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वायु प्रदूषण को लेकर डीजी हेल्थ ने जारी की एडवायजरी
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वायु प्रदूषण को लेकर डीजी हेल्थ ने जारी की एडवाइजरी
बुलंदशहर। वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर डीजी हेल्थ ने एडवाइजरी जारी कर दी है। एडवाइजरी सूची में लखनऊ, कानपुर और बुलंदशहर समेत एनसीआर क्षेत्र के जनपद भी शामिल हैं। साथ ही बुलंदशहर समेत पांच जनपदों में सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर खास जोर देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक्यूट रेस्पेटरी इलनेस (एआरआइ) की रिपोर्टिंग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पद्माकर सिंह द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार लोगों को प्रदूषण से बचाव के तरीके बताए गए हैं। महानिदेशक ने कहा कि हवा में बढ़ता प्रदूषण सांस के मरीजों पर भारी पड़ रहा है, जबकि स्वस्थ लोगों में भी यह फेफड़े संबंधी बीमारियों के साथ हृदय रोग, चर्म रोग, स्ट्रोक व गुर्दे की समस्याओं का कारण बन रहा है। इससे बचाव के लिए मास्क लगाने के प्रति प्रोत्साहित करने, प्रदूषण जनित बीमारियों की रिपोर्टिंग करने और सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण से लोगों को बचाने के लिए राज्य सरकार के अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण से बचने के लिए महानिदेशक ने जहां सुबह और देर शाम खिड़की-दरवाजे न खोलने को कहा है, वहीं सुबह या शाम को न टहलने का भी सुझाव दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में भी प्रार्थना सभाओं, खेलकूद और व्यायाम जैसी सुबह की गतिविधियों से परहेज करने को कहा गया है। साथ ही प्रदेश के सबसे अधिक प्रदूषित जनपदों में बुलंदशहर, गाजियाबाद, बागपत, लखनऊ और कानपुर में सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर ध्यान देने के साथ बुलंदशहर, लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, सोनभद्र, बरेली, फीरोजाबाद, अमरोहा, झांसी, कानपुर नगर, मुरादाबाद, गौतमबुद्धनगर, रायबरेली व वाराणसी के जिला अस्पतालों के अधीक्षकों तथा हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक्यूट रेस्पेटरी इलनेस (एआरआइ) की रिपोर्टिंग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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प्रदूषण से बचाव को क्या करें
- घर से बाहर निकलते समय अच्छी श्रेणी के मास्क पहनें।
- खाना बनाने के लिए साफ व धुआं रहित ईंधन का प्रयोग करें।
- परिवार के किसी सदस्य के श्वसन तंत्र संबंधी समस्या होने पर एलर्जी किट, इन्हेलर और नेबुलाइजर को आवश्यक एलर्जी किट पास रखें।
- शरीर में पानी की कमी न हो, लगातार शुद्ध जल पीते रहें।
- सांस लेने में समस्या, आंखों में जलन या लालिमा, कफ, छाती में दर्द या भारीपन होने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
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क्या न करें
- आतिशबाजी, लकड़ी, सूखी पत्तियां, कूड़ा और कृषि उत्पादों को आग न लगाएं।
- भारी यातायात व औद्योगिक क्षेत्रों में जाने से बचें।
- सुबह और देर शाम टहलने न जाएं, इस समय व्यायाम भी न करें।
- स्कूल-कॉलेजों में परिसर के बाहर प्रार्थना सभाओं, खेलकूद व व्यायाम न कराएं।
- सुबह और देर शाम दरवाजे-खिड़कियां मत खोलें लेकिन, दोपहर 12 से शाम चार बजे तक जरूर खोलें।
- बीड़ी, सिगरेट व अन्य तंबाकू पदार्थों का सेवन न करें।
- अधिकतर समय घर में रहें, घर के बाहर की गतिविधियां कम से कम रखें।
- सांस, फेफड़े और हृदय रोग के मरीज अपनी दवा हमेशा साथ रखें।
- कागज व कपड़े के मास्क कम प्रयोग करें।
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वायु प्रदूषण के कारण
वाहनों का धुआं, सड़क पर उड़ती धूल, निर्माण कार्यों की धूल, कूड़ा व फसलों के अवशेष जलाने से निकला धुआं, औद्योगिक धुआं, पटाखे, थर्मल पावर प्लांट का उत्सर्जन और लकड़ी-कोयला जलने से निकलने वाला धुआं प्रदेश में प्रदूषण का मुख्य कारण बन गया है।
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बुलंदशहर। वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर डीजी हेल्थ ने एडवाइजरी जारी कर दी है। एडवाइजरी सूची में लखनऊ, कानपुर और बुलंदशहर समेत एनसीआर क्षेत्र के जनपद भी शामिल हैं। साथ ही बुलंदशहर समेत पांच जनपदों में सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर खास जोर देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक्यूट रेस्पेटरी इलनेस (एआरआइ) की रिपोर्टिंग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पद्माकर सिंह द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार लोगों को प्रदूषण से बचाव के तरीके बताए गए हैं। महानिदेशक ने कहा कि हवा में बढ़ता प्रदूषण सांस के मरीजों पर भारी पड़ रहा है, जबकि स्वस्थ लोगों में भी यह फेफड़े संबंधी बीमारियों के साथ हृदय रोग, चर्म रोग, स्ट्रोक व गुर्दे की समस्याओं का कारण बन रहा है। इससे बचाव के लिए मास्क लगाने के प्रति प्रोत्साहित करने, प्रदूषण जनित बीमारियों की रिपोर्टिंग करने और सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण से लोगों को बचाने के लिए राज्य सरकार के अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण से बचने के लिए महानिदेशक ने जहां सुबह और देर शाम खिड़की-दरवाजे न खोलने को कहा है, वहीं सुबह या शाम को न टहलने का भी सुझाव दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में भी प्रार्थना सभाओं, खेलकूद और व्यायाम जैसी सुबह की गतिविधियों से परहेज करने को कहा गया है। साथ ही प्रदेश के सबसे अधिक प्रदूषित जनपदों में बुलंदशहर, गाजियाबाद, बागपत, लखनऊ और कानपुर में सेंटीनेल अस्पतालों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण पर ध्यान देने के साथ बुलंदशहर, लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, सोनभद्र, बरेली, फीरोजाबाद, अमरोहा, झांसी, कानपुर नगर, मुरादाबाद, गौतमबुद्धनगर, रायबरेली व वाराणसी के जिला अस्पतालों के अधीक्षकों तथा हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक्यूट रेस्पेटरी इलनेस (एआरआइ) की रिपोर्टिंग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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प्रदूषण से बचाव को क्या करें
- घर से बाहर निकलते समय अच्छी श्रेणी के मास्क पहनें।
- खाना बनाने के लिए साफ व धुआं रहित ईंधन का प्रयोग करें।
- परिवार के किसी सदस्य के श्वसन तंत्र संबंधी समस्या होने पर एलर्जी किट, इन्हेलर और नेबुलाइजर को आवश्यक एलर्जी किट पास रखें।
- शरीर में पानी की कमी न हो, लगातार शुद्ध जल पीते रहें।
- सांस लेने में समस्या, आंखों में जलन या लालिमा, कफ, छाती में दर्द या भारीपन होने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
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क्या न करें
- आतिशबाजी, लकड़ी, सूखी पत्तियां, कूड़ा और कृषि उत्पादों को आग न लगाएं।
- भारी यातायात व औद्योगिक क्षेत्रों में जाने से बचें।
- सुबह और देर शाम टहलने न जाएं, इस समय व्यायाम भी न करें।
- स्कूल-कॉलेजों में परिसर के बाहर प्रार्थना सभाओं, खेलकूद व व्यायाम न कराएं।
- सुबह और देर शाम दरवाजे-खिड़कियां मत खोलें लेकिन, दोपहर 12 से शाम चार बजे तक जरूर खोलें।
- बीड़ी, सिगरेट व अन्य तंबाकू पदार्थों का सेवन न करें।
- अधिकतर समय घर में रहें, घर के बाहर की गतिविधियां कम से कम रखें।
- सांस, फेफड़े और हृदय रोग के मरीज अपनी दवा हमेशा साथ रखें।
- कागज व कपड़े के मास्क कम प्रयोग करें।
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वायु प्रदूषण के कारण
वाहनों का धुआं, सड़क पर उड़ती धूल, निर्माण कार्यों की धूल, कूड़ा व फसलों के अवशेष जलाने से निकला धुआं, औद्योगिक धुआं, पटाखे, थर्मल पावर प्लांट का उत्सर्जन और लकड़ी-कोयला जलने से निकलने वाला धुआं प्रदेश में प्रदूषण का मुख्य कारण बन गया है।
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