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नवरात्र : इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां भगवती
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अंसारी रोड स्थित एक दुकान से माता रानी की मूर्ती खरीदती महिला।
- फोटो : BULANDSHAHR
नवरात्र : इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां भगवती
बुलंदशहर। चैत्र नवरात्र का 13 अप्रैल से शुभारंभ होगा। चैत्र नवरात्र इस बार भी विशेष फलदाई होंगे। इस बार माता का आगमन घोड़े पर और गमन हाथी पर होगा। चैत्र नवरात्र के लिए श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्र मां दुर्गा की उपासना के लिए यह बेहद शुभ माना जाता है। पंडित राज शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र पर मां दुर्गा का आगमन अश्व अर्थात घोड़े पर होगा। शास्त्रों के मुताबिक मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आती हैं तो इसका देश और प्रकृति पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है। बताया कि घोड़े की सवारी शासन, सत्ता और जनता के लिए समस्याओं को बढ़ाने वाली होती है। वहीं नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर जाएंगी। इससे धन का लाभ होगा। व्यापार में वृद्धि होने के साथ व्यवसायिक संसाधनों में उन्नति होगी और वर्षा होने के अधिक योग बनेंगे। मंगलवार से संवत्सर प्रारंभ होने के कारण इसके राजा मंगल हुए। 13 अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र का समापन 21 अप्रैल को होगा। 20 अप्रैल को अष्टमी की पूजा होगी और 21 को महानवमी/रामनवमी मनाई जाएगी।
कलश स्थापना की विधि
पंडित करुणानिधि भारद्वाज ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल की सुबह 5.28 बजे से सुबह 8.46 बजे तक रहेगा। जबकि, अभिजित मुहूर्त का समय पूर्वाह्न 11.36 बजे से दोपहर 12.24 तक है। कलश स्थापना के लिए मिट्टी में जौ मिलाकर मिट्टी या तांबे के कलश में जल भरकर रखें। कलावा बांधें, कलश में जल, लौंग, सुपारी सहित सिक्का डालें। आम के पत्ते लगाकर पूर्ण पात्र में चावल भरकर कलश पर रखें। फिर नारियल में लाल कपड़ा बांधकर पूर्ण पात्र पर रखकर कलश स्थापना की प्रक्रिया पूर्ण करें।
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बाजार होने लगे गुलजार
बुलंदशहर। चैत्र नवरात्र नजदीक आते ही बाजारों में माता रानी की चुनरी सहित पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं। दुकानों पर तरह-तरह की चुनरी और माता रानी के वस्त्र मिल रहे हैं। मां के नौ स्वरूपों वाले चित्र की भी खूब मांग हो रही है। साथ ही पूजा-अर्चना के लिए धूप, दीपक सहित अन्य सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है। नगर के प्रसिद्ध मंदिरों में देवी साठा मंदिर, राजराजेश्वर मंदिर, भवन मंदिर, भतेश्वर मंदिर में पूरे नवरात्र पूजा-अर्चना की जाएगी। संवाद
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बुलंदशहर। चैत्र नवरात्र का 13 अप्रैल से शुभारंभ होगा। चैत्र नवरात्र इस बार भी विशेष फलदाई होंगे। इस बार माता का आगमन घोड़े पर और गमन हाथी पर होगा। चैत्र नवरात्र के लिए श्रद्धालुओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्र मां दुर्गा की उपासना के लिए यह बेहद शुभ माना जाता है। पंडित राज शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र पर मां दुर्गा का आगमन अश्व अर्थात घोड़े पर होगा। शास्त्रों के मुताबिक मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आती हैं तो इसका देश और प्रकृति पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है। बताया कि घोड़े की सवारी शासन, सत्ता और जनता के लिए समस्याओं को बढ़ाने वाली होती है। वहीं नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर जाएंगी। इससे धन का लाभ होगा। व्यापार में वृद्धि होने के साथ व्यवसायिक संसाधनों में उन्नति होगी और वर्षा होने के अधिक योग बनेंगे। मंगलवार से संवत्सर प्रारंभ होने के कारण इसके राजा मंगल हुए। 13 अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र का समापन 21 अप्रैल को होगा। 20 अप्रैल को अष्टमी की पूजा होगी और 21 को महानवमी/रामनवमी मनाई जाएगी।
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कलश स्थापना की विधि
पंडित करुणानिधि भारद्वाज ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल की सुबह 5.28 बजे से सुबह 8.46 बजे तक रहेगा। जबकि, अभिजित मुहूर्त का समय पूर्वाह्न 11.36 बजे से दोपहर 12.24 तक है। कलश स्थापना के लिए मिट्टी में जौ मिलाकर मिट्टी या तांबे के कलश में जल भरकर रखें। कलावा बांधें, कलश में जल, लौंग, सुपारी सहित सिक्का डालें। आम के पत्ते लगाकर पूर्ण पात्र में चावल भरकर कलश पर रखें। फिर नारियल में लाल कपड़ा बांधकर पूर्ण पात्र पर रखकर कलश स्थापना की प्रक्रिया पूर्ण करें।
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बाजार होने लगे गुलजार
बुलंदशहर। चैत्र नवरात्र नजदीक आते ही बाजारों में माता रानी की चुनरी सहित पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं। दुकानों पर तरह-तरह की चुनरी और माता रानी के वस्त्र मिल रहे हैं। मां के नौ स्वरूपों वाले चित्र की भी खूब मांग हो रही है। साथ ही पूजा-अर्चना के लिए धूप, दीपक सहित अन्य सामग्री की बिक्री शुरू हो गई है। नगर के प्रसिद्ध मंदिरों में देवी साठा मंदिर, राजराजेश्वर मंदिर, भवन मंदिर, भतेश्वर मंदिर में पूरे नवरात्र पूजा-अर्चना की जाएगी। संवाद