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पितृ विसर्जनी अमावस्या : गंगा स्नान कर श्रद्धालुओं ने जलदान-तर्पण कर पितरों को दी विदाई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:16 PM IST
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Pitri Visarjani Amavasya: Devotees bid farewell to their ancestors after bathing in the Ganges and performing water offerings and *Tarpan*.
अनूपशहर में गंगा स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
अनूपशहर/अहार/डिबाई/नरौरा। पितृ विसर्जनी अमावस्या पर शनिवार को जिले के गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पितृपक्ष के अंतिम दिन पितरों की विदाई से पहले श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ जलदान और तर्पण कर पितरों की शांति और मोक्ष की कामना की।
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भोर होने से पहले ही अनूपशहर, आहार, डिबाई और नरौरा के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। हर-हर गंगे के जयकारों से गंगा तट गूंज उठे। जिले के अलावा आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी वाहनों से गंगा स्नान के लिए पहुंचे। घाटों पर पुरोहितों ने धार्मिक विधि-विधान से पूजन और तर्पण कराया।
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अनूपशहर के बबस्टरगंज घाट, बाबा मस्तराम घाट, गंगा पुल और कच्चे घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। शुक्रवार देर शाम से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रविवार सुबह होते-होते प्रमुख घाटों पर स्नान और तर्पण करने वालों की कतारें लग गईं। घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। पुलिसकर्मी भीड़ और यातायात व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।
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नरौरा, कर्णवास व अहार क्षेत्र के अंबिका देवी घाट पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पुरोहितों के निर्देशन में तर्पण किया और सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ विसर्जनी अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि याद नहीं रहती, उनके निमित्त भी इस दिन धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
पुरोहित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या को महालया अमावस्या और पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है। इसी दिन 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का समापन होता है। श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार पितरों को विदाई देकर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, शाम को दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर भी पितरों को विदाई दी जाती है।

पितृपक्ष के समापन के साथ ही श्रद्धालु शारदीय नवरात्र की तैयारियों में जुटेंगे। उधर, अमावस्या पर शनि मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। श्रद्धालुओं ने शनि देव की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना की। पुलिस प्रशासन की सतर्कता के बीच अनूपशहर सहित जिले के प्रमुख गंगा घाटों पर स्नान पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। वहीं, दूसरी ओर आहार में सिद्ध बाबा गंगा घाट पर जलस्तर बढ़ने के कारण कटान हो गया। इसके चलते यहां पर गंगा स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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