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डीएपी में मूल्यवृद्धि से बढ़ेगी फसलों की लागत
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प्राइवेट कंपनियों की ओर से 50 किलो वाले डीएपी के कट्टे पर 300 रुपये बढ़ा देने से किसानों की मुश्किलें बढ़ने लगीं हैं। फसलों में डीएपी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जाहिर है कि इसके दाम बढ़ने के बाद फसलों की लागत भी बढ़ जाएगी। डीएपी के दाम बढ़ने के बाद किसानों का कहना है कि आय दोगुनी करने के नाम पर हमें गुमराह किया जा रहा है। अब फसलों की लागत में करीब 20 फीसदी की वृद्धि होगी।
किसानों के अनुसार गेहूं, धान, गन्ना और सब्जी आदि सभी फसलों के लिए डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। अब निजी कंपनियों ने डीएपी के रेट 1200 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति 50 किलो कट्टा कर दिया है। ऐसे में उन पर आर्थिक बोझ ज्यादा बढ़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक अब फसलों की लागत 20 फीसदी तक बढ़ जाएगी। रोजाना डीजल- पेट्रोल आदि के दामों में इजाफा हो रहा है। बिजली का बिल भी महंगा होने सेे खेतों में सिंचाई करना भी महंगा हो गया है।
वहीं, दूसरी ओर अब प्राइवेट कंपनियाें ने अचानक डीएपी के 50 किलो के एक कट्टे पर 300 रुपये बढ़ाकर किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। जहां किसान पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की वजह से पहले ही काफी परेशान हैं। अब डीएपी के दाम बढ़ने से किसान आर्थिक बोझ के तले दबेगा। अब फसल की लागत भी बढ़ जाएगी। जबकि किसानों को उनकी फसल के अभी तक दाम ठीक नहीं मिल रहे हैं। किसान अब सरकार की तरफ उम्मीद की निगाहें लगाए हुए है, ताकि उनको कुछ राहत मिल सके।
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इस तरह बढ़ेगी फसलों की लागत
गेहूं, गन्ना और आलू आदि की फसल करने के लिए एक हेक्टेयर में डीएपी के चार कट्टे की जरूरत पड़ती है। इसकी कीमत पहले 1200 रुपये प्रति कट्टा के हिसाब से 4800 रुपये की लागत आती थी। लेकिन अब डीएपी के चार कट्टे खरीदने के लिए छह हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में किसान पर 1200 रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी तरह सब्जी की फसल उगाने के लिए एक हेक्टेयर में लगभग दो कट्टे डीएपी की जरूरत होती है। लेकिन अब दाम बढ़ने से इन फसलों को करने के लिए दो कट्टे खरीदने पर 600 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
सरकार कहती है कि किसानों की आय दोगुनी की जाएगी। लेकिन अभी ऐसा नहीं हुआ। उल्टा डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और अब डीएपी के दाम 300 रुपये बढ़ाकर यह साबित कर दिया कि किसान का कभी भला नहीं हो सकता। अब तो किसान यह सोचने को मजबूर है कि करे तो क्या करे।
- किसान लेखराज।
किसान की हमेशा उपेक्षा की जाती रही है। मौजूदा सरकार भी किसानों को बरगलाने का काम कर रही है। मिलों से गन्ने का समय पर पैसा नहीं मिल रहा और डीजल आदि के दाम में लगातार इजाफा हो रहा है। अब डीएपी के दाम से किसान पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
किसान कर्ण सिंह।
किसानों को अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। बिजली के दाम भी बढ़ा दिए। अब डीएपी के दाम बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ने का काम किया है। उम्मीद थी कि सरकार आय दोगुनी करेगी, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ।
किसान दीपक राणा।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर गुमराह कर रही है। कृषि कानून पहले ही किसान पर थोप दिए हैं और वहीं अब डीएपी के दाम बढ़ाकर सरकार ने किसानों के प्रति अपनी मानसिकता को पूरी तरह से जाहिर कर दिया है कि वह किसान हित में नहीं है।
किसान विपिन त्यागी।
डीएपी पर बढ़े दाम के संबंध में अभी मुझे जानकारी नहीं है। यदि निजी कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं तो इससे संबंधित शासनादेश जारी नहीं होता है। जबकि यूरिया पर दाम बढ़ने के शासन से आदेश जारी किए जाते हैं। अब डीएपी का नया स्टॉक आने पर ही पता चलेगा कि डीएपी के कितने दाम बढ़ाए गए हैं।
अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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किसानों के अनुसार गेहूं, धान, गन्ना और सब्जी आदि सभी फसलों के लिए डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। अब निजी कंपनियों ने डीएपी के रेट 1200 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति 50 किलो कट्टा कर दिया है। ऐसे में उन पर आर्थिक बोझ ज्यादा बढ़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक अब फसलों की लागत 20 फीसदी तक बढ़ जाएगी। रोजाना डीजल- पेट्रोल आदि के दामों में इजाफा हो रहा है। बिजली का बिल भी महंगा होने सेे खेतों में सिंचाई करना भी महंगा हो गया है।
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वहीं, दूसरी ओर अब प्राइवेट कंपनियाें ने अचानक डीएपी के 50 किलो के एक कट्टे पर 300 रुपये बढ़ाकर किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। जहां किसान पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की वजह से पहले ही काफी परेशान हैं। अब डीएपी के दाम बढ़ने से किसान आर्थिक बोझ के तले दबेगा। अब फसल की लागत भी बढ़ जाएगी। जबकि किसानों को उनकी फसल के अभी तक दाम ठीक नहीं मिल रहे हैं। किसान अब सरकार की तरफ उम्मीद की निगाहें लगाए हुए है, ताकि उनको कुछ राहत मिल सके।
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इस तरह बढ़ेगी फसलों की लागत
गेहूं, गन्ना और आलू आदि की फसल करने के लिए एक हेक्टेयर में डीएपी के चार कट्टे की जरूरत पड़ती है। इसकी कीमत पहले 1200 रुपये प्रति कट्टा के हिसाब से 4800 रुपये की लागत आती थी। लेकिन अब डीएपी के चार कट्टे खरीदने के लिए छह हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में किसान पर 1200 रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी तरह सब्जी की फसल उगाने के लिए एक हेक्टेयर में लगभग दो कट्टे डीएपी की जरूरत होती है। लेकिन अब दाम बढ़ने से इन फसलों को करने के लिए दो कट्टे खरीदने पर 600 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
सरकार कहती है कि किसानों की आय दोगुनी की जाएगी। लेकिन अभी ऐसा नहीं हुआ। उल्टा डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और अब डीएपी के दाम 300 रुपये बढ़ाकर यह साबित कर दिया कि किसान का कभी भला नहीं हो सकता। अब तो किसान यह सोचने को मजबूर है कि करे तो क्या करे।
- किसान लेखराज।
किसान की हमेशा उपेक्षा की जाती रही है। मौजूदा सरकार भी किसानों को बरगलाने का काम कर रही है। मिलों से गन्ने का समय पर पैसा नहीं मिल रहा और डीजल आदि के दाम में लगातार इजाफा हो रहा है। अब डीएपी के दाम से किसान पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
किसान कर्ण सिंह।
किसानों को अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। बिजली के दाम भी बढ़ा दिए। अब डीएपी के दाम बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ने का काम किया है। उम्मीद थी कि सरकार आय दोगुनी करेगी, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ।
किसान दीपक राणा।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर गुमराह कर रही है। कृषि कानून पहले ही किसान पर थोप दिए हैं और वहीं अब डीएपी के दाम बढ़ाकर सरकार ने किसानों के प्रति अपनी मानसिकता को पूरी तरह से जाहिर कर दिया है कि वह किसान हित में नहीं है।
किसान विपिन त्यागी।
डीएपी पर बढ़े दाम के संबंध में अभी मुझे जानकारी नहीं है। यदि निजी कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं तो इससे संबंधित शासनादेश जारी नहीं होता है। जबकि यूरिया पर दाम बढ़ने के शासन से आदेश जारी किए जाते हैं। अब डीएपी का नया स्टॉक आने पर ही पता चलेगा कि डीएपी के कितने दाम बढ़ाए गए हैं।
अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी