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एक साल बाद भी अनसुलझी है पूर्व सदर विधायक की मौत की कहानीएक साल बाद भी अनसुलझी है पूर्व सदर विधायक की मौत की कहानी
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एक साल बाद भी अनसुलझी है पूर्व सदर विधायक की मौत की कहानी
बुलंदशहर। पूर्व विधायक हाजी अलीम की मौत हुए एक वर्ष हो चुके हैं, लेकिन मामला अभी तक अनसुलझा है। मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है। बीते दिनों सीबीसीआईडी ने पूर्व विवेचक समेत अन्य पुलिसर्किमयों को बयान देने के लिए तलब किया था। बता दें कि पूर्व विवेचक ने अपनी जांच में घटना को आत्महत्या बताते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया था।
बता दें कि गत 10 अक्तूबर 2018 की सुबह को पूर्व विधायक हाजी अलीम का गोली लगा हुआ शव उनके सरायधारी स्थित घर में उनके बिस्तर पर पड़ा हुआ मिला था। कमरे का दरवाजा न खुलने और मोबाइल फोन रिसीव न करने पर खिड़की से कमरे में घुसकर परिजनों ने प्रवेश किया था। पुलिस की जांच के दौैरान बेडरूम से दो खाली कारतूस और पिस्टल बरामद हुई थी। पूर्व विधायक की कनपटी पर गोली का घाव था। जांच में एक बुलेट बरामद हो गई, जबकि दूसरी बुलेट का पता नहीं चल सका। सामने आया था कि नौ अक्तूबर की रात में ही अलीम की गोली लगने से मौत हो गई थी। 11 अक्तूबर को आगरा से आई फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर क्त्रसइम सीन रिक्त्रिस्एट किया था। दो बुलेट बरामद होने के बाद मृतक के छोटे भाई और सदर ब्लाक प्रमुख हाजी यूनुस ने मामले में हत्या की तहरीर दी थी। नगर पुलिस ने मामले में गत 13 अक्तूबर को अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। नगर पुलिस ने फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर घटना को सुसाइड मानते हुए केस को फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया था। जिसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से शासन से सीबीसीआईडी जांच की मांग को मंजूर किया गया था। बीते दिनों सीबीसीआईडी ने जांच शुरू कर दी थी। गत सितंबर माह के अंतिम पखवाड़े में सीबीसीआईडी नेे घटना के तत्कालीन विवेचक/कोतवाल धनंजय मिश्रा, मुंशी अशोक और अन्य पुलिसकर्मियों को बयान के लिए तलब किया था। वारदात को बुधवार को एक वर्ष पूरा हो जाएगा, लेकिन अलीम की मौत की गुत्थी को अभी तक नहीं सुलझाया जा सका है।
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बुलंदशहर। पूर्व विधायक हाजी अलीम की मौत हुए एक वर्ष हो चुके हैं, लेकिन मामला अभी तक अनसुलझा है। मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है। बीते दिनों सीबीसीआईडी ने पूर्व विवेचक समेत अन्य पुलिसर्किमयों को बयान देने के लिए तलब किया था। बता दें कि पूर्व विवेचक ने अपनी जांच में घटना को आत्महत्या बताते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया था।
बता दें कि गत 10 अक्तूबर 2018 की सुबह को पूर्व विधायक हाजी अलीम का गोली लगा हुआ शव उनके सरायधारी स्थित घर में उनके बिस्तर पर पड़ा हुआ मिला था। कमरे का दरवाजा न खुलने और मोबाइल फोन रिसीव न करने पर खिड़की से कमरे में घुसकर परिजनों ने प्रवेश किया था। पुलिस की जांच के दौैरान बेडरूम से दो खाली कारतूस और पिस्टल बरामद हुई थी। पूर्व विधायक की कनपटी पर गोली का घाव था। जांच में एक बुलेट बरामद हो गई, जबकि दूसरी बुलेट का पता नहीं चल सका। सामने आया था कि नौ अक्तूबर की रात में ही अलीम की गोली लगने से मौत हो गई थी। 11 अक्तूबर को आगरा से आई फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर क्त्रसइम सीन रिक्त्रिस्एट किया था। दो बुलेट बरामद होने के बाद मृतक के छोटे भाई और सदर ब्लाक प्रमुख हाजी यूनुस ने मामले में हत्या की तहरीर दी थी। नगर पुलिस ने मामले में गत 13 अक्तूबर को अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। नगर पुलिस ने फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर घटना को सुसाइड मानते हुए केस को फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया था। जिसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से शासन से सीबीसीआईडी जांच की मांग को मंजूर किया गया था। बीते दिनों सीबीसीआईडी ने जांच शुरू कर दी थी। गत सितंबर माह के अंतिम पखवाड़े में सीबीसीआईडी नेे घटना के तत्कालीन विवेचक/कोतवाल धनंजय मिश्रा, मुंशी अशोक और अन्य पुलिसकर्मियों को बयान के लिए तलब किया था। वारदात को बुधवार को एक वर्ष पूरा हो जाएगा, लेकिन अलीम की मौत की गुत्थी को अभी तक नहीं सुलझाया जा सका है।
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