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को-पायलट के साथ धोखाधड़ी में फंसे विजय माल्या
Bulandshahr
Updated Wed, 17 Sep 2014 05:32 AM IST
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बुलंदशहर। देश के जाने माने उद्योगपति और किंगफिशर एयरलाइंस के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर विजय माल्या और कंपनी के सीईओ पर एयरलाइंस के एक को-पायलट ने धोखाधड़ी और लाखों रुपये के भुगतान न करने का आरोप लगाया है। को-पायलट आकाश शर्मा की शिकायत पर माल्या और कंपनी सीईओ के खिलाफ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में आपराधिक परिवाद दर्ज किया है। अदालत ने धारा 406/420 के तहत आपराधिक परिवाद दर्ज कर छह अक्तूबर को दोनों को हाजिर होने का आदेश दिया है। आदेश की प्रति पुुलिस अधीक्षक बंगलूरू को भेज दी गयी है।
एसीजेएम प्रथम उमाकांत जिंदल की अदालत से यह आदेश छह सितंबर को जारी किया गया है। आकाश शर्मा की तरफ से डाले गए परिवाद में कहा गया था कि फरवरी 2006 में उसने डेक्कन एविएशन कंपनी में बतौर को-पायलट नौकरी शुरू की थी। बाद में डेक्कन एविएशन को किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड ने टेकओवर कर लिया। कंपनी की वाइस चेयरमैन रूपी आर्या ने अपने हस्ताक्षरयुक्त वेतन और भत्तों आदि के विवरण का ईमेल भी भेजा। लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अक्तूबर 2012 में किंगफिशर की उड़ान पर रोक लगा दी। इसके बाद कंपनी ने भरोसा दिया कि वह ख्यातिप्राप्त कंपनी है। अफवाहों पर ध्यान न दें। विदेशी कंपनी से बात चल रही है। जल्द समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। लेकिन कंपनी ने उसका काटा गया टीडीएस, वेतन और फंड आदि का भुगतान नहीं किया। परिवाद में आरोप लगाया कि कंपनी पर उनका 28 लाख 47 हजार 936 का देय हैं।
इसलिए कंपनी के चेयरमैन और सीईओ के खिलाफ वाद दर्ज कर कार्रवाई की जाए। इस मामले में अदालत ने आकाश शर्मा और उनके अधिवक्ता की तरफ से पेश किए सबूतों को पर्याप्त मानते हुए आपराधिक वाद दर्ज करने के योग्य माना है। साथ ही आदेश दिए हैं कि छह अक्तूबर को प्रतिवादी कोर्ट में पेश हो।
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बढ़ सकती है परेशानी
फिलहाल आर्थिक संकट से जुझ रहे विजय माल्या की मुश्किल इस परिवाद दर्ज होने के बाद बढ़ सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि आकाश शर्मा जैसे कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अपने बकाया हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। आकाश शर्मा का कहना है कि काफी कर्मचारियों का बकाया कंपनी की तरफ है। इससे माल्या का कानूनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
कोट्स
किंगफिशर के चेयरमैन विजय माल्या और सीईओ संजय अग्रवाल के खिलाफ को-पायलट आकाश शर्मा की शिकायत पर धारा 406/420 आईपीसी के तहत आपराधिक वाद दर्ज किया गया है। दोनों को छह अक्तूबर को कोर्ट ने हाजिर होने के आदेश दिए हैं। -राजेंद्र प्रसाद शर्मा, आकाश के एडवोकेट
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एसीजेएम प्रथम उमाकांत जिंदल की अदालत से यह आदेश छह सितंबर को जारी किया गया है। आकाश शर्मा की तरफ से डाले गए परिवाद में कहा गया था कि फरवरी 2006 में उसने डेक्कन एविएशन कंपनी में बतौर को-पायलट नौकरी शुरू की थी। बाद में डेक्कन एविएशन को किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड ने टेकओवर कर लिया। कंपनी की वाइस चेयरमैन रूपी आर्या ने अपने हस्ताक्षरयुक्त वेतन और भत्तों आदि के विवरण का ईमेल भी भेजा। लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अक्तूबर 2012 में किंगफिशर की उड़ान पर रोक लगा दी। इसके बाद कंपनी ने भरोसा दिया कि वह ख्यातिप्राप्त कंपनी है। अफवाहों पर ध्यान न दें। विदेशी कंपनी से बात चल रही है। जल्द समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। लेकिन कंपनी ने उसका काटा गया टीडीएस, वेतन और फंड आदि का भुगतान नहीं किया। परिवाद में आरोप लगाया कि कंपनी पर उनका 28 लाख 47 हजार 936 का देय हैं।
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इसलिए कंपनी के चेयरमैन और सीईओ के खिलाफ वाद दर्ज कर कार्रवाई की जाए। इस मामले में अदालत ने आकाश शर्मा और उनके अधिवक्ता की तरफ से पेश किए सबूतों को पर्याप्त मानते हुए आपराधिक वाद दर्ज करने के योग्य माना है। साथ ही आदेश दिए हैं कि छह अक्तूबर को प्रतिवादी कोर्ट में पेश हो।
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बढ़ सकती है परेशानी
फिलहाल आर्थिक संकट से जुझ रहे विजय माल्या की मुश्किल इस परिवाद दर्ज होने के बाद बढ़ सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि आकाश शर्मा जैसे कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अपने बकाया हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। आकाश शर्मा का कहना है कि काफी कर्मचारियों का बकाया कंपनी की तरफ है। इससे माल्या का कानूनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
कोट्स
किंगफिशर के चेयरमैन विजय माल्या और सीईओ संजय अग्रवाल के खिलाफ को-पायलट आकाश शर्मा की शिकायत पर धारा 406/420 आईपीसी के तहत आपराधिक वाद दर्ज किया गया है। दोनों को छह अक्तूबर को कोर्ट ने हाजिर होने के आदेश दिए हैं। -राजेंद्र प्रसाद शर्मा, आकाश के एडवोकेट