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Bulandshahar News: एमडीआर के नए नियमों पर भ्रम, व्यापारियों ने जागरूकता शिविर की उठाई मांग
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बुगरासी। डिजिटल भुगतान पर 15 अक्तूबर से लागू होने जा रहे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के नए नियमों को लेकर व्यापारियों में असमंजस बना हुआ है। बाजार में फैल रही अफवाहों के चलते छोटे और मंझोले कारोबारी यूपीआई पेमेंट लेने को लेकर आशंकित हैं। व्यापारियों ने प्रशासन और बैंकों से नियम लागू होने से पहले कस्बे में जागरूकता शिविर लगाकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
बुगरासी के व्यापारियों का कहना है कि जानकारी के अभाव में भ्रम फैल रहा है कि हर यूपीआई पेमेंट पर पैसा कटेगा, जबकि हकीकत कुछ और है। युवा व्यापारी मुकुल जिंदल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारदर्शी है लेकिन सही जानकारी न होने से बाजार में भ्रम है।
छोटे दुकानदार समझ रहे हैं कि हर लेनदेन पर शुल्क लगेगा। बैंक अधिकारियों को कस्बे में कैंप लगाकर व्यापारियों की शंकाएं दूर करनी चाहिए, ताकि कोई भी व्यापारी डिजिटल पेमेंट लेने से इन्कार न करे।
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व्यापारी व आढ़ती चांद खां ने बताया कि सामने त्योहारी सीजन है। अधिकांश ग्राहक नकद के बजाय यूपीआई से भुगतान करते हैं। अगर दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर कटौती को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई तो रोज दुकानदार और ग्राहक के बीच विवाद होगा। बैंक प्रबंधन को तुरंत व्यापारियों के साथ बैठक करनी चाहिए।
व्यापारी मोहित सिंघल ने कहा कि छोटे व्यापारियों को इस नियम से बाहर रखा जाना अच्छी बात है लेकिन टर्नओवर की सीमा कैसे तय होगी और कटौती किस आधार पर होगी। यह बिंदुवार समझाना जरूरी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी सईद सैफी और मोहम्मद दानिश का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और बड़े सामान की खरीद दो हजार रुपये से ऊपर ही होती है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत शुल्क का सीधा असर मुनाफे पर पड़ेगा। सरकार को शुल्क की सीमा पर पुनर्विचार कर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए।
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बुगरासी के व्यापारियों का कहना है कि जानकारी के अभाव में भ्रम फैल रहा है कि हर यूपीआई पेमेंट पर पैसा कटेगा, जबकि हकीकत कुछ और है। युवा व्यापारी मुकुल जिंदल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारदर्शी है लेकिन सही जानकारी न होने से बाजार में भ्रम है।
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छोटे दुकानदार समझ रहे हैं कि हर लेनदेन पर शुल्क लगेगा। बैंक अधिकारियों को कस्बे में कैंप लगाकर व्यापारियों की शंकाएं दूर करनी चाहिए, ताकि कोई भी व्यापारी डिजिटल पेमेंट लेने से इन्कार न करे।
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व्यापारी व आढ़ती चांद खां ने बताया कि सामने त्योहारी सीजन है। अधिकांश ग्राहक नकद के बजाय यूपीआई से भुगतान करते हैं। अगर दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर कटौती को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई तो रोज दुकानदार और ग्राहक के बीच विवाद होगा। बैंक प्रबंधन को तुरंत व्यापारियों के साथ बैठक करनी चाहिए।
व्यापारी मोहित सिंघल ने कहा कि छोटे व्यापारियों को इस नियम से बाहर रखा जाना अच्छी बात है लेकिन टर्नओवर की सीमा कैसे तय होगी और कटौती किस आधार पर होगी। यह बिंदुवार समझाना जरूरी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी सईद सैफी और मोहम्मद दानिश का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और बड़े सामान की खरीद दो हजार रुपये से ऊपर ही होती है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत शुल्क का सीधा असर मुनाफे पर पड़ेगा। सरकार को शुल्क की सीमा पर पुनर्विचार कर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए।