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हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, रिपोर्ट तैयार करते रहे अफसर
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ऊपरकोट बवाल : सीएए के विरोध में हुए बवाल पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस से रिपोर्ट तलब
बुलंदशहर। नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ऊपरकोट में गत 20 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन ने बवाल का रूप ले लिया था। बुलंदशहर के अलावा अन्य जनपदों में भी बवाल हुआ था। मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और पुलिस के कारण ही बवाल होने की बात कही है। जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव व डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है। इसी के चलते मंगलवार को दिनभर अफसर यह रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे।
गत 20 दिसंबर को नगर के ऊपरकोट मोहल्ले में सीएए के विरोध में हजारों की संख्या में एकत्रित होकर लोग प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में शामिल कुछ बवालियों ने इस दौरान माहौल बिगाड़ दिया और ऊपरकोट पर जमकर बवाल हुआ था। इसके अलावा प्रदेश में कई स्थानों पर सीएए के विरोध में बवाल हुआ था। अब सामने आया है कि बीते दिनों एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उसने कहा कि पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया गया था, लेकिन पुलिस ने लाठियां और गोलियां चलाई। जिस कारण बवाल हुआ और कई लोग मारे गए। जिस पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव गृह और उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के डीजीपी ओपी सिंह से रिपोर्ट मांगी है कि बवाल किन कारणों से हुआ और इसमें पुलिस की क्या लापरवाही रही। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए मंगलवार को एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव, सीओ सिटी राघवेंद्र मिश्र और क्राइम ब्रांच के तीन दारोगा दिनभर लगे रहे। उन्होंने कुछ फोटोग्राफ भी जुटाए हैं और वीडियोग्राफी की भी सीडी बनवाई है। जिससे कि हाईकोर्ट में जवाब दिया जा सके कि पुलिस की कोई लापरवाही नहीं रही। पुलिस ने कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सख्ती दिखाई थी।
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करीब डेढ़ घंटे तक सुलगा था ऊपरकोट
बवाल के दौरान ऊपरकोट क्षेत्र में करीब डेढ़ घंटे तक बलवाईयों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान बलवाइयों ने देहात कोतवाल की जीप समेत एक अन्य स्कूटी को आग के हवाले कर दिया था। जबकि, पुलिस टीम पर बलवाईयों ने जमकर पथराव व फायरिंग भी की थी।
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मामले में दर्ज हुई थीं तीन एफआईआर
बवाल प्रकरण में कुल तीन एफआईआर दर्ज कराई गई थीं। जिसमे एक एफआईआर देहात कोतवाल के चालक द्वारा, एक एफआईआर कालाआम चौकी प्रभारी व एक एफआईआर नगर कोतवाल के द्वारा दर्ज कराई गई थी। जिनमें कुल 22 नामजद और 700-800 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
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न पोस्टर छपे और न अब हो रही गिरफ्तारी
मामले में पुलिस अभी तक सिर्फ 12 आरोपियों को ही सलाखों के पीछे पहुंचा सकी है। जबकि, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अब कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। बवन के बाद प्रदेश सरकार ने आदेश दिए थे कि बवालियों को चिन्हित कर प्रमुख चौक और चौराहों पर उनके पोस्टर चस्पा किए जाएं, लेकिन मामले में अभी भी पुलिस ने बलवाइयों के पोस्टर चस्पा नहीं किए हैं।
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लखनऊ से आए निर्देश के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। दो दिन के अंदर शासन को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट भेजकर अवगत करा दिया जाएगा।
राघवेंद्र मिश्रा, एसआईटी प्रभारी/सीओ सिटी
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बुलंदशहर। नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ऊपरकोट में गत 20 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन ने बवाल का रूप ले लिया था। बुलंदशहर के अलावा अन्य जनपदों में भी बवाल हुआ था। मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और पुलिस के कारण ही बवाल होने की बात कही है। जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव व डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है। इसी के चलते मंगलवार को दिनभर अफसर यह रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे।
गत 20 दिसंबर को नगर के ऊपरकोट मोहल्ले में सीएए के विरोध में हजारों की संख्या में एकत्रित होकर लोग प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में शामिल कुछ बवालियों ने इस दौरान माहौल बिगाड़ दिया और ऊपरकोट पर जमकर बवाल हुआ था। इसके अलावा प्रदेश में कई स्थानों पर सीएए के विरोध में बवाल हुआ था। अब सामने आया है कि बीते दिनों एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उसने कहा कि पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया गया था, लेकिन पुलिस ने लाठियां और गोलियां चलाई। जिस कारण बवाल हुआ और कई लोग मारे गए। जिस पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव गृह और उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के डीजीपी ओपी सिंह से रिपोर्ट मांगी है कि बवाल किन कारणों से हुआ और इसमें पुलिस की क्या लापरवाही रही। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए मंगलवार को एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव, सीओ सिटी राघवेंद्र मिश्र और क्राइम ब्रांच के तीन दारोगा दिनभर लगे रहे। उन्होंने कुछ फोटोग्राफ भी जुटाए हैं और वीडियोग्राफी की भी सीडी बनवाई है। जिससे कि हाईकोर्ट में जवाब दिया जा सके कि पुलिस की कोई लापरवाही नहीं रही। पुलिस ने कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सख्ती दिखाई थी।
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करीब डेढ़ घंटे तक सुलगा था ऊपरकोट
बवाल के दौरान ऊपरकोट क्षेत्र में करीब डेढ़ घंटे तक बलवाईयों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान बलवाइयों ने देहात कोतवाल की जीप समेत एक अन्य स्कूटी को आग के हवाले कर दिया था। जबकि, पुलिस टीम पर बलवाईयों ने जमकर पथराव व फायरिंग भी की थी।
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मामले में दर्ज हुई थीं तीन एफआईआर
बवाल प्रकरण में कुल तीन एफआईआर दर्ज कराई गई थीं। जिसमे एक एफआईआर देहात कोतवाल के चालक द्वारा, एक एफआईआर कालाआम चौकी प्रभारी व एक एफआईआर नगर कोतवाल के द्वारा दर्ज कराई गई थी। जिनमें कुल 22 नामजद और 700-800 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
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न पोस्टर छपे और न अब हो रही गिरफ्तारी
मामले में पुलिस अभी तक सिर्फ 12 आरोपियों को ही सलाखों के पीछे पहुंचा सकी है। जबकि, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अब कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। बवन के बाद प्रदेश सरकार ने आदेश दिए थे कि बवालियों को चिन्हित कर प्रमुख चौक और चौराहों पर उनके पोस्टर चस्पा किए जाएं, लेकिन मामले में अभी भी पुलिस ने बलवाइयों के पोस्टर चस्पा नहीं किए हैं।
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लखनऊ से आए निर्देश के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। दो दिन के अंदर शासन को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट भेजकर अवगत करा दिया जाएगा।
राघवेंद्र मिश्रा, एसआईटी प्रभारी/सीओ सिटी