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जिले में भारत बंद का नहीं दिख रहा असर
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:12 PM IST
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जिले में भारत बंद का नहीं दिखा असर
- सामान्य दिनों की भांति खुल रहे जिले में बाजार
- बाजार बंद कराने की कोशिश में दो को लिया हिरासत में, बाद में छोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। एससी-एसटी एक्ट में संसोधन को यथावत रखने के लिए मंगलवार को बुलाए गए भारत बंद का जिले में कोई असर नहीं दिखा। किसी भी संगठन द्वारा इसके लिए पहल न करने के चलते जिले में कोई प्रदर्शन, बाजार बंद नहीं हो सका। हालांकि भारत बंद के लिए सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से बाजारों में अपेक्षाकृत कम भीड़ दिखाई दी। साथ ही पूरे दिन बाजारों में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने डेरा डाले रखा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संसोधन करते हुए तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। जिसके विरोध में दो अप्रैल को एससी-एसटी वर्ग के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर बवाल किया था। इस दौरान जिले में एक दर्जन से अधिक रोडवेज व निजी बसों, पेट्रोल पंपों पर तोड़फोड़ करते हुए सांसद आवास पर भी तोड़फोड़ और हंगामा किया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई की थी। दो अप्रैल के बाद से ही सोशल मीडिया पर लगातार दस अप्रैल को भारत बंद करने का आहवान किया जा रहा था। मंगलवार को सोशल मीडिया पर चल रहे आवाहन को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क दिखाई दिया। मंगलवार को पूर्व में ही सुरक्षा के लिए बाजारों में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया था। जिसके चलते जिलेभर में कहीं पर भी बंद का कोई असर नहीं दिखाई दिया। बुलंदशहर, स्याना, बीबीनगर, जहांगीराबाद, डिबाई, अनूपशहर, खुर्जा, सिकंदराबाद, नरौरा, शिकारपुर में आम दिनों की तरह बाजार खुले, जबकि गुलावठी में साप्ताहिक बंदी के चलते बाजार बंद रहा।
दुकान बंद कराने की कोशिश में दो धरे, छोड़ा
मंगलवार को भारत बंद के आहवान पर कुछ असामाजिक युवकों ने खुली दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। साथ ही अन्य लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया। हालांकि युवकों के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज न करते हुए बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
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दिन भर बाजार में गश्त करते रहे अफसर
किसी भी हालात में कानून व्यवस्था न बिगड़ने पाए, इसके लिए अफसर दिन भर बाजारों में गश्त करते रहे। एसडीएम सदर अरविंद सिंह (आईएएस) पूरे दिन पुलिस फोर्स के साथ बाजारों में गश्त करते हुए शहर के मुख्य चौराहों पर असामाजिक तत्वों पर नजर रखते दिखाई दिए।
वादकारियों को न हो परेशानी, न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
बुलंदशहर। जनपद में मंगलवार को भारत बंद का आह्वान होने की चर्चा थी। जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से विरत रहे। डिस्ट्रिक्ट बार के अध्यक्ष सुमन सिंह राघव ने बताया कि भारत बंद होने की चर्चा के कारण यातायात अवरुद्ध होने से वादकारियों को न्यायालय पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता। जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट बार व सिविल बार के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इसी के चलते मंगलवार को अनूपशहर में भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इस अवसर पर अनिल कुमार शर्मा, सचिव सिविल बार एसोसिएशन, अधिवक्ता ब्रूनो भूषण, रेखा शर्मा, धर्मेंद्र चौधरी, आलोक शर्मा, आकाश भारद्वाज, पीके त्यागी, आलोक शर्मा आदि मौजूद रहे।
भारत बंद के शोर पर दिन भर सतर्क रहा पुलिस प्रशासन
सिकंदराबाद। सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को भारत बंद के मैसेज के चलते मंगलवार को दिनभर भारत बंद का शोर तो रहा, लेकिन शहर में इसका कोई असर नहीं दिखा। बाजार आम दिनों की तरह खुले और खूब चहल पहल भी रही। हां, इतना जरूर रहा कि शहर के मुख्य बाजारों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। मुख्य मार्गों और चौराहों पर पुलिस दिनभर चेकिंग करती रही।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को दलित वर्ग ने विरोध प्रदर्शन किया था। कुछ जनपदों में प्रदर्शन ने उग्र रूप धारण कर लिया था। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए उन्हें आग के हवाले का दिया था। सरकारी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचाया था। उसके बाद दस अप्रैल को सामान्य और ओबीसी संवर्ग द्वारा भारत बंद का मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हो गया था। भारत बंद का मैसेज वायरल होने के बाद किसी भी संगठन ने बंद की घोषणा नहीं की थी। सोशल मीडिया के भारत बंद का न तो कोई आयोजक था और नहीं प्रायोजक फिर भी बंद के शोर के बीच पुलिस, प्रशासन, खुफिया विभाग तैयारियों में जुटा हुआ था। दस अप्रैल को सुबह होने से पहले ही किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन सड़क पर उतर गया था। गनीमत यह रही कि हालात पूरी तरह से सामान्य रहे। मंगलवार को आम दिनों की तरह बाजार खुले, बाजारों में पहले जैसी ही चहल पहल दिखाई दी। अगर कुछ अलग था तो बाजारों में पुलिस की गश्त, चौराहों पर पुलिस चेकिंग और बंद को लेकर लोगों की एक दूसरे से चर्चा। कोतवाल गिरीश कुमार कोटिया ने बताया कि नगर में किसी भी स्थान पर बाजार बंद होने या किसी संगठन द्वारा रैली निकालने, विरोध प्रदर्शन का मामला प्रकाश में नहीं आया है।
स्कूलों में रही अघोषित छुट्टी
सिकंदराबाद। सोशल मीडिया पर बुधवार को भारत बंद का मैसेज वायरल होने के बाद से बंद की चर्चाएं आम हो चुकी थीं। इसके चलते अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। ऐसे में स्कूलों में अघोषित छुट्टी जैसे हालात रहे। प्रशासन की ओर से स्कूल बंद होने के आदेश नहीं होने के बावजूद स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम रही। अनहोनी की आशंका के चलते अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। ब्यूरो
कोट-
जिले में बाजार बंद का कोई असर नहीं रहा है। कानून व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए दिन भर बाजारों में अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी। जिले में शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम रही है। -- जसजीत कौर, प्रभारी डीएम
सुरक्षा व्यवस्था के लिए जगह-जगह पुलिस तैनात की गई थी। जिले में कानून का उल्लंघन कहीं नहीं किया गया है। कहीं कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस सक्रिय रही। - मुनिराज जी, एसएसपी
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- सामान्य दिनों की भांति खुल रहे जिले में बाजार
- बाजार बंद कराने की कोशिश में दो को लिया हिरासत में, बाद में छोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। एससी-एसटी एक्ट में संसोधन को यथावत रखने के लिए मंगलवार को बुलाए गए भारत बंद का जिले में कोई असर नहीं दिखा। किसी भी संगठन द्वारा इसके लिए पहल न करने के चलते जिले में कोई प्रदर्शन, बाजार बंद नहीं हो सका। हालांकि भारत बंद के लिए सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से बाजारों में अपेक्षाकृत कम भीड़ दिखाई दी। साथ ही पूरे दिन बाजारों में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने डेरा डाले रखा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संसोधन करते हुए तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। जिसके विरोध में दो अप्रैल को एससी-एसटी वर्ग के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर बवाल किया था। इस दौरान जिले में एक दर्जन से अधिक रोडवेज व निजी बसों, पेट्रोल पंपों पर तोड़फोड़ करते हुए सांसद आवास पर भी तोड़फोड़ और हंगामा किया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई की थी। दो अप्रैल के बाद से ही सोशल मीडिया पर लगातार दस अप्रैल को भारत बंद करने का आहवान किया जा रहा था। मंगलवार को सोशल मीडिया पर चल रहे आवाहन को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क दिखाई दिया। मंगलवार को पूर्व में ही सुरक्षा के लिए बाजारों में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया था। जिसके चलते जिलेभर में कहीं पर भी बंद का कोई असर नहीं दिखाई दिया। बुलंदशहर, स्याना, बीबीनगर, जहांगीराबाद, डिबाई, अनूपशहर, खुर्जा, सिकंदराबाद, नरौरा, शिकारपुर में आम दिनों की तरह बाजार खुले, जबकि गुलावठी में साप्ताहिक बंदी के चलते बाजार बंद रहा।
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मंगलवार को भारत बंद के आहवान पर कुछ असामाजिक युवकों ने खुली दुकानों को बंद कराने की कोशिश की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। साथ ही अन्य लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया। हालांकि युवकों के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज न करते हुए बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
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किसी भी हालात में कानून व्यवस्था न बिगड़ने पाए, इसके लिए अफसर दिन भर बाजारों में गश्त करते रहे। एसडीएम सदर अरविंद सिंह (आईएएस) पूरे दिन पुलिस फोर्स के साथ बाजारों में गश्त करते हुए शहर के मुख्य चौराहों पर असामाजिक तत्वों पर नजर रखते दिखाई दिए।
वादकारियों को न हो परेशानी, न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
बुलंदशहर। जनपद में मंगलवार को भारत बंद का आह्वान होने की चर्चा थी। जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से विरत रहे। डिस्ट्रिक्ट बार के अध्यक्ष सुमन सिंह राघव ने बताया कि भारत बंद होने की चर्चा के कारण यातायात अवरुद्ध होने से वादकारियों को न्यायालय पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता। जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट बार व सिविल बार के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इसी के चलते मंगलवार को अनूपशहर में भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इस अवसर पर अनिल कुमार शर्मा, सचिव सिविल बार एसोसिएशन, अधिवक्ता ब्रूनो भूषण, रेखा शर्मा, धर्मेंद्र चौधरी, आलोक शर्मा, आकाश भारद्वाज, पीके त्यागी, आलोक शर्मा आदि मौजूद रहे।
भारत बंद के शोर पर दिन भर सतर्क रहा पुलिस प्रशासन
सिकंदराबाद। सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को भारत बंद के मैसेज के चलते मंगलवार को दिनभर भारत बंद का शोर तो रहा, लेकिन शहर में इसका कोई असर नहीं दिखा। बाजार आम दिनों की तरह खुले और खूब चहल पहल भी रही। हां, इतना जरूर रहा कि शहर के मुख्य बाजारों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। मुख्य मार्गों और चौराहों पर पुलिस दिनभर चेकिंग करती रही।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को दलित वर्ग ने विरोध प्रदर्शन किया था। कुछ जनपदों में प्रदर्शन ने उग्र रूप धारण कर लिया था। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए उन्हें आग के हवाले का दिया था। सरकारी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचाया था। उसके बाद दस अप्रैल को सामान्य और ओबीसी संवर्ग द्वारा भारत बंद का मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हो गया था। भारत बंद का मैसेज वायरल होने के बाद किसी भी संगठन ने बंद की घोषणा नहीं की थी। सोशल मीडिया के भारत बंद का न तो कोई आयोजक था और नहीं प्रायोजक फिर भी बंद के शोर के बीच पुलिस, प्रशासन, खुफिया विभाग तैयारियों में जुटा हुआ था। दस अप्रैल को सुबह होने से पहले ही किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन सड़क पर उतर गया था। गनीमत यह रही कि हालात पूरी तरह से सामान्य रहे। मंगलवार को आम दिनों की तरह बाजार खुले, बाजारों में पहले जैसी ही चहल पहल दिखाई दी। अगर कुछ अलग था तो बाजारों में पुलिस की गश्त, चौराहों पर पुलिस चेकिंग और बंद को लेकर लोगों की एक दूसरे से चर्चा। कोतवाल गिरीश कुमार कोटिया ने बताया कि नगर में किसी भी स्थान पर बाजार बंद होने या किसी संगठन द्वारा रैली निकालने, विरोध प्रदर्शन का मामला प्रकाश में नहीं आया है।
स्कूलों में रही अघोषित छुट्टी
सिकंदराबाद। सोशल मीडिया पर बुधवार को भारत बंद का मैसेज वायरल होने के बाद से बंद की चर्चाएं आम हो चुकी थीं। इसके चलते अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। ऐसे में स्कूलों में अघोषित छुट्टी जैसे हालात रहे। प्रशासन की ओर से स्कूल बंद होने के आदेश नहीं होने के बावजूद स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम रही। अनहोनी की आशंका के चलते अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। ब्यूरो
कोट-
जिले में बाजार बंद का कोई असर नहीं रहा है। कानून व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए दिन भर बाजारों में अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी। जिले में शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम रही है। -- जसजीत कौर, प्रभारी डीएम
सुरक्षा व्यवस्था के लिए जगह-जगह पुलिस तैनात की गई थी। जिले में कानून का उल्लंघन कहीं नहीं किया गया है। कहीं कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस सक्रिय रही। - मुनिराज जी, एसएसपी