फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Negligence in operation

ऑपरेशन कर पेट में छोड़ी कैंची, आयोग ने चिकित्सकों को माना दोषी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 11:07 PM IST
विज्ञापन
Negligence in operation
जिला उपभोक्ता आयोग के बाहर जानकारी देते पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता। - फोटो : BULANDSHAHR
ऑपरेशन कर पेट में छोड़ी कैंची, आयोग ने चिकित्सकों को माना दोषी
विज्ञापन

बुलंदशहर। नगर स्थित एक निजी चिकित्सालय के दंपती चिकित्सक पर ऑपरेशन के दौरान एक महिला मरीज के पेट में कैंची छोड़ने का दोषी माना गया है। मामले में करीब आठ साल बाद डॉक्टर दंपती को न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग ने दोषी करार दिया है। आयोग ने डा. दंपती के पंजीकरण के खिलाफ कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नई दिल्ली, डीएम बुलंदशहर और सीएमओ को पत्र भेजा है। पीड़ित महिला की पिछले साल मौत हो चुकी है।

अनूपशहर के दिल्ली दरवाजा निवासी अवधेश कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी गीता के पेट में वर्ष 2012 में परेशानी हुई। जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को नगर के मानसरोवर कॉलोनी स्थित अस्पताल रामा एंड जयशिप्रा मेडिकल सेंटर में डा. प्रमिला मित्तल व उनके पति डा. जितेंद्र मित्तल के यहां 16 नवंबर 2012 को बच्चेदानी का ऑपरेशन कराया था। आरोप है कि आपरेशन के बाद गीता के पेट में अक्सर दर्द रहने लगा। डा. दंपती को बताया तो उन्होंने कई महीनों तक दवा दी, लेकिन जब कुछ समझ न आया तो हायर सेंटर रेफर कर दिया। दिल्ली जाकर वहां के प्रतिष्ठित अस्पताल में उपचार शुरू कराया तो चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कर बताया कि पेट में सर्जिकल औजार है। तुरंत ही आपरेशन किया तो पेट से कैंची निकली। दिल्ली की चिकित्सक ने वहीं सब्जी मंडी थाने पर सूचना देकर कैंची पुलिस को सौंप दी। मार्च 2013 में अवधेश ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में चिकित्सक के खिलाफ वाद दायर कर दिया, साथ ही कोतवाली नगर में छह मार्च 2013 को मुकदमा भी दर्ज करवा दिया। आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह तथा सदस्य मोहित त्यागी ने सुनवाई शुरू की। अवधेश की ओर से एडवोकेट जैनेंद्र सिंह चौहान, राजपाल सिंह तथा भूपेंद्र राजपूत ने बताया कि, 19 मार्च को आयोग ने फैसला सुनाते हुए चिकित्सक दंपती को दोषी करार दिया और डा. जितेंद्र व डा. प्रमिला का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करने के लिए चेयरमैन राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग दिल्ली तथा चेयरमैन उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के साथ-साथ जिलाधिकारी व सीएमओ को भी आदेश की प्रति भेज दी है। साथ ही बतौर हर्जाना 3.75 लाख रुपये दंड भी लगाया है। साथ ही इस दंड राशि पर ब्याज दर भी नियत किया गया है। इसके अलावा उन्होंने संबंधित अफसरों को निर्देश दिए हैं कि जिन निजी चिकित्सालयों में मरीजों के बिल चोरी किए जाते हैं, यानी नहीं दिए जातें हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। पीड़ित महिला की पिछले साल जून में मृत्यु हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed