कि बोतलों पर जो बार कोड दर्ज है वह साल 2019 का है और साल 2020 में यह अमान्य है। इससे यह तथ्य पुष्ट होता है कि शराब माफिया ने डिस्टलरी की साल 2019 की पुरानी बोतलेें कबाड़ियों से खरीदीं और उनमें जहरीली शराब भरकर जीतगढ़ी गांव में कुलदीप के घर में चल रहे अवैध ठेके पर बेचने के लिए भेज दीं। यही शराब पीने से छह लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए। माफिया और तस्कर मिथाइल एल्कोहल और अन्य पदार्थ मिलाकर शराब बनाते हैं। सरकारी दुकानों पर बिकने वाली शराब ऑथराइज्ड डिस्टलरी से मानकों को पूरा कर और चेक होने बाद ही दुकानों पर भेजी जाती है।जीतगढ़ी गांव में मरे गए लोगों ने ने मिथाइल एल्कोहल से बनी शराब का सेवन किया था या नहीं यह विसरा की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनपदभर में कुछ समय पूर्व सिकंदराबाद क्षेत्र में एक गैंग द्वारा अवैध फैक्टरी चलाने का भंडाफोड़ हुआ था। आरोपी फैक्टरी में मिथाइल एल्कोहल का इस्तेमाल कर शराब बनाते थे। जिसमें उसकी मात्रा निर्धारित किए बिना ही तैयार किया जाता था, जो कि एक तरह से लोगों के लिए जहर है। उस दौरान सिकंदराबाद का यह क्षेत्र खुर्जा सर्किल में आता था। लेकिन, बाद में सिकंदराबाद सर्किल अलग हुआ और यह सिकंदराबाद सर्किल से जुड़ गया था। बताया जा रहा है कि बीते करीब दो वर्ष से यह गैंग एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। इसी कारण बीते कुछ समय से यह क्षेत्र जहरीली शराब का गढ़ बना हुआ है।
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