{"_id":"67927164d3d002b344023cda","slug":"increasing-depression-anxiety-and-problems-among-the-elderly-bulandshahr-news-c-133-1-bul1004-128531-2025-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: बुजुर्गों में बढ़ रहा अवसाद, चिंता और परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: बुजुर्गों में बढ़ रहा अवसाद, चिंता और परेशानी
विज्ञापन
जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक से परामर्श को लाइन में खड़े मरीज। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुलंदशहर। वर्तमान दौर में रहन-सहन और तनाव से भरी जीवनशैली में मानसिक रोग तेजी से लोगों में बढ़ रहा है। अवसाद (डिप्रेशन) के मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश बुजुर्ग हैं तो कुछ युवा भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इनमें पढ़ाई से लेकर काम का दबाव भी अवसाद का कारण बन रहा है। चिकित्सक ऐसे मरीजों को एहतियात बरतने के साथ परिजनों को ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल में मानसिक रोग की ओपीडी में प्रतिदिन 80 से 100 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक अवसाद की समस्या से पीड़ित मरीज होते हैं, जो ज्यादा सोचने के कारण होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी में अवसाद की समस्या हो रही है। बच्चों को अपनी पढ़ाई का दबाव व अन्य किसी कारण से डिप्रेशन हो जाता है। इससे बाहर नहीं निकलने का मुख्य कारण है कि वह अपने परिवार से परेशानियों को साझा नहीं करते हैं।
विज्ञापन
वहीं बुजुर्गाें में पुराना दर्द या शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनकी गतिशीलता में कमी देखी जाती है। जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट स्वाति यादव ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अक्सर लोग कभी-कभी अपने दोस्तों, परिवार या समुदाय से अलग हो जाते हैं। ऐसा दोस्तों या खास के गुजर जाने के कारण भी हो सकता है। ऐसे हालात में संबंधित को मानसिक अवसाद घेर लेता है। बुजुर्ग लोग अवसाद में लक्षणों के बारे में बात करने की संभावना कम रखते हैं।
जैसे उदास महसूस करना या गतिविधियों में रुचि न लेना। बताया कि बुजुर्गों को अकेलापन महसूस न होने दें। अकेलापन होने पर वह अवसाद में चले जाते हैं। कहा कि मानसिक रोग में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। रोगी को कभी भी बुरा भला न कहें। परिवार को यह समझना होगा कि मरीज जान बूझकर यह कार्य नहीं कर रहा है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में मानसिक रोग की ओपीडी में प्रतिदिन 80 से 100 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक अवसाद की समस्या से पीड़ित मरीज होते हैं, जो ज्यादा सोचने के कारण होती है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी में अवसाद की समस्या हो रही है। बच्चों को अपनी पढ़ाई का दबाव व अन्य किसी कारण से डिप्रेशन हो जाता है। इससे बाहर नहीं निकलने का मुख्य कारण है कि वह अपने परिवार से परेशानियों को साझा नहीं करते हैं।
विज्ञापन
वहीं बुजुर्गाें में पुराना दर्द या शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनकी गतिशीलता में कमी देखी जाती है। जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट स्वाति यादव ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अक्सर लोग कभी-कभी अपने दोस्तों, परिवार या समुदाय से अलग हो जाते हैं। ऐसा दोस्तों या खास के गुजर जाने के कारण भी हो सकता है। ऐसे हालात में संबंधित को मानसिक अवसाद घेर लेता है। बुजुर्ग लोग अवसाद में लक्षणों के बारे में बात करने की संभावना कम रखते हैं।
जैसे उदास महसूस करना या गतिविधियों में रुचि न लेना। बताया कि बुजुर्गों को अकेलापन महसूस न होने दें। अकेलापन होने पर वह अवसाद में चले जाते हैं। कहा कि मानसिक रोग में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। रोगी को कभी भी बुरा भला न कहें। परिवार को यह समझना होगा कि मरीज जान बूझकर यह कार्य नहीं कर रहा है।