{"_id":"5f8490ad8ebc3e9bca1af788","slug":"dolphin-bulandshahr-news-gbd2069804192","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉल्फिन के कुनबे में शामिल हुए छह और नए सदस्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉल्फिन के कुनबे में शामिल हुए छह और नए सदस्य
विज्ञापन
गंगानदी में डॉल्फिन की गणना करती टीम। फाइल फोटो।
- फोटो : BULANDSHAHR
डॉल्फिन के कुनबे में शामिल हुए छह नए सदस्य
बुलंदशहर। गंगा नदी की शान डॉल्फिन के कुनबे में छह और नए सदस्य शामिल हो गए हैं। इसकी घोषणा सोमवार को नई दिल्ली में गत दिनों गंगा नदी में डॉल्फिन की गणना करने वाली टीम ने की है। इसकी पुष्टि जनपद के डीएफओ ने भी की है। अब गंगा नदी के रामसर साइट में बिजनौर से लेकर नरौरा बैराज तक डॉल्फिन की संख्या 41 हो गई है।
गंगा नदी में डॉल्फिन की सही संख्या का पता करने के लिए गत दिनों वर्ल्ड वाइल्ड फंड और वन विभाग की टीम ने गणना की थी। यह गणना जनपद बिजनौर से शुरू हुई थी और छह जिलों के साथ जनपद के नरौरा में गंगा बैराज तक की गई थी। उप संभागीय वन अधिकारी गंगा प्रसाद ने बताया कि गणना करने वाली टीम ने सोमवार को दिल्ली में वेबीनार का आयोजन कर गंगा में बढ़ी डॉल्फिन की संख्या की घोषणा कर दी है। इस दौरान बिजनौर से लेकर नरौरा बैराज तक छह और नई डॉल्फिन पाई गई हैं। इस तरह से अब गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष हुई गणना के बाद गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 36 थी। इनमें से एक डॉल्फिन गत दिनों नरौरा क्षेत्र के नरवर घाट पर मृत पाई गई थी। इसके चलते यह संख्या 35 रह गई थी। उन्होंने गंगा में लगातार डॉल्फिन की संख्या बढ़ने पर खुशी जाहिर की। गंगा का वातावरण और रामसर साइट का क्षेत्र डॉल्फिन के लिए मुफीद साबित हो रहा है। डॉल्फिन गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में सहायक हैं।
देखरेख के लिए टॉस्क फोर्स गठित
उप संभागीय वन अधिकारी गंगा प्रसाद ने बताया कि डॉल्फिन की संख्या बढ़ने के साथ ही उनकी देखरेख के लिए भी अहम कदम उठाए गए हैं। इसके लिए एक टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टॉस्क फोर्स समय-समय पर गंगा में पहुंचकर डॉल्फिन की गतिविधियों और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखेगी। बीते दिनों एक डॉल्फिन की मौत के बाद विभाग ने इनकी सुरक्षा को लेकर अहम कदम उठाए हैं।
विज्ञापन
कछुआ और घड़ियालों की भी बढ़ेगी संख्या
गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने में जहां डॉल्फिन सहायक हैं, वहीं कछुआ और घड़ियाल की भी अहम भूमिका है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए शासन की ओर से नमामि गंगे योजना के तहत बड़े स्तर पर काम चल रहा है। समय-समय पर गंगा में कछुआ और घड़ियाल भी छोड़े जाते हैं। इसी क्रम में अब जल्द ही विभाग की ओर से गंगा नदी में और कछुए और घड़ियाल छोड़े जाएंगे।
विज्ञापन
बुलंदशहर। गंगा नदी की शान डॉल्फिन के कुनबे में छह और नए सदस्य शामिल हो गए हैं। इसकी घोषणा सोमवार को नई दिल्ली में गत दिनों गंगा नदी में डॉल्फिन की गणना करने वाली टीम ने की है। इसकी पुष्टि जनपद के डीएफओ ने भी की है। अब गंगा नदी के रामसर साइट में बिजनौर से लेकर नरौरा बैराज तक डॉल्फिन की संख्या 41 हो गई है।
गंगा नदी में डॉल्फिन की सही संख्या का पता करने के लिए गत दिनों वर्ल्ड वाइल्ड फंड और वन विभाग की टीम ने गणना की थी। यह गणना जनपद बिजनौर से शुरू हुई थी और छह जिलों के साथ जनपद के नरौरा में गंगा बैराज तक की गई थी। उप संभागीय वन अधिकारी गंगा प्रसाद ने बताया कि गणना करने वाली टीम ने सोमवार को दिल्ली में वेबीनार का आयोजन कर गंगा में बढ़ी डॉल्फिन की संख्या की घोषणा कर दी है। इस दौरान बिजनौर से लेकर नरौरा बैराज तक छह और नई डॉल्फिन पाई गई हैं। इस तरह से अब गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष हुई गणना के बाद गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 36 थी। इनमें से एक डॉल्फिन गत दिनों नरौरा क्षेत्र के नरवर घाट पर मृत पाई गई थी। इसके चलते यह संख्या 35 रह गई थी। उन्होंने गंगा में लगातार डॉल्फिन की संख्या बढ़ने पर खुशी जाहिर की। गंगा का वातावरण और रामसर साइट का क्षेत्र डॉल्फिन के लिए मुफीद साबित हो रहा है। डॉल्फिन गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में सहायक हैं।
विज्ञापन
देखरेख के लिए टॉस्क फोर्स गठित
उप संभागीय वन अधिकारी गंगा प्रसाद ने बताया कि डॉल्फिन की संख्या बढ़ने के साथ ही उनकी देखरेख के लिए भी अहम कदम उठाए गए हैं। इसके लिए एक टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टॉस्क फोर्स समय-समय पर गंगा में पहुंचकर डॉल्फिन की गतिविधियों और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखेगी। बीते दिनों एक डॉल्फिन की मौत के बाद विभाग ने इनकी सुरक्षा को लेकर अहम कदम उठाए हैं।
विज्ञापन
कछुआ और घड़ियालों की भी बढ़ेगी संख्या
गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने में जहां डॉल्फिन सहायक हैं, वहीं कछुआ और घड़ियाल की भी अहम भूमिका है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए शासन की ओर से नमामि गंगे योजना के तहत बड़े स्तर पर काम चल रहा है। समय-समय पर गंगा में कछुआ और घड़ियाल भी छोड़े जाते हैं। इसी क्रम में अब जल्द ही विभाग की ओर से गंगा नदी में और कछुए और घड़ियाल छोड़े जाएंगे।