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Bulandshahar News: काली नदी के किनारे बसे गांवों में दूषित पानी पी रहे 60 हजार लोग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jul 2023 10:21 PM IST
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60 thousand people drinking contaminated water in villages situated on the banks of Kali river
काली नदी का फोटो।
बुलंदशहर/पहासू। काली नदी के किनारे बसे गांवों में लोगों को पीने और सिंचाई के लिए गंदा पानी मिल रहा है। दूषित पानी के कारण लोग लीवर, किडनी के इंफेक्शन जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। लोगों को समस्या से निजात दिलाने के लिए न तो पानी की टंकी चालू की गई है और न ही काली नदी अभी तक साफ हो पाई है। 25 से अधिक गांवों के करीब 60 हजार से अधिक लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
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जिले में काली नदी करीब 110 किमी का सफर तय करती है। इस दौरान यह 80 से अधिक गांवों से गुजरती है। विभिन्न गांव, शहर और कस्बों से होकर गुजरने के दौरान इसमें बड़ी संख्या में नालों का गंदा पानी डाला जाता है, जिसके चलते अब काली नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। काली के प्रदूषित होने के कारण अब भूगर्भ जल भी दूूषित होने लगा है। 25 से अधिक गांवों के 60 हजार से अधिक लोगों के जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पहासू और छतारी क्षेत्र में जमीन से निकलने वाला दूषित पानी कैंसर, किडनी और लीवर इंफेक्शन जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बन रहा है। इसके अलावा 500 से अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्हें किडनी इंफेक्शन, पथरी, आंतों में इन्फेक्शन समेत गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि काली नदी के कारण जमीन से निकलने वाला पानी पीने लायक नहीं बचा है। करीब छह साल पहले केन्द्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार इस नदी के पानी में अत्यधिक मात्रा में सीसी, मैग्नीज और लोहा जैसे भारी तत्व मिले थे। जबकि नदी के पानी में आक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई थी, जिससे नदी में जलीय जीव जीवित नहीं रह पाते हैं।
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20 लोगों की कैंसर से हुई मौत
पिछले एक दशक में इन क्षेत्रों में 20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। काली नदी के किनारे बसे गांव अजीबाबाद निवासी छत्रपाल, श्रीपाल, राकेश, सोमदत्त, नवाब, सुशीला, सुरेश, सुरजावली गांव निवासी सत्यवती, बांकेलाल, छीतर, हरेन्द्र, भगवानी, गांव अमरपुर निवासी वीर सिंह, मुख्तयारी, हरिओम, रविन्द्र, विजयपाल, प्रेमपाल, गांव नगला सारंगपुर निवासी सूरजपाल, बदरखा निवासी रनवीर समेत 20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है।
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बार-बार बनीं योजनाएं, पर नहीं हुआ समाधान
काली नदी को साफ करने के लिए बार-बार अधिकारियों की ओर से योजनाएं बनाई गईं लेकिन इसका कोई फायदा धरातल पर नहीं दिखा। स्थिति यह है कि आठ साल पहले काली में गिरने वाले गंदे नालों को भी बंद करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए लेकिन इसके नाम पर खानापूर्ति कर ली गई और काली नदी के हालत और बिगड़ते गए।


बोले लोग
जमीन के अंदर से निकलने वाले पानी से भी बदबू आती है। लोगों के पास हैंडपंप का पानी पीने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। - मलखान सिंह, पहासू



नदी के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को परेशानी होती है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। अधिकारी केवल कागजों में काम करते हैं। - रोहित कौशिक, पहासू



दूषित पानी के कारण लोग कैंसर, लीवर और किडनी की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। फसल भी खराब हो रही है लेकिन किसानों की समस्या का समाधान नहीं है। - जगनेश चौधरी, गांव नगला सारंगपुर



काली के किनारे बसे कुछ गांवों में कैंसर से लोगों की मौत हुई थी, इसके बाद काली नदी के पानी की सैंपलिंग कराई गई थी, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। - जगनेश कुमार, गांव उर्दमी






काली नदी को साफ करने के लिए कार्य किया जा रहा है। योजना के तहत काली के पानी की जांच के लिए टीम का गठन किया गया है। जल्द ही नमामि गंगे अभियान के तहत काली को साफ और कब्जा मुक्त करते हुए नदी के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। - कुलदीप मीना, सीडीओ
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