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‘प्रधानजी’ को बेसिक शिक्षा विभाग से लेना होगा नो-ड्यूज

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 11:18 PM IST
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‘प्रधानजी’ को बेसिक शिक्षा विभाग से लेना होगा नो-ड्यूज
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बुलंदशहर। पूर्व ग्राम प्रधानों को यदि दोबारा चुनाव लड़ना है तो उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन से भी गुजरना होगा। उक्त पूर्व प्रधान को चुनाव लड़ने से पहले विभाग से नो-ड्यूज प्रमाण पत्र लेना होगा। इसके लिए उसे मिड- डे-मील का पूरा हिसाब भी देना होगा। इसके बिना कोई भी पूर्व प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में मिड-डे-मील के तहत बच्चों को दोपहर के समय निशुल्क भोजन की व्यवस्था की जाती है। मिड-डे-मील की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है। हालांकि कोरोना काल में स्कूल बंद रहे। इस दौरान छात्रों को मिड डे मील भी नहीं दिया जा रहा है। गत वर्ष 25 दिसंबर को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल भी पूरा हो गया और अब पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर चल रही है। इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने एक नया आदेश जारी किया किया है। इस आदेश के तहत पूर्व प्रधानों को विभाग से नो-ड्यूज लेना होगा। यदि कोई पूर्व प्रधान नामांकन के लिए नो-ड्यूज प्रमाणपत्र नहीं लगाएगा तो उसे चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाएगा। अफसरों ने बताया कि विभाग के इस आदेश का पालन किया जाएगा। सभी स्कूलों में भुगतान के रजिस्टर लगे हुए हैं। उनकी जांच कर यह पता किया जा रहा है कि किसी प्रधान पर कोई बकाया तो नहीं चल रहा है। यदि ऐसा तो उसे बकाया जमा करने के लिए कहा जाएगा।
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इस तरह प्रधान करते हैं ें मिड-डे-मील का संचालन
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में मिड-डे-मील के संचालन में ग्राम प्रधान की अहम भूमिका रहती है। शासन में मिड-डे-मील का पैसा विभाग के पास आता है। यह पैसा विभाग से स्कूल में पहुंचता है। स्कूल में मिड-डे-मील का संचालन करने के लिए एक कमेटी बनती है। इसका बैंक में खाता भी होता है। यह खाता प्रधान और स्कूल के हेडमास्टर का ज्वाइंट होता है। एमडीएम का राशन गांव में संचालित सरकारी राशन की दुकान से उठाया जाता है। दुकान से राशन उठाकर स्कूल में भिजवाने की जिम्मेदारी प्रधान की होती है। इसके बाद इस राशन से स्कूल में हेडमास्टर की देखरेख में बच्चों के लिए खाना तैयार किया जाता है। सम्मलित बैंक से राशन का भुगतान करने के लिए स्कूल के हेडमास्टर को पहले प्रधान को लिखकर देना होता है, फिर प्रधान और हेडमास्टर के साइन वाला चेक तैयार कर बैंक खाते से राशि निकाली जाती है। इस राशि का हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी हेडमास्टर के साथ प्रधान की भी होती है।
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पूर्व प्रधानों को नो-ड्यूज देने के संबंध में विभाग से आदेश आ गए हैं। एमडीएम से संबंधित रजिस्टर देखने के बाद ही नो-ड्यूज प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। अभी फिलहाल कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। - अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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