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300 के करीब पहुंचा एक्यूआई, घुटने लगा दम
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300 के करीब पहुंचा एक्यूआई, बरतें सावधानी
बुलंदशहर। जिले में प्रदूषण का स्तर 300 के करीब पहुंच गया है। हवा में बढ़ता धुआं और हवा के कण दिल और सांस के मरीजों की समस्या बढ़ा सकते हैं। साथ ही कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों की समस्या भी बढ़ सकती है। चिकित्सक बढ़ते एक्यूआई में सांस और दिल के मरीजों से सतर्कता बरतनी की सलाह दे रहे हैं।
लॉकडाउन में यातायात और उद्योग धंधे बंद होने की वजह से जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 के करीब आ गया था। जैसे-जैसे यातायात और उद्योग धंधों को छूट मिलती गई, वैसे ही जिले का वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। अगस्त में वायु सूचकांक 200 से कम रहा तो सितंबर माह में 250 के करीब तक मापा गया। अक्तूबर माह में वायु सूचकांक बढ़कर 300 के करीब तक पहुंच गया हैं। शनिवार को जनपद का एक्यूआई 291 दर्ज किया गया। हवा में घुलता प्रदूषण का जहर सामान्य लोगों को तो बीमार बना ही रहा है। साथ ही दिल और सांस के मरीजों के लिए खतरे की घंटी लेकर आ रहा है। इससे धुंए और धूल के कण शरीर में प्रवेश करेंगे तो लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
धूल के गुबार की वजह
इन दिनों शहर में जगह-जगह सीवर लाइन (मार्गों पर कार्य बंद है) बिछाने, नाला निर्माण, भवन निर्माण, सड़क निर्माण आदि कार्य चल रहे हैं। वाहनों के चलने से सड़कों पर छोड़ी गई मिट्टी उड़कर हवा को दूषित कर रही है। इसके अलावा कुछ व्यापारी सब्जी और फल विक्रेता रात और सुबह के समय दुकानों और फड़ों का कचरा सड़कों पर जलाते हैं। जो सर्दी के दौरान धुंआ और धूल के कण ऊपर न जाकर नम हवा में धरती के आसपास रहते हैं।
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नहीं होता पानी का छिड़काव
शहरी क्षेत्र समेत जिलेभर में धूल से निजात दिलाने के लिए निर्माण कार्य कर रही संस्थाओं द्वारा पानी का छिड़काव नहीं कराया जाता है। जिससे वाहन चलने के दौरान धूल का गुबार हवा में उड़ता रहता है। जिससे लोगों को जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, टीबी और गले में इंफेक्शन साइनस, अस्थमा व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती हैं। फिजीशियन डॉ. राहुल भारद्वाज ने बताया कि धुंध के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। ये शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं।
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बुलंदशहर। जिले में प्रदूषण का स्तर 300 के करीब पहुंच गया है। हवा में बढ़ता धुआं और हवा के कण दिल और सांस के मरीजों की समस्या बढ़ा सकते हैं। साथ ही कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों की समस्या भी बढ़ सकती है। चिकित्सक बढ़ते एक्यूआई में सांस और दिल के मरीजों से सतर्कता बरतनी की सलाह दे रहे हैं।
लॉकडाउन में यातायात और उद्योग धंधे बंद होने की वजह से जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 के करीब आ गया था। जैसे-जैसे यातायात और उद्योग धंधों को छूट मिलती गई, वैसे ही जिले का वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। अगस्त में वायु सूचकांक 200 से कम रहा तो सितंबर माह में 250 के करीब तक मापा गया। अक्तूबर माह में वायु सूचकांक बढ़कर 300 के करीब तक पहुंच गया हैं। शनिवार को जनपद का एक्यूआई 291 दर्ज किया गया। हवा में घुलता प्रदूषण का जहर सामान्य लोगों को तो बीमार बना ही रहा है। साथ ही दिल और सांस के मरीजों के लिए खतरे की घंटी लेकर आ रहा है। इससे धुंए और धूल के कण शरीर में प्रवेश करेंगे तो लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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धूल के गुबार की वजह
इन दिनों शहर में जगह-जगह सीवर लाइन (मार्गों पर कार्य बंद है) बिछाने, नाला निर्माण, भवन निर्माण, सड़क निर्माण आदि कार्य चल रहे हैं। वाहनों के चलने से सड़कों पर छोड़ी गई मिट्टी उड़कर हवा को दूषित कर रही है। इसके अलावा कुछ व्यापारी सब्जी और फल विक्रेता रात और सुबह के समय दुकानों और फड़ों का कचरा सड़कों पर जलाते हैं। जो सर्दी के दौरान धुंआ और धूल के कण ऊपर न जाकर नम हवा में धरती के आसपास रहते हैं।
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नहीं होता पानी का छिड़काव
शहरी क्षेत्र समेत जिलेभर में धूल से निजात दिलाने के लिए निर्माण कार्य कर रही संस्थाओं द्वारा पानी का छिड़काव नहीं कराया जाता है। जिससे वाहन चलने के दौरान धूल का गुबार हवा में उड़ता रहता है। जिससे लोगों को जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, टीबी और गले में इंफेक्शन साइनस, अस्थमा व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती हैं। फिजीशियन डॉ. राहुल भारद्वाज ने बताया कि धुंध के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। ये शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं।