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ज्योति हत्याकांड: हत्यारोपी पति दोषी करार, दस वर्ष कारावास-अर्थदंड
Updated Wed, 04 Apr 2018 11:49 PM IST
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ज्योति हत्याकांड : पति को दस साल कारावास
- दहेज की मांग पूरी न होने पर की थी महिला की हत्या, 18 हजार का अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। स्याना थाना क्षेत्र के एक गांव में दहेज की मांग पूरी न होने पर जून 2016 में महिला की हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट तृतीय न्यायाधीश शैलेंद्र निगम ने महिला के पति को दोषी माना है। उन्होंने उसे दस साल कारावास और 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इरशाद अहमद ने बताया कि वादी रमेेश चंद ने जून 2016 में स्याना थाने में तहरीर देकर अपनी पुत्री की दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था। मामले पीड़ित ने बताया था कि उसने अपनी पुत्री ज्योति की शादी 20 फरवरी 2010 को सुमित पुत्र चरन सिंह निवासी नया गांव के साथ की थी। शादी में मिले दान दहेज से आरोपी सुमित खुश नहीं था। सुमित व उसके परिजन उसकी पुत्री से अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर 30 जून 2016 को आरोपी सुमित ने अपने मामा व मामी के साथ मिलकर उसकी पुत्री पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था। जानकारी होने पर पीड़ित जब बेटी की ससुराल पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला। बाद में पुलिस के अनुसार उन्हें जानकारी हुई कि उनकी पुत्री को गंभीरावस्था में जिला अस्पताल लेे जाया गया है। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। जांच पूरी होने के बाद आरोपी सुमित के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में पेश की थी। बुधवार को दोनों पक्षों के गवाहों व बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी पति को हत्या का दोषी पाया। न्यायाधीश ने मृतका के पति को 10 साल कारावास और 18 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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- दहेज की मांग पूरी न होने पर की थी महिला की हत्या, 18 हजार का अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। स्याना थाना क्षेत्र के एक गांव में दहेज की मांग पूरी न होने पर जून 2016 में महिला की हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट तृतीय न्यायाधीश शैलेंद्र निगम ने महिला के पति को दोषी माना है। उन्होंने उसे दस साल कारावास और 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी इरशाद अहमद ने बताया कि वादी रमेेश चंद ने जून 2016 में स्याना थाने में तहरीर देकर अपनी पुत्री की दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था। मामले पीड़ित ने बताया था कि उसने अपनी पुत्री ज्योति की शादी 20 फरवरी 2010 को सुमित पुत्र चरन सिंह निवासी नया गांव के साथ की थी। शादी में मिले दान दहेज से आरोपी सुमित खुश नहीं था। सुमित व उसके परिजन उसकी पुत्री से अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर 30 जून 2016 को आरोपी सुमित ने अपने मामा व मामी के साथ मिलकर उसकी पुत्री पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था। जानकारी होने पर पीड़ित जब बेटी की ससुराल पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला। बाद में पुलिस के अनुसार उन्हें जानकारी हुई कि उनकी पुत्री को गंभीरावस्था में जिला अस्पताल लेे जाया गया है। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। जांच पूरी होने के बाद आरोपी सुमित के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में पेश की थी। बुधवार को दोनों पक्षों के गवाहों व बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी पति को हत्या का दोषी पाया। न्यायाधीश ने मृतका के पति को 10 साल कारावास और 18 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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