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जिले 12 हजार वट वृक्ष, 100 साल पुराना केवल एक
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जिले 12 हजार वट वृक्ष, 100 साल पुराना केवल एक
बुलंदशहर। वट वृक्ष को बड़ और बरगद के नाम से भी जाना जाता है। यह पेड़ जहां आस्था का प्रतीक माना जाता है, वहीं यह जीवन देने वाला भी माना जाता है। तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच मौजूदा समय में जनपद में वट वृक्षों की संख्या 12 हजार बची है। औषधीय गुणों से भरपूर इस पेड़ का पर्यावरण में भी विशेष महत्व है। यह पेड़ प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है। जिले में 100 साल से पुराना केवल एक वट वृक्ष है जिसे धरोहर घोषित किया गया है।
100 साल से अधिक पुराना पेड़ हो चुका है संरक्षित
गंगा किनारे मांडू घाट पर एक 100 साल से अधिक पुराना वट वृक्ष है। शासन ने वन विभाग को गत दिनों 100 साल से अधिक पेड़ों को धरोहर घोषित करने के आदेश दिए थे। इस पर विभाग ने इसे धरोहर घोषित की श्रेणी में शामिल कर लिया है। हालांकि इसके अलावा नगर के रेलवे स्टेशन, अंबर रोड, अनूपशहर, गांव राजौर, गांव बोहिच, गांव लुहारली और स्याना के पास भी बरगद के विशालकाय पेड़ हैं, लेकिन इनका यह प्रमाण नहीं मिला है कि यह कितने वर्ष पुराने हैं।
प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ते हैं पेड़
नगर के आईपी कॉलेज प्रथम परिसर में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राय ने बताया कि यह पीपल और गूलर के परिवार का पेड़ है। हिंदु धर्म के लोग इस वृक्ष में आस्था रखते हैं। यह अधिकतर मंदिर के आसपास दिखाई देता है। औषधीय गुणों के साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने में इसका विशेष महत्व है। एक विशालकाय वृक्ष प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है। नए पेड़ प्रतिदिन 10 लीटर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह भूमि को उपजाऊ कर लाभदायक सूक्ष्म जीवन व अर्थ वॉर्म को को पनपने में सहयोग करता है। पीपल की तरह यह भी रात के समय कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करता है। कोयल और बुलबुल आदि पक्षी इसके फल को बड़े चाव से खाते हैं। इसके नीचे बैठने पर सात से आठ डिग्री तापमान का अंतर होता है। उन्हाेंने बताया कि मैं अब तक 100 से अधिक बरगद के पौधे लगा चुका है। अब बृहस्पतिवार को वट अमावस्या है तो सभी को एक बरगद का पेड़ लगाने के साथ उसके संरक्षण की शपथ लें।
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बोले डीएफओ
डीएफओ गौतम सिंह का कहना है कि जनपद में 12 हजार से अधिक बरगद के पेड़ हैं। गत सालों में कितने पेड़ कम हुए इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उनका कहना है कि पेड़ों की गिनती न होने के कारण इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती है। एक बरगद 100 साल से अधिक पुराना है और उसे विभाग ने विरासत घोषित कर दिया है। इसका संरक्षण विभाग की ओर से किया जाएगा। साथ ही विभाग की ओर से ऐसे और पेड़ों की तलाश जारी है।
आज होगी वट सावित्री की पूजा
आचार्य शिवदत्त शास्त्री ने बताया कि वट सावित्री व्रत बृहस्पतिवार को है। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या तिथि बुधवार दोपहर दो बजे से शुरू हो गया है और इसका समापन बृहस्पतिवार सुबह चार बजकर 20 मिनट पर होगा। उन्होंने बताया कि पूजन के दौरान सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां चौकी पर विराजमान करें। धूप-दीप, घी, फल-फूल, बांस का पंखा, लाल कलावा, कच्चा सूत, सुहाग का सामान, जल से भरा कलश आदि रखें। उसके बाद पूजा-अर्चना करते हुए मनोरथ पूर्ण की कामना करें। इस दिन वन में भोजन का भी विशेष महत्व है।
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बुलंदशहर। वट वृक्ष को बड़ और बरगद के नाम से भी जाना जाता है। यह पेड़ जहां आस्था का प्रतीक माना जाता है, वहीं यह जीवन देने वाला भी माना जाता है। तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच मौजूदा समय में जनपद में वट वृक्षों की संख्या 12 हजार बची है। औषधीय गुणों से भरपूर इस पेड़ का पर्यावरण में भी विशेष महत्व है। यह पेड़ प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है। जिले में 100 साल से पुराना केवल एक वट वृक्ष है जिसे धरोहर घोषित किया गया है।
100 साल से अधिक पुराना पेड़ हो चुका है संरक्षित
गंगा किनारे मांडू घाट पर एक 100 साल से अधिक पुराना वट वृक्ष है। शासन ने वन विभाग को गत दिनों 100 साल से अधिक पेड़ों को धरोहर घोषित करने के आदेश दिए थे। इस पर विभाग ने इसे धरोहर घोषित की श्रेणी में शामिल कर लिया है। हालांकि इसके अलावा नगर के रेलवे स्टेशन, अंबर रोड, अनूपशहर, गांव राजौर, गांव बोहिच, गांव लुहारली और स्याना के पास भी बरगद के विशालकाय पेड़ हैं, लेकिन इनका यह प्रमाण नहीं मिला है कि यह कितने वर्ष पुराने हैं।
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प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ते हैं पेड़
नगर के आईपी कॉलेज प्रथम परिसर में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राय ने बताया कि यह पीपल और गूलर के परिवार का पेड़ है। हिंदु धर्म के लोग इस वृक्ष में आस्था रखते हैं। यह अधिकतर मंदिर के आसपास दिखाई देता है। औषधीय गुणों के साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने में इसका विशेष महत्व है। एक विशालकाय वृक्ष प्रतिदिन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है। नए पेड़ प्रतिदिन 10 लीटर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह भूमि को उपजाऊ कर लाभदायक सूक्ष्म जीवन व अर्थ वॉर्म को को पनपने में सहयोग करता है। पीपल की तरह यह भी रात के समय कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करता है। कोयल और बुलबुल आदि पक्षी इसके फल को बड़े चाव से खाते हैं। इसके नीचे बैठने पर सात से आठ डिग्री तापमान का अंतर होता है। उन्हाेंने बताया कि मैं अब तक 100 से अधिक बरगद के पौधे लगा चुका है। अब बृहस्पतिवार को वट अमावस्या है तो सभी को एक बरगद का पेड़ लगाने के साथ उसके संरक्षण की शपथ लें।
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बोले डीएफओ
डीएफओ गौतम सिंह का कहना है कि जनपद में 12 हजार से अधिक बरगद के पेड़ हैं। गत सालों में कितने पेड़ कम हुए इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उनका कहना है कि पेड़ों की गिनती न होने के कारण इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती है। एक बरगद 100 साल से अधिक पुराना है और उसे विभाग ने विरासत घोषित कर दिया है। इसका संरक्षण विभाग की ओर से किया जाएगा। साथ ही विभाग की ओर से ऐसे और पेड़ों की तलाश जारी है।
आज होगी वट सावित्री की पूजा
आचार्य शिवदत्त शास्त्री ने बताया कि वट सावित्री व्रत बृहस्पतिवार को है। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या तिथि बुधवार दोपहर दो बजे से शुरू हो गया है और इसका समापन बृहस्पतिवार सुबह चार बजकर 20 मिनट पर होगा। उन्होंने बताया कि पूजन के दौरान सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां चौकी पर विराजमान करें। धूप-दीप, घी, फल-फूल, बांस का पंखा, लाल कलावा, कच्चा सूत, सुहाग का सामान, जल से भरा कलश आदि रखें। उसके बाद पूजा-अर्चना करते हुए मनोरथ पूर्ण की कामना करें। इस दिन वन में भोजन का भी विशेष महत्व है।