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Bulandshahar News: काली नदी की सफाई को लेकर भाकियू कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 10:30 PM IST
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BKU activists protest over the cleaning of the Kali River; submit a memorandum.
कलक्ट्रेट में धरने पर बैंठे किसान। संवाद
बुलंदशहर। काली नदी की बदहाली और बढ़ते प्रदूषण के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) महाशक्ति के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने काली नदी की तत्काल सफाई कराने, उसमें निकासी किए जा रहे गंदे पानी को रोकने और नदी के दोनों किनारों की पटरी दुरुस्त कराने की मांग की।
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सोमवार को भाकियू महाशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में ऐमनपुर, बनवारीपुर घुंघरावली, रमपुरा, दौलतगढ़ गांव के किसानों ने काली नदी की सफाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी कुमार हर्ष को सौंपा। इस दौरान धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि काली नदी की सफाई के नाम पर वर्षों से योजनाएं और दावे किए जा रहे हैं लेकिन धरातल पर समस्या जस की तस है।
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नदी में गंदगी और सिल्ट जमा होने से कई स्थानों पर जलप्रवाह बाधित है। बरसात के दिनों में नदी का पानी आसपास के खेतों में पहुंच जाता है। इससे फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है। गुलावठी से लेकर बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू, खुर्जा क्षेत्र तक काली नदी के किनारे बसे गांव लंबे समय से प्रभावित हैं।
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पूर्व में भी नदी की सफाई के लिए कई अभियान चलाए गए लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्ष 2023 में शिकारपुर क्षेत्र में नदी के अवरुद्ध हिस्से की सफाई कराई गई थी। इसके बावजूद कई स्थानों पर सिल्ट और गंदगी जमा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हाल में भी काली नदी के किनारे अच्छेजा घाट, ऐमनपुर, क्रियावली और घुंघरावली-बनवारीपुर समेत कई क्षेत्रों के किसानों की फसल बर्बाद होने को लेकर अमर उजाला ने भी खबर प्रकाशित की थी। ज्ञापन देने वालों में रवि सोलंकी, ताहिर अली, चौधरी विक्रम सिंह, कुलदीप ठाकुर, यशपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, बंटी सिंह लोधी, डॉ. गुलवीर आदि मौजूद रहे।

कार्ययोजना भी की थी तैयार
काली नदी को निर्मल बनाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की कार्ययोजना भी तैयार की गई थी। इसमें नदी की सफाई, सिल्ट हटाने, अतिक्रमण मुक्त कराने, जलप्रवाह सुचारु करने और दोनों किनारों पर पौधरोपण की योजना शामिल थी। पायलट प्रोजेक्ट के आगे काम नहीं बढ़ सका।
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