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गांव पहुंचने पर जांबाज प्रदीप को सिर आंखों पर बैठाया
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फौजी प्रदीप कुमार का स्वागत करते परिजन, ग्रामीण।
- फोटो : SIKANDRABAD
गांव पहुंचने पर जांबाज प्रदीप को सिर आंखों पर बैठाया
सिकंदराबाद । बहादुरी के लिए सेना मेडल के लिए चयनित होने के बाद जांबाज प्रदीप कुमार शनिवार को गांव पहुंचा। गांव पहुंचे पर परिवार के लोगों, ग्रामीणों ने बहादुर बेटे का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। प्रदीप की बहादुरी को सैलयूट करने के लिए उसके घर पर ग्रामीणों का तांता लगा रहा। बेटे की बहादुरी पर परिवार की नहीं गांव के लोग भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के गांव बुटैना निवासी प्रदीप कुमार पुत्र देवेंद्र सिंह ने बताया कि वह 2011 में सेना में भर्ती हुआ था। बताया कि वह नौ राष्ट्रीय रायफल के घातक दस्ते में है। उसकी तैनाती कश्मीर के कुलगाम में है। बताया कि 21 अक्तूबर की रात में उन्हें एक घर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली। सूचना पर उनकी टुकड़ी ने सर्च अभियान चलाया। बताया कि सर्च अभियान के दौरान वह इनर सर्किल में था। रात करीब दो बजे घर में छिपे आतंकियों ने खिड़की से उन पर फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों पर फायरिंग की। आतंकियों से लोहा लेने के दौरान एक आतंकी ने उनके ऊपर हैंडग्रेनेड से हमला किया। हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गए। जख्मी होने के बाद भी वह आतंकियों से लोहा लेते रहे और अपने साथियों के साथ मिलकर घर में छिपे तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। बताया कि गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसे कई महीनों तक उपचार के लिए अस्पताल में रहना पड़ा। बताया कि उनकी बहादुरी के लिए उसका नाम सेना मेडल के लिए चयनित किया गया है। बहादुरी पुरस्कार के लिए नाम चयनित होने के बाद शनिवार को पहली बार प्रदीप कुमार गांव पहुंचे। गांव पहुंचते ही जांबाज प्रदीप कुमार के स्वागत में भीड़ उमड़ पड़ी। गांव के लोगों ने बहादुर बेटे का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर प्रदीप कुमार ने कहा कि एक युवा को फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर मातृ भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
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सिकंदराबाद । बहादुरी के लिए सेना मेडल के लिए चयनित होने के बाद जांबाज प्रदीप कुमार शनिवार को गांव पहुंचा। गांव पहुंचे पर परिवार के लोगों, ग्रामीणों ने बहादुर बेटे का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। प्रदीप की बहादुरी को सैलयूट करने के लिए उसके घर पर ग्रामीणों का तांता लगा रहा। बेटे की बहादुरी पर परिवार की नहीं गांव के लोग भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के गांव बुटैना निवासी प्रदीप कुमार पुत्र देवेंद्र सिंह ने बताया कि वह 2011 में सेना में भर्ती हुआ था। बताया कि वह नौ राष्ट्रीय रायफल के घातक दस्ते में है। उसकी तैनाती कश्मीर के कुलगाम में है। बताया कि 21 अक्तूबर की रात में उन्हें एक घर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली। सूचना पर उनकी टुकड़ी ने सर्च अभियान चलाया। बताया कि सर्च अभियान के दौरान वह इनर सर्किल में था। रात करीब दो बजे घर में छिपे आतंकियों ने खिड़की से उन पर फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों पर फायरिंग की। आतंकियों से लोहा लेने के दौरान एक आतंकी ने उनके ऊपर हैंडग्रेनेड से हमला किया। हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गए। जख्मी होने के बाद भी वह आतंकियों से लोहा लेते रहे और अपने साथियों के साथ मिलकर घर में छिपे तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। बताया कि गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसे कई महीनों तक उपचार के लिए अस्पताल में रहना पड़ा। बताया कि उनकी बहादुरी के लिए उसका नाम सेना मेडल के लिए चयनित किया गया है। बहादुरी पुरस्कार के लिए नाम चयनित होने के बाद शनिवार को पहली बार प्रदीप कुमार गांव पहुंचे। गांव पहुंचते ही जांबाज प्रदीप कुमार के स्वागत में भीड़ उमड़ पड़ी। गांव के लोगों ने बहादुर बेटे का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर प्रदीप कुमार ने कहा कि एक युवा को फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर मातृ भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
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