फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Including the killing of four innocent

मासूम समेत चार की हुई मौत

Fri, 16 Sep 2016 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 16 Sep 2016 11:29 PM IST
विज्ञापन
Including the killing of four innocent
क्राइम - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन

बुखार से मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। शुक्रवार को बुखार से मासूम समेत चार की मौत हो गई। चार मौतों के साथ ही बुखार से मरने वालों का आंकड़ा 71 पहुंच गया है। अस्पतालों में आलम ये है कि बुखार के मरीजों की बाढ़ आ रही है। घर-घर में चारपाई बिछी हुई हैं।

जानलेवा बुखार ने पूरे जिले को अपने आगोश में ले लिया है। जिले में कोई ऐसी तहसील, ब्लॉक और क्षेत्र नहीं है, जहां बुखार से मौत न हुई हो। एक के बाद एक लोग बुखार से मरते जा रहे हैं। शुक्रवार को अहार क्षेत्र के गांव दराबर निवासी किरेश सिंह के पांच वर्षीय पुत्र तरुण की बुखार से मौत हो गई। तरुण को पिछले पांच दिन से बुखार था। उसे उपचार के लिए जहांगीराबाद लाया गया। जहांगीराबाद से उसे बुलंदशहर रेफर कर दिया गया। रास्ते में तरुण ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन


वहीं खानपुर क्षेत्र के गांव नंगला आलमपुर में महेन्द्र सिंह की दस वर्षीय बेटी मीनू की बुखार ने जान ले ली। सोमवार सुबह स्कूल में बुखार हो जाने पर घर आई बच्ची को परिजनों ने तुरंत खानपुर ले जाकर डाक्टर को दिखाया। तबीयत और बिगड़ जाने पर मंगलवार को बुलंदशहर निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर भी सुधार ना होने पर बुधवार को मेरठ ले गये। बृहस्पतिवार रात उसकी मृत्यु हो गई। नगर के थाना वार्ड निवासी जमील कुरैशी का पांच वर्षीय पुत्र सुभान भी बुखार के चलते पांच दिन से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती था, जहां बृहस्पतिवार की सुबह उसकी मौत हो गई।

इसके अलावा जेवर के गांव गोविंदगढ़ निवासी पवन के पांच साल के बेटे निशी ने भी दम तोड़ दिया। निशी को पिछले चार दिन से बुखार था।
एडीज मच्छर पर फॅागिंग असर नहीं

चिकनगुनिया का मच्छर (मादा एडीज) स्वास्थ्य अफसरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। दरअसल, नगर पालिका प्रशासन नगर में जो फॉगिंग करवा रहा है उसका असर मच्छरों पर नहीं पड़ रहा है। इसका खुलासा स्वास्थ्य अफसरों ने किया है।

डाक्टरों ने चिकनगुनिया के चार मच्छरों (मादा एडीज) को एक बोतल में बंद किया और बोतल में फॉगिंग की। आधा घंटा बाद बोतल को खोलकर देखा गया तो सभी मच्छर जीवित पाए गए। फॉगिंग का असर नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या यह है कि मच्छर की जनरेशन की रोकथाम नहीं हो पा रही है।

डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि चिकनगुनिया मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है। मादा एडीज मच्छर के शरीर पर सफेद और काली धारियां होती हैं और ये साफ पानी में उत्पन्न होते हैं। यह मच्छर काटते ही मर जाता है। सुबह चार बजे से आठ बजे तक और शाम को पांच बजे से सात बजे तक यह मच्छर एक्टिव मोड में रहता है।

समस्या से निपटने के लिए सीएमओ ने जारूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि चिकनगुनिया के मच्छर पर फॉगिंग का असर नहीं हो रहा है। घर में भी मिट्टी के तेल के स्प्रे का सकारात्मक परिणाम आया है।


बच्चों और बुजुर्गों का रखें ख्याल शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन भार्गव ने बताया कि नवजात शिशुओं को चिकनगुनिया के मच्छर से बचाने की बेहद जरूरत है। नवजात शिशु में इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है। वहीं, अगर चिकनगुनिया के मरीज की उम्र 60 के पार हैं, तो इन मरीजों पर एहतियात बरतने की जरूरत होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed