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पैरवी ना करने पर कृषि विभाग के हाथों से निकला खाद गोदाम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 10:57 PM IST
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agriculture godown
गोदाम में कब्जा लेने के लिए की गई तोड़फोड़। - फोटो : BULANDSHAHR
पैरवी ना करने पर कृषि विभाग के हाथों से निकला खाद गोदाम
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बुलंदशहर। कृषि विभाग के हाथों से पैरवी न होने के कारण खुर्जा स्थित 60 साल पुराना खाद का गोदाम निकलता नजर आ रहा है। विभाग के एक बाबू ने इसकी फाइल दबाए रखी और आलाधिकारियों को इस बाबत भनक तक नहीं लगने दी। इसका नतीजा यह रहा कि अदालत ने वादी के हक में फैसला सुना दिया। वादी ने कोर्ट का फैसला आने के बाद गोदाम पर अपना कब्जा भी कर लिया। अब कृषि विभाग के अफसर दोबारा कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं।
खुर्जा की नेहरूपुर चुंगी के पास राजकीय बीज भंडार और खाद गोदाम है। बृहस्पतिवार को खुर्जा निवासी अनुराग पालीवाल कोर्ट का आदेश और पुलिस लेकर गोदाम पर पहुंचे। जहां मजदूरों ने सरकारी भवन में तोड़फोड़ की। गोदाम के तमाम दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दी गई। मामले की सूचना पाते ही जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया और अन्य स्टॉफ मौके पर पहुंचे। जहां अनुराग ने कोर्ट का आदेश दिखाकर गोदाम की जमीन अपने होने का दावा किया। इसके बाद टीम बैरंग लौट गई। बताया गया कि कृषि विभाग के एक बाबू ने अधिकारियों को इस मुकदमे की फाइल संज्ञान में नहीं डाली। 1988 से जारी मुकदमा 1990 में खारिज हो गया था। 1990 में वादी ने दूसरी अपील की। 2015 में कृषि विभाग द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर आवेदन रिकॉल हुआ। 2017 से कृषि विभाग की फाइल को दबा दिया गया। इसी दौरान कोर्ट ने वादी अनुराग पालीवाल के पक्ष में फैसला सुना दिया।
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यह है पूरा मामला
खुर्जा में नेहरूपुर में दो हजार गज से अधिक जमीन पर 1960 में राजकीय कृषि बीज भंडार और खाद गोदाम के भवन का निर्माण कराया गया। 1988 में दुर्गा प्रसाद ने राज्य सरकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया और जमीन पर अपना अधिकार बताया। कुछ दिनों बाद दुर्गा प्रसाद की मौत हो गई। इसके बाद इनके बेटे शिवचरण पालीवाल ने केस लड़ा। इनकी भी मौत होने पर उनके बेटे अनुराग पालीवाल कोर्ट गए। दो वर्ष पूर्व इन्होंने हाईकोर्ट से मुकदमा जीतने की बात कही है। दावा किया कि जमीन इनके दादा के नाम पर थी।
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यह मामला वर्षों से कोर्ट में विचाराधीन था। मेरी हाल ही में तैनाती हुई है। मुझेे इस मामले की जानकारी किसी अधिकारी और कर्मचारी ने नहीं दी। पैरवी न होने के कारण फैसला हमारे अधिकार में नहीं आया। हम फिर कोर्ट जाएंगे। - राहुल तेवतिया, जिला कृषि अधिकारी।
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