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तंत्र के छल पर छलकीं आंखें, 22 साल बाद भी घोषणाएं अधूरी
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शहीद धमेंद्र सिंह चौहान के परिजन।
- फोटो : BULANDSHAHR
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तंत्र के छल पर छलकीं आंखें, 22 साल बाद भी घोषणाएं अधूरी
बुलंदशहर। कारगिल युद्ध भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य और बलिदान की अनूठी दास्तान है। 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है। इस युद्ध में शहादत देने वाले कई जांबाजों के परिवारों के लिए की गई घोषणाएं 22 साल बाद भी अधूरी हैं। शहीदों के परिजनों से इस पर बात हुई तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। (संवाद)
शहीद कंछी सिंह के गांव में नहीं बनी सड़क
खुर्जा तहसील के गांव किसुआगढ़ी निवासी कंछी सिंह ने कारगिल युद्ध में दुश्मनों को खदेड़ते हुए टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया था। दुश्मनों ने छिपकर गोलियां बरसाईं तो डटकर मुकाबला करते हुए कंछी सिंह छह जुलाई को शहीद हो गए थे। कंछी सिंह की प्रतिमा लगाकर गांव में उनका स्मारक बनाया गया जो इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। स्मारक से हबीबपुर गांव तक सड़क निर्माण की घोषणा हुई जो 22 साल बाद भी अधूरी है। पिता हरबल सिंह का सीना बेटे की शहादत पर गर्व से चौड़ा है, लेकिन स्मारक की उपेक्षा एवं सड़क न बनने का जिक्र करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं। गांव के लोगों को भी अपने इस लाल पर फख्र है, लेकिन शहीद के नाम पर सड़क न बनने से वह नाराज हैं।
पेट्रोल पंप मिला न एजेंसी, पट्टे की जमीन गंगा में समाई
अनूपशहर के गांव अनीवास निवासी धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दुश्मनों के ठिकाने की खोज के दौरान 26 जून 1999 को बारूदी सुरंग में हुए विस्फोट से वह शहीद हो गए थे। शहीद धर्मेंद्र की पत्नी बबीता देवी सरकारी तंत्र के छल का जिक्र करते हुए फफक पड़ती हैं। कहती हैं तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि गांव में उन्हें जमीन, पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी दी जाएगी। दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद गांव तोरई बच्चीखेड़ा में भूमि का पट्टा मिला जो अब गंगा में समाहित हो चुका है। पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी के नाम पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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100 बेड के अस्पताल की घोषणा भी नहीं हुई पूरी
परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव के पिता के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चौबीसा क्षेत्र में 100 बेड के अस्पताल के निर्माण की घोषणा की थी। अखिलेश यादव द्वारा लखनऊ में ही अस्पताल का शिलान्यास भी कर दिया गया था। परंतु आज भी यह अस्पताल नहीं बन सका है। योगेन्द्र यादव कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र पाने वाले अकेेले जीवित फौजी हैं। योगेन्द के पिता रामकरन यादव भी 1965 और 1971 की जंग में शामिल हुए थे। वैदिक इंटर कॉलेज औरंगाबाद अहीर के प्रधानाचार्य सुरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि क्षेत्र में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण हो जाए तो क्षेत्रवासियों को फ ायदा होगा।
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बुलंदशहर। कारगिल युद्ध भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य और बलिदान की अनूठी दास्तान है। 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है। इस युद्ध में शहादत देने वाले कई जांबाजों के परिवारों के लिए की गई घोषणाएं 22 साल बाद भी अधूरी हैं। शहीदों के परिजनों से इस पर बात हुई तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। (संवाद)
शहीद कंछी सिंह के गांव में नहीं बनी सड़क
खुर्जा तहसील के गांव किसुआगढ़ी निवासी कंछी सिंह ने कारगिल युद्ध में दुश्मनों को खदेड़ते हुए टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया था। दुश्मनों ने छिपकर गोलियां बरसाईं तो डटकर मुकाबला करते हुए कंछी सिंह छह जुलाई को शहीद हो गए थे। कंछी सिंह की प्रतिमा लगाकर गांव में उनका स्मारक बनाया गया जो इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। स्मारक से हबीबपुर गांव तक सड़क निर्माण की घोषणा हुई जो 22 साल बाद भी अधूरी है। पिता हरबल सिंह का सीना बेटे की शहादत पर गर्व से चौड़ा है, लेकिन स्मारक की उपेक्षा एवं सड़क न बनने का जिक्र करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं। गांव के लोगों को भी अपने इस लाल पर फख्र है, लेकिन शहीद के नाम पर सड़क न बनने से वह नाराज हैं।
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पेट्रोल पंप मिला न एजेंसी, पट्टे की जमीन गंगा में समाई
अनूपशहर के गांव अनीवास निवासी धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दुश्मनों के ठिकाने की खोज के दौरान 26 जून 1999 को बारूदी सुरंग में हुए विस्फोट से वह शहीद हो गए थे। शहीद धर्मेंद्र की पत्नी बबीता देवी सरकारी तंत्र के छल का जिक्र करते हुए फफक पड़ती हैं। कहती हैं तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि गांव में उन्हें जमीन, पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी दी जाएगी। दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद गांव तोरई बच्चीखेड़ा में भूमि का पट्टा मिला जो अब गंगा में समाहित हो चुका है। पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी के नाम पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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100 बेड के अस्पताल की घोषणा भी नहीं हुई पूरी
परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव के पिता के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चौबीसा क्षेत्र में 100 बेड के अस्पताल के निर्माण की घोषणा की थी। अखिलेश यादव द्वारा लखनऊ में ही अस्पताल का शिलान्यास भी कर दिया गया था। परंतु आज भी यह अस्पताल नहीं बन सका है। योगेन्द्र यादव कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र पाने वाले अकेेले जीवित फौजी हैं। योगेन्द के पिता रामकरन यादव भी 1965 और 1971 की जंग में शामिल हुए थे। वैदिक इंटर कॉलेज औरंगाबाद अहीर के प्रधानाचार्य सुरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि क्षेत्र में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण हो जाए तो क्षेत्रवासियों को फ ायदा होगा।