{"_id":"110-40780","slug":"Bulandshahr-40780-110","type":"story","status":"publish","title_hn":"जगमगाहट झालरों से मगर लक्ष्मी जी का स्वागत दीयों से ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जगमगाहट झालरों से मगर लक्ष्मी जी का स्वागत दीयों से
Bulandshahr
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
बुलंदशहर। महंगाई के इस दौर में जहां लोग सस्ते से सस्ता विकल्प ढूंढ़ते हैं वहीं बात जब आस्था और परंपरा की आती है तो कोई समझौता नहीं करते। दिवाली पर घर की जगमगाहट तो झालरों से करेंगे लेकिन लक्ष्मी जी का स्वागत दीयों से करने की योजना बनाई है। इसीलिए दीये, मिट्टी की मूर्तियां, रंगोली, बंदनवार सभी परंपरागत चीजों की ही डिमांड अधिक है। दिवाली पर घी या तेल वाले मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा है। सस्ती चाइनीज लाइट्स होने के बावजूद भी लोग मिट्टी के विभिन्न प्रकार के दीये खरीदते हैं। सामान्य मिट्टी के दीये जहां एक रुपये में एक मिलते हैं वहीं टेराकोटा के दीये 20 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के मिल रहे हैं। लक्ष्मी-गणेश,शुभ लाभ बने हुए सामान्य और हैंगिंग दीयों के अलावा पंचमुखी दीया, पांच दीयों का समूह, हैंगिंग दीया इन सभी की खरीदारी जोरों पर है। टेराकोटा और मिट्टी के दीये और मिट्टी की मूर्तियां बेचने वाले चंदनराज ने बताया कि पिछले 15 सालों से दुकान लगाते हैं, मिट्टी की मूर्तियों की आज भी मांग हैं।
इस बार बुलंदशर में मनाई जाएगी ईको फ्रेंडली दिवाली
बुलंदशहर। दिवाली खुशियों का त्यौहार है। इस दिन घरों को सजाने में कमी नहीं छोड़ी जाती और रात में मंदिरों, घरों, दुकानों, आफिसों और प्रतिष्ठानों को रोशनी से जगमग किया जाता है, लेकिन पटाखे चलाने से निकलने वाली अधिक आवाज और धुआं से प्रदूषण बढ़ता है। समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् राजेंद्र पथिक ने जिले की जनता से दीपावली पर पटाखे न जलाने की अपील की है। उनका कहना है कि पटाखे जलाने से ध्वनि और धुंआ से प्रदूषण बढ़ता है। पर्यावरण को बचाने के लिए पटाखों से परहेज करना होगा और छोटे बच्चों को आतिशबाजी से दूर रखें। यदि बच्चे नहीं मानते तो उन्हें छोटे और ऐसी आतिशबाजी लाकर दें, जिनमें आवाज कम हो और धुआं भी ना निकले।
विज्ञापन
इस बार बुलंदशर में मनाई जाएगी ईको फ्रेंडली दिवाली
बुलंदशहर। दिवाली खुशियों का त्यौहार है। इस दिन घरों को सजाने में कमी नहीं छोड़ी जाती और रात में मंदिरों, घरों, दुकानों, आफिसों और प्रतिष्ठानों को रोशनी से जगमग किया जाता है, लेकिन पटाखे चलाने से निकलने वाली अधिक आवाज और धुआं से प्रदूषण बढ़ता है। समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् राजेंद्र पथिक ने जिले की जनता से दीपावली पर पटाखे न जलाने की अपील की है। उनका कहना है कि पटाखे जलाने से ध्वनि और धुंआ से प्रदूषण बढ़ता है। पर्यावरण को बचाने के लिए पटाखों से परहेज करना होगा और छोटे बच्चों को आतिशबाजी से दूर रखें। यदि बच्चे नहीं मानते तो उन्हें छोटे और ऐसी आतिशबाजी लाकर दें, जिनमें आवाज कम हो और धुआं भी ना निकले।
विज्ञापन