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एंबुलेंस के इंतजार में घायल ने अस्पताल में तोड़ा दम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:06 AM IST
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फाइल फोटो
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बुलंदशहर के डिबाई में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक घंटों अस्पताल में पड़ा तड़पता रहा, लेकिन सीएचसी से रेफर करने के बाद एंबुलेंस न मिलने के कारण व दूसरे अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। इस कारण उसकी मौत हो गई। घंटों बाद मौके पर पहुंची एंबुलेंस से घायल को रेफर किया जा रहा था, लेकिन उसकी वहीं पर मौत हो गई। यदि समय रहते घायल युवक को बेहतर इलाज और एंबुलेंस मिल जाती तो शायद वह बच जाता।
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डिबाई क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी मुकेश (35 ) पुत्र भगवान सहाय सोमवार को अपने रिश्तेदार के घर देवी जागरण में गांव खुशालाबाद गए थे। देर रात जागरण से वह अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान हाईवे स्थित पेट्रोल पंप के पास जेसीबी ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। घटना इतनी भयावह थी कि टक्कर से मुकेश की आंतें निकलकर बाहर आ गई।
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हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों की मदद से मुकेश को सीएचसी में भर्ती कराया जहां से प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे हायर मेडिकल सेंटर अलीगढ़ रेफर कर दिया, लेकिन 108 एंबुलेंस को फोन करने के बाद लखनऊ से दानपुर, नरौरा और डिबाई की एंबुलेंस को व्यस्त बता दिया। उसके बाद शिकारपुर की एंबुलेंस को घटना स्थल पर भेजने की बात कही। जबकि शिकारपुर और घटना स्थल की दूरी कम से कम एक घंटे में तय होती।
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घटना के बाद करीब डेढ़ घंटा तक घायल मुकेश सीएचसी में इलाज के लिए तड़पता रहा, लेकिन वहां सुविधाओं की कमी उसकी जान पर भारी पड़ गया। करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची एंबुलेंस से मुकेश को रेफर किया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। मुकेश के भाई कुंवरपाल की तहरीर पर अज्ञात जेसीबी चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं, चालक मौके पर जेसीबी छोड़कर भाग गया।
अस्पतालों में तैनात नहीं रहती एंबुलेंस
नियमानुसार सरकारी अस्पतालों में एक-एक एंबुलेंस तैनात रहनी चाहिए, लेकिन जिले के अधिकतर अस्पतालों में एंबुलेंस तैनात नहीं रहती हैं। साथ ही आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचने के लिए हाईवे पर एंबुलेंस तैनात रहनी आवश्यक हैं, लेकिन यहां भी पूरी तरह से 108 एंबुलेंस योजना फेल हो रही है। पीड़ितों को समय पर मदद न पहुंचने के चलते योजना का लाभ अति आवश्यक लोगों को नहीं मिल पा रहा।
सैकड़ों मिलती हैं शिकायतें, नहीं होती कार्रवाई
108 एंबुलेंस चालकों की लापरवाही की सैकड़ों शिकायतें विभागीय अफसरों को मिली हैं, लेकिन किसी भी चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हालात यह है कि कभी चालक बहाना बनाकर तो कभी कहीं पर फंसे होने की बात कर घटनास्थल पर नहीं पहुंचते। प्रसव आदि के लिए भी महिला मरीजों को परिजन एंबुलेंस न पहुंचने की दशा में बुग्गी या अपने वाहनों से लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।
एंबुलेंस पहुंचने में क्यों देरी हुई इसकी जानकारी नहीं है। कोई एंबुलेंस खाली न हो इस कारण समस्या हुई होगी। फिर भी मामले में जांच कराई जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
मौके पर एंबुलेंस के लिए फोन किया गया था, एंबुलेंस का खाली न होना बताया था। फिलहाल मृत युवक के भाई की तहरीर पर अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।- योगेन्द्र सिंह, कोतवाली निरीक्षक