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बैंक सखी खोलेंगी नए खाते, 198 महिलाओं को मिली ट्रेनिंग
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बैंक सखी खोलेंगी नए खाते, 198 महिलाओं को मिली ट्रेनिंग
बुलंदशहर। जनपद की 946 ग्राम पंचायतों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार ने एक ग्राम पंचायत एक बैंक सखी (बिजनेस कोरेस्पोंडेंट) योजना शुरू की है। बैंक मित्रों की तर्ज पर बैंक सखी पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर गांवों में लोगों को धन निकासी और जमा करने की सुविधा दे सकेंगी। योजना से महिला सशक्तीकरण को बल मिलने के साथ ही गांव के लोगों को भी नकदी जमा करने और निकलने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्राम्य विकास की ओर से एक ग्राम पंचायत एक बिजनेस कोरेस्पोंडेंट योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाना है। जिससे अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वरोजगार से जुड़ सकें। योजना के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं या फिर अन्य महिलाओं को चयनित कर उन्हें प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू किया जा चुका है। विभागीय अफसरों के अनुसार बैंक सखी को किसी कंपनी की फ्रेंचाइजी दी जाएगी। बैंक सखी उसके माध्यम से लेनदेन कराएंगी। आरसेटी के निदेशक पंकज शर्मा ने बताया कि हजरतपुर स्थित पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद परीक्षा होती है, जिसमें पास होने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र दिया जाता है। अब तक 200 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिसमें 198 महिलाओं ने परीक्षा पास की है। परीक्षा पास कर चुकी महिलाओं को जल्द ही तैनाती दे दी जाएगी।
दसवीं पास होना जरूरी, 50 से कम होनी चाहिए उम्र
बैंक सखी बनने के लिए महिलाओं को दसवीं पास होना अनिवार्य है। साथ ही महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। महिला का स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना आवश्यक है, यदि महिला स्वयं सहायता से नहीं जुड़ी हो तो उनका पंजीकरण बाद में करवा दिया जाता है।
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मानदेय के साथ मिलेगा कमीशन
आरसेटी के अफसरों के अनुसार प्रशिक्षण पास करने के बाद बैंक सखी को शासन स्तर से ई-पॉस मशीन दी जाएगी। कार्य के एवज में प्रत्येक बीसी सखी को प्रोत्साहन राशि चार हजार के करीब दी जाएगी। साथ ही कमीशन भी दिया जाएगा। जिससे बीसी सखी की आजीविका चलती रहे।
प्रतिमाह महिलाओं को बैंक सखी बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण उपरांत टेस्ट पास करने पर प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। जिले की 198 महिलाओं को जल्द ही तैनाती दे दी जाएगी। जो ई-पॉस मशीन की सहायता से अकाउंट खोलने, नकदी जमा करने और निकासी करने का कार्य करेंगी। - विजय गांधी, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक
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बुलंदशहर। जनपद की 946 ग्राम पंचायतों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार ने एक ग्राम पंचायत एक बैंक सखी (बिजनेस कोरेस्पोंडेंट) योजना शुरू की है। बैंक मित्रों की तर्ज पर बैंक सखी पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर गांवों में लोगों को धन निकासी और जमा करने की सुविधा दे सकेंगी। योजना से महिला सशक्तीकरण को बल मिलने के साथ ही गांव के लोगों को भी नकदी जमा करने और निकलने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्राम्य विकास की ओर से एक ग्राम पंचायत एक बिजनेस कोरेस्पोंडेंट योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाना है। जिससे अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वरोजगार से जुड़ सकें। योजना के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं या फिर अन्य महिलाओं को चयनित कर उन्हें प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू किया जा चुका है। विभागीय अफसरों के अनुसार बैंक सखी को किसी कंपनी की फ्रेंचाइजी दी जाएगी। बैंक सखी उसके माध्यम से लेनदेन कराएंगी। आरसेटी के निदेशक पंकज शर्मा ने बताया कि हजरतपुर स्थित पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद परीक्षा होती है, जिसमें पास होने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र दिया जाता है। अब तक 200 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिसमें 198 महिलाओं ने परीक्षा पास की है। परीक्षा पास कर चुकी महिलाओं को जल्द ही तैनाती दे दी जाएगी।
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दसवीं पास होना जरूरी, 50 से कम होनी चाहिए उम्र
बैंक सखी बनने के लिए महिलाओं को दसवीं पास होना अनिवार्य है। साथ ही महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। महिला का स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना आवश्यक है, यदि महिला स्वयं सहायता से नहीं जुड़ी हो तो उनका पंजीकरण बाद में करवा दिया जाता है।
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मानदेय के साथ मिलेगा कमीशन
आरसेटी के अफसरों के अनुसार प्रशिक्षण पास करने के बाद बैंक सखी को शासन स्तर से ई-पॉस मशीन दी जाएगी। कार्य के एवज में प्रत्येक बीसी सखी को प्रोत्साहन राशि चार हजार के करीब दी जाएगी। साथ ही कमीशन भी दिया जाएगा। जिससे बीसी सखी की आजीविका चलती रहे।
प्रतिमाह महिलाओं को बैंक सखी बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण उपरांत टेस्ट पास करने पर प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। जिले की 198 महिलाओं को जल्द ही तैनाती दे दी जाएगी। जो ई-पॉस मशीन की सहायता से अकाउंट खोलने, नकदी जमा करने और निकासी करने का कार्य करेंगी। - विजय गांधी, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक