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जिला पंचायत मॉल के आवंटियों और विधायक के बीच खिंचीं तलवारें
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जिला पंचायत मॉल के आवंटियों और विधायक के बीच खिंचीं तलवारें
बुलंदशहर। कालाआम चौराहे के पास जिला पंचायत की ओर से बनाया गया मॉल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सीडीओ की जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता सामने आने के बाद आवंटियों और सदर विधायक के बीच भी तलवारें खिंचती हुईं नजर आ रही हैं। आवंटियों का कहना है कि खुद जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए प्रदीप चौधरी ने पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आवंटन किया था।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अध्यक्ष और वर्तमान सदर विधायक प्रदीप चौधरी ने विधानसभा में मॉल के निर्माण में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया और मुख्यमंत्री समेत अन्य स्तर पर कई बार शिकायत की। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई। इसके बाद डीएम सीपी सिंह ने सीडीओ अभिषेक पांडेय को जांच सौंपी थी। सीडीओ की जांच में मॉल के निर्माण में अनियमितता मिली है। सीडीओ ने मॉल के निर्माण में फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश करते हुए डीएम को रिपोर्ट दी है।
सीडीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद बुलंद सिटी सेंटर एलॉटीज वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मंगलवार को मॉल परिसर में बैठक हुई। एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद प्रकाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि विधायक बार-बार निराधार तथ्यों के आधार पर मॉल में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। जिला पंचायत ने नियमानुसार मॉल में फ्लैट व दुकानों का आवंटन किया था। सहसचिव राजाराम ने कहा कि 29 मई 2018 को खुद विधायक प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर रहते हुए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटन किया था। यदि मॉल में भ्रष्टाचार था, तो उसी समय क्यों उजागर नहीं किया गया। सचिव प्रवेश कुमार ने कहा कि कई बार मॉल के निर्माण की जांच हो चुकी है, लेकिन हर बार आरोप निराधार पाए गए हैं। आवंटियों से धनराशि जमा कराने के लिए प्रदीप चौधरी ने ही अध्यक्ष रहते हुए नोटिस जारी किया था और चेतावनी दी थी कि यदि शीघ्र धनराशि जमा नहीं कराई गई तो उनका आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। विधायक की शिकायतों के कारण जिला पंचायत ने अभी तक आवंटियों को स्वामित्व नहीं दिया है। बड़ी संख्या में आवंटी ऐसे हैं जिन्होंने पूरी धनराशि जमा कर दी है।
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तीन मंजिला की स्वीकृति थी, आठ मंजिला बना दिया
सीडीओ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक केवल तीन मंजिला मॉल बनाने के लिए ही 31 मार्च 2012 को जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद मॉल को आठ मंजिला बनाया गया, इसके लिए बीडीए को नक्शा पास कराने के लिए 2.54 करोड़ रुपये की फीस दी गई, लेकिन इसकी कोई स्वीकृति नहीं ली गई। इसके अलावा फ्लैट व कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों के आवंटन को भी नियमानुसार करने के बजाए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित कर दिया गया। जिसके चलते जिपं को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
2012 में रखी गई थी मॉल निर्माण की रूपरेखा
वर्ष 2012 में जिला पंचायत ने काला आम चौराहे के पास मॉल निर्माण की रूपरेखा तैयार की थी। 28.50 करोड़ की लागत से मॉल में 72 आवासीय फ्लैट और 210 व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कराया गया था। प्रदेश पहली बार किसी जिला पंचायत ने मॉल का निर्माण कराया था। अब तक आवंटियों को स्वामित्व नहीं दिया गया है। जिन आवंटियों ने पूरी धनराशि जमा नहीं की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई है।
बोले आवंटी
मॉल निर्माण के दौरान फ्लैट व दुकानों की जो कीमत तय की गई थी, उसका भुगतान आवंटियों ने किया है। अब कीमत बढ़ाना न्याय संगत नहीं है। इसका विरोध किया जाएगा। 2014 में पूरा भुगतान कर चुके हैं, इसके बाद भी अभी तक पजेशन नहीं दिया गया है। मॉल में आवंटियों ने 80 फीसदी धनराशि तब जमा की थी। - देवेश त्यागी
करीब छह से आठ साल पहले बड़ी संख्या में आवंटियों ने धनराशि जमा की थी, ऐसे में उन्हें दी गई धनराशि पर ब्याज मिलना चाहिए। रेरा और सुप्रीम कोर्ट ने भी आवंटियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। - भरत शर्मा
मॉल निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। इसके लिए समय-समय पर शिकायत की गई है। सीडीओ ने ईमानदारी से जांच की तो अनियमितता सामने आई। शासन स्तर पर भी जांच कराने की मांग की जाएगी। - प्रदीप चौधरी, विधायक सदर
मॉल के निर्माण के संबंध में सीडीओ ने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जो भी दस्तावेज कार्यालय में व फाइलों में उपलब्ध हैं, उसके अनुसार सभी बिंदुओं पर जबाव दिए गए हैं। जांच में क्या सामने आया है, क्या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। - अजय कुमार, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत
मॉल निर्माण का कार्य पूर्व के बोर्ड में किया गया था। पहले भी जांच की गई थी। मेरे समक्ष निर्माण और आवंटन से संबंधित कोई अनियमितता नहीं आई है। अगर कोई फर्जीवाड़ा किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए। जांच में पूरी तरह से सहयोग दिया जाएगा। - डा. अंतुल तेवतिया, अध्यक्ष, जिला पंचायत
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बुलंदशहर। कालाआम चौराहे के पास जिला पंचायत की ओर से बनाया गया मॉल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सीडीओ की जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता सामने आने के बाद आवंटियों और सदर विधायक के बीच भी तलवारें खिंचती हुईं नजर आ रही हैं। आवंटियों का कहना है कि खुद जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए प्रदीप चौधरी ने पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आवंटन किया था।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अध्यक्ष और वर्तमान सदर विधायक प्रदीप चौधरी ने विधानसभा में मॉल के निर्माण में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया और मुख्यमंत्री समेत अन्य स्तर पर कई बार शिकायत की। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई। इसके बाद डीएम सीपी सिंह ने सीडीओ अभिषेक पांडेय को जांच सौंपी थी। सीडीओ की जांच में मॉल के निर्माण में अनियमितता मिली है। सीडीओ ने मॉल के निर्माण में फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश करते हुए डीएम को रिपोर्ट दी है।
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सीडीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद बुलंद सिटी सेंटर एलॉटीज वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मंगलवार को मॉल परिसर में बैठक हुई। एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद प्रकाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि विधायक बार-बार निराधार तथ्यों के आधार पर मॉल में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। जिला पंचायत ने नियमानुसार मॉल में फ्लैट व दुकानों का आवंटन किया था। सहसचिव राजाराम ने कहा कि 29 मई 2018 को खुद विधायक प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर रहते हुए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटन किया था। यदि मॉल में भ्रष्टाचार था, तो उसी समय क्यों उजागर नहीं किया गया। सचिव प्रवेश कुमार ने कहा कि कई बार मॉल के निर्माण की जांच हो चुकी है, लेकिन हर बार आरोप निराधार पाए गए हैं। आवंटियों से धनराशि जमा कराने के लिए प्रदीप चौधरी ने ही अध्यक्ष रहते हुए नोटिस जारी किया था और चेतावनी दी थी कि यदि शीघ्र धनराशि जमा नहीं कराई गई तो उनका आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। विधायक की शिकायतों के कारण जिला पंचायत ने अभी तक आवंटियों को स्वामित्व नहीं दिया है। बड़ी संख्या में आवंटी ऐसे हैं जिन्होंने पूरी धनराशि जमा कर दी है।
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तीन मंजिला की स्वीकृति थी, आठ मंजिला बना दिया
सीडीओ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक केवल तीन मंजिला मॉल बनाने के लिए ही 31 मार्च 2012 को जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद मॉल को आठ मंजिला बनाया गया, इसके लिए बीडीए को नक्शा पास कराने के लिए 2.54 करोड़ रुपये की फीस दी गई, लेकिन इसकी कोई स्वीकृति नहीं ली गई। इसके अलावा फ्लैट व कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों के आवंटन को भी नियमानुसार करने के बजाए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित कर दिया गया। जिसके चलते जिपं को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
2012 में रखी गई थी मॉल निर्माण की रूपरेखा
वर्ष 2012 में जिला पंचायत ने काला आम चौराहे के पास मॉल निर्माण की रूपरेखा तैयार की थी। 28.50 करोड़ की लागत से मॉल में 72 आवासीय फ्लैट और 210 व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कराया गया था। प्रदेश पहली बार किसी जिला पंचायत ने मॉल का निर्माण कराया था। अब तक आवंटियों को स्वामित्व नहीं दिया गया है। जिन आवंटियों ने पूरी धनराशि जमा नहीं की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई है।
बोले आवंटी
मॉल निर्माण के दौरान फ्लैट व दुकानों की जो कीमत तय की गई थी, उसका भुगतान आवंटियों ने किया है। अब कीमत बढ़ाना न्याय संगत नहीं है। इसका विरोध किया जाएगा। 2014 में पूरा भुगतान कर चुके हैं, इसके बाद भी अभी तक पजेशन नहीं दिया गया है। मॉल में आवंटियों ने 80 फीसदी धनराशि तब जमा की थी। - देवेश त्यागी
करीब छह से आठ साल पहले बड़ी संख्या में आवंटियों ने धनराशि जमा की थी, ऐसे में उन्हें दी गई धनराशि पर ब्याज मिलना चाहिए। रेरा और सुप्रीम कोर्ट ने भी आवंटियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। - भरत शर्मा
मॉल निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। इसके लिए समय-समय पर शिकायत की गई है। सीडीओ ने ईमानदारी से जांच की तो अनियमितता सामने आई। शासन स्तर पर भी जांच कराने की मांग की जाएगी। - प्रदीप चौधरी, विधायक सदर
मॉल के निर्माण के संबंध में सीडीओ ने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जो भी दस्तावेज कार्यालय में व फाइलों में उपलब्ध हैं, उसके अनुसार सभी बिंदुओं पर जबाव दिए गए हैं। जांच में क्या सामने आया है, क्या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। - अजय कुमार, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत
मॉल निर्माण का कार्य पूर्व के बोर्ड में किया गया था। पहले भी जांच की गई थी। मेरे समक्ष निर्माण और आवंटन से संबंधित कोई अनियमितता नहीं आई है। अगर कोई फर्जीवाड़ा किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए। जांच में पूरी तरह से सहयोग दिया जाएगा। - डा. अंतुल तेवतिया, अध्यक्ष, जिला पंचायत