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ई-रिक्शा और ऑटो बन रहे स्कूली वाहन
Updated Sat, 15 Dec 2018 12:23 AM IST
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ई-रिक्शा और ऑटो बन रहे स्कूली वाहन
बुलंदशहर। जिले में ई-रिक्शा और ऑटो अपंजीकृत स्कूलों के साथ पंजीकृत स्कूलों के स्कूली वाहन बन रहे है। इनका न तो स्कूली वाहन के रुप में रजिस्ट्रेशन है और न ही इन्हें बच्चों की सुरक्षा का ख्याल है। वहीं, परिवहन के साथ पुलिस विभाग के अफसर जानकर भी मामले से अंजान बने हैं।
जिले में करीब 500 स्कूलों में स्कूली वाहनों द्वारा छात्रों को लाने और ले जाने का काम किया जा रहा है। जबकि परिवहन विभाग में करीब 100 स्कूलों ने ही स्कूली वाहनों को पंजीकृत कराया है। स्कूली वाहनों का प्रयोग पंजीकृत स्कूलों के साथ-साथ अपंजीकृत स्कूलों में भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। वहीं, 10-15 साल से पुराने वाहनों के अलावा गैस कीट लगे वाहनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। इस संबंध में एआरटीओ प्रर्वतन से संपर्क करना चाहा तो उनका सीयूजी नंबर रिसीव नहीं हो सका। वहीं, एआरटीओ प्रशासन मुहम्मद कय्यूम ने बताया कि असुरक्षित एवं डग्गामार वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों के खिलाफ एआरटीओ प्रर्वतन द्वारा कार्रवाई करने का प्रावधान है। बताया कि कुछ अभिभावकों द्वारा स्कूली वाहनों की महंगी फीस से बचने के लिए अपने बच्चों के लिए खुद ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा की व्यवस्था की गई है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को सुरक्षित वाहनों की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही बताया कि स्कूली वाहनों को फिटनेस पास करने के बाद भी संचालन करवाया जा रहा है, जिसकी जांच की जा रही है।
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बुलंदशहर। जिले में ई-रिक्शा और ऑटो अपंजीकृत स्कूलों के साथ पंजीकृत स्कूलों के स्कूली वाहन बन रहे है। इनका न तो स्कूली वाहन के रुप में रजिस्ट्रेशन है और न ही इन्हें बच्चों की सुरक्षा का ख्याल है। वहीं, परिवहन के साथ पुलिस विभाग के अफसर जानकर भी मामले से अंजान बने हैं।
जिले में करीब 500 स्कूलों में स्कूली वाहनों द्वारा छात्रों को लाने और ले जाने का काम किया जा रहा है। जबकि परिवहन विभाग में करीब 100 स्कूलों ने ही स्कूली वाहनों को पंजीकृत कराया है। स्कूली वाहनों का प्रयोग पंजीकृत स्कूलों के साथ-साथ अपंजीकृत स्कूलों में भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। वहीं, 10-15 साल से पुराने वाहनों के अलावा गैस कीट लगे वाहनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। इस संबंध में एआरटीओ प्रर्वतन से संपर्क करना चाहा तो उनका सीयूजी नंबर रिसीव नहीं हो सका। वहीं, एआरटीओ प्रशासन मुहम्मद कय्यूम ने बताया कि असुरक्षित एवं डग्गामार वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों के खिलाफ एआरटीओ प्रर्वतन द्वारा कार्रवाई करने का प्रावधान है। बताया कि कुछ अभिभावकों द्वारा स्कूली वाहनों की महंगी फीस से बचने के लिए अपने बच्चों के लिए खुद ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा की व्यवस्था की गई है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को सुरक्षित वाहनों की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही बताया कि स्कूली वाहनों को फिटनेस पास करने के बाद भी संचालन करवाया जा रहा है, जिसकी जांच की जा रही है।
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