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Bulandshahar News: उत्तम क्षमा के संदेश के साथ शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व, गूंजे जयकारे
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नगर के जैन मंदिर में शुरू हुए दशलक्षण महापर्व में शामिल जैन समाज की महिलाएं। संवाद
बुलंदशहर। जैन समाज ने दशलक्षण महापर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ शुरू किया। दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व के प्रथम दिन बुधवार को उत्तम क्षमा दिवस मनाया गया। शहर के जैन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
शहर के मुख्य जैन मंदिर में 10 दिनों तक धर्म आराधना, पूजा विधान और त्याग-तपस्या का क्रम चलेगा। मनोज कुमार जैन ने बताया कि महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा दिवस मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया।
बताया कि दस लक्षणों में उत्तम क्षमा को सर्वोपरि माना गया है। यह हमें सिखाता है कि क्रोध का त्याग कर सभी जीवों से क्षमा मांगनी और सबको क्षमा करना चाहिए। प्रथम दिन का पूजा विधान दीपाली जैन व पंकज जैन सपरिवार ने सम्पन्न कराया।
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परिवारों ने प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा कर दर्शन लाभ लिया। बताया कि प्रतिदिन सुबह सात बजे प्रभु का अभिषेक व शांतिधारा, आठ बजे से दशलक्षण पूजा विधान, दोपहर में धर्मसभा और तत्वार्थ सूत्र पर प्रवचन होंगे। सायंकाल सात बजे से बच्चों व महिलाओं द्वारा धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी।
इसी तरह बृहस्पतिवार से लेकर आगामी 10 दिनों तक क्रमश: मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की जाएगी। अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इसमें समाज के लोग एक-दूसरे से क्षमा याचना करेंगे।
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शहर के मुख्य जैन मंदिर में 10 दिनों तक धर्म आराधना, पूजा विधान और त्याग-तपस्या का क्रम चलेगा। मनोज कुमार जैन ने बताया कि महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा दिवस मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया।
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बताया कि दस लक्षणों में उत्तम क्षमा को सर्वोपरि माना गया है। यह हमें सिखाता है कि क्रोध का त्याग कर सभी जीवों से क्षमा मांगनी और सबको क्षमा करना चाहिए। प्रथम दिन का पूजा विधान दीपाली जैन व पंकज जैन सपरिवार ने सम्पन्न कराया।
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परिवारों ने प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा कर दर्शन लाभ लिया। बताया कि प्रतिदिन सुबह सात बजे प्रभु का अभिषेक व शांतिधारा, आठ बजे से दशलक्षण पूजा विधान, दोपहर में धर्मसभा और तत्वार्थ सूत्र पर प्रवचन होंगे। सायंकाल सात बजे से बच्चों व महिलाओं द्वारा धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी।
इसी तरह बृहस्पतिवार से लेकर आगामी 10 दिनों तक क्रमश: मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की जाएगी। अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इसमें समाज के लोग एक-दूसरे से क्षमा याचना करेंगे।