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गोबर के स्प्रे से पराली को बना सकते हैं बेहतर खाद
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गोबर के स्प्रे से पराली को बना सकते हैं बेहतर खाद
बुगरासी। गाय के गोबर के स्प्रे से खेतों में पराली को बेहतर खाद बनाया जा सकता है। यह नुस्खा पूषा व राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शोध के बाद तैयार किया गया है। मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए देशी गाय के गोबर के स्प्रे से पराली को खेतों के लिए जैविक खाद के रूप में बनाया जा सकता है। इससे जहां प्रदूषण नहीं फैलेगा, वहीं फसल की पैदावार भी अच्छी और रसायन रहित होगी।
वर्षों से किसानों के लिए पराली समस्या है और किसान इसे जलाते आ रहे हैं। पराली के जलने से जनपद और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या विकट हो जाती है। पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी ने बताया कि जानकारी के अभाव के चलते ही किसानों के लिए पराली एक समस्या है। इसका बेहतर विकल्प आ चुका है। जरूरत है तो केवल किसानों को जागरूक करने की। हालांकि पराली से देश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली बनाने से लेकर पशुओं के चारे के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, लेकिन ऐसा बहुत कम मात्रा में हो पा रहा है। भारत भूषण त्यागी ने बताया कि भारत सरकार की राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ पूषा ने देशी गाय के गोबर से एक स्प्रे तैयार किया है। पराली पर स्प्रे करने से पराली लगभग सप्ताह भर में खेत में पूरी तरह से गल जाती है जो बेहतर खाद का रूप ले लेती है। जुताई के बाद पराली खेत में मिल जाती है। इससे खेत की उर्वरा शक्ति पहले से काफी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अभी इसका प्रयोग बहुत कम किसान ही कर पाए हैं। गांव बरहाना, स्याना आदि के कुछ किसानों ने इसका प्रयोग किया है जो पूरी तरह से सफल रहा है। अभी प्रचार-प्रसार की कमी और जानकारी के अभाव के चलते किसानों के लिए पराली एक समस्या है जो जानकारी होने पर खेत के लिए एक संजीवनी साबित होगी।
आसानी से मिल जाता है स्प्रे
भारत भूषण त्यागी ने बताया कि पराली को खाद के रूप देने वाला स्प्रे स्याना, गाजियाबाद, बीहटा में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त भी अब कई जगहों पर इसकी उपलब्धता आसान होती जा रही है।
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किसानों ने कहा
अभी पराली का विकल्प क्या है, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि क्षेत्र के पराली के जलाने की कोई घटना नहीं है लेकिन यदि जानकारी होती है तो किसानों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी। - जगदीश राणा
फिलहाल पराली को ऊपर से काटकर चारे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। नीचे के हिस्से की बची पराली को खेत में जोतकर मिट्टी में ही मिलाया जा रहा है। अभी बेहतर विकल्प की जानकारी नहीं मिल पा रही। -दीपक त्यागी
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बुगरासी। गाय के गोबर के स्प्रे से खेतों में पराली को बेहतर खाद बनाया जा सकता है। यह नुस्खा पूषा व राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शोध के बाद तैयार किया गया है। मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए देशी गाय के गोबर के स्प्रे से पराली को खेतों के लिए जैविक खाद के रूप में बनाया जा सकता है। इससे जहां प्रदूषण नहीं फैलेगा, वहीं फसल की पैदावार भी अच्छी और रसायन रहित होगी।
वर्षों से किसानों के लिए पराली समस्या है और किसान इसे जलाते आ रहे हैं। पराली के जलने से जनपद और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या विकट हो जाती है। पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी ने बताया कि जानकारी के अभाव के चलते ही किसानों के लिए पराली एक समस्या है। इसका बेहतर विकल्प आ चुका है। जरूरत है तो केवल किसानों को जागरूक करने की। हालांकि पराली से देश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली बनाने से लेकर पशुओं के चारे के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, लेकिन ऐसा बहुत कम मात्रा में हो पा रहा है। भारत भूषण त्यागी ने बताया कि भारत सरकार की राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ पूषा ने देशी गाय के गोबर से एक स्प्रे तैयार किया है। पराली पर स्प्रे करने से पराली लगभग सप्ताह भर में खेत में पूरी तरह से गल जाती है जो बेहतर खाद का रूप ले लेती है। जुताई के बाद पराली खेत में मिल जाती है। इससे खेत की उर्वरा शक्ति पहले से काफी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अभी इसका प्रयोग बहुत कम किसान ही कर पाए हैं। गांव बरहाना, स्याना आदि के कुछ किसानों ने इसका प्रयोग किया है जो पूरी तरह से सफल रहा है। अभी प्रचार-प्रसार की कमी और जानकारी के अभाव के चलते किसानों के लिए पराली एक समस्या है जो जानकारी होने पर खेत के लिए एक संजीवनी साबित होगी।
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आसानी से मिल जाता है स्प्रे
भारत भूषण त्यागी ने बताया कि पराली को खाद के रूप देने वाला स्प्रे स्याना, गाजियाबाद, बीहटा में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त भी अब कई जगहों पर इसकी उपलब्धता आसान होती जा रही है।
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किसानों ने कहा
अभी पराली का विकल्प क्या है, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि क्षेत्र के पराली के जलाने की कोई घटना नहीं है लेकिन यदि जानकारी होती है तो किसानों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी। - जगदीश राणा
फिलहाल पराली को ऊपर से काटकर चारे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। नीचे के हिस्से की बची पराली को खेत में जोतकर मिट्टी में ही मिलाया जा रहा है। अभी बेहतर विकल्प की जानकारी नहीं मिल पा रही। -दीपक त्यागी