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शिक्षक और पैरेंट्स बच्चों को दें गुड और बैड टच की जानकारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2019 11:25 PM IST
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अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत ब्रहमानंद पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम। - फोटो : BULANDSHAHR
शिक्षक और पैरेंट्स बच्चों को दें गुड और बैड टच की जानकारी
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बुलंदशहर। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को ब्रह्मानंद पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। इसमें छात्राओं ने भी अपने बेबाकी के साथ सवाल रखे तो मुख्य अतिथि एसपी क्राइम शिवराम यादव ने जवाब भी दिया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों और पैरैंट्स से अपील किया कि वह छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक करें।
एसपी क्राइम शिवराम यादव ने कहा कि अपराध करने वाले लोगों को शुरूआती दौर में ही सबक सिखाएं, जिससे अपराध को रोका जा सके। बेटियों का शिक्षित होना अति आवश्यक है। वह निडर होकर अपनी बात अपने माता-पिता, शिक्षक और अधिकारियों को बताएं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी पूजनीय हैं, जहां नारी की पूजा होती है, वहां भगवान निवास करते हैं। आज समाज में अपराध बढ़ रहा है। यदि किसी बेटी के साथ अपराध होता है तो वह चुप न रहे। उसके खिलाफ नारी सशक्तीकरण का नारा बुलंद करते हुए आवाज बुलंद करें। साथ ही उनकी सहायता के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए टोल फ्री नंबर 1090 और पुलिस के 100 नंबर पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज करवाने के करीब आठ मिनट में पुलिस मदद के लिए मौके पर होगी। इस दौरान करीब 200 से अधिक छात्राओं ने भागीदारी की। विद्यालय के चेयरमैन डॉ. पीके त्यागी और प्रधानाचार्या छवि शर्मा ने भी छात्राओं को अपराजिता बनकर हर मुसीबत का मुकाबला करने के लिए जागरूक किया।
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बोली छात्राएं
मेरा मानना है कि आज लड़कियां लड़कों से पीछे नहीं हैं। इसलिए अब उसे डरने की नहीं, बल्कि सबक सिखाने की जरूरत है। - छात्रा काजल कुमारी।
महिलाओं खासकर लड़कियों को सशक्त करने के लिए यह मुहिम काफी सराहनीय है। इससे हमें नई दिशा मिलेगी और बहुत कुछ सीखने का भी मौका मिला है। - मनीषा।
जब तक हम स्वयं मजबूत होकर डटकर मुकाबला नहीं करेंगी, तब तक सबक नहीं सिखाया जा सकता। इसके लिए निडर होना जरूरी है। - काजल राठोर।
लड़कियों का भी सपना होता है कि वह भी लड़कों की तरह घूमे-फिरे और शिक्षित होकर आगे चलकर नाम रोशन करें। अब समय बदल गया है और समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है। - हिमांशी।
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कई बार ऐसी घटना हो जाती है, जिसमें लड़की का ही दोष माना जाता है। जबकि ऐसा होता नहीं है। मेरा कहना है कि इस पर सभी को गंभीरता से विचार करना होगा। - आशी।
अभिभावकों की आस होती है उनकी बेटी आगे चलकर नाम रोशन करें। लेकिन आज भी समाज में कुछ लोग पुरानी बातों को लेकर कई सवाल उठा देते हैं। इन पर रोक लगनी चाहिए। - दिव्यांशी।

जब हमारे साथ पुलिस है और अभिभावकों का सिर पर हाथ है तो फिर डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। हर मुसीबत का मुकाबला करना हमारी जिम्मेदारी है। - अंजलि।
किसी की सोच को बदलने के लिए शिक्षा की जरूरत है। जब तक सभी शिक्षित नहीं होंगे, तब महिलाओं के प्रति जो सोच बन रही है व नहीं बदल सकती। - नैंसी।
इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिए। इससे महिलाओं खासकर छात्राओं में जागरूकता आएगी और उनके अंडर का डर भी निकल जाएगा। - तपस्या।
मेरा मानना है कि सभी लड़कियों को सेल्फ डिफेंस और कराटे सीखने चाहिए। ताकि समय आने पर इनका प्रयोग कर सामने वाले को सबक सिखाकर यह बता दिया जाए कि वह अब अबला नहीं सबला बन चुकी हैं। - नेहा सोलंकी।
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