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सिर्फ हवा में तैर रहे ओडीएफ के दावे, लोटा परेड जारी
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:13 AM IST
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सिर्फ हवा में तैर रहे ओडीएफ के दावे, लोटा परेड जारी
बुलंदशहर। दो अक्टूबर नजदीक आ गया, लेकिन अभी शौचालय निर्माण जारी है। जिले के लगभग सभी गांवों में अभी भी कई-कई घर शौचालय विहीन हैं। साथ ही लोटा परेड भी जारी है। वहीं, अभी तक राशि लेकर शौचालय न बनवाने वालों पर अभी कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) को लेकर किए जा रहे दावे हवा में तैरते दिखाई दे रहे हैं। इसकी सच्चाई का पता कई गांवों का दौरा करने पर ग्रामीणों ने किया है।
सरकार ने पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान शहरी व ग्रामीण योजना की शुरूआत की है। इस योजना की शुरूआत वर्ष 2014 में हुई थी और उस समय वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 2.65 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिले में शौचालय निर्माण का काम भी समय पर शुरू हो गया था, लेकिन इसके साथ ही समय-समय पर अफसर और ग्राम प्रधानों पर अवैध वसूली आदि अनियमितताएं बरतने के आरोप लगते रहे। गांवों में अपात्रों के घर शौचालय बनाने और पुराने शौचालयों को नया दिखाने के मामले भी उजागर होते रहे। अब जाकर जब सरकार की ओर से दो अक्टूबर तक जिले को ओडीएफ करने का आदेश मिला तो जिले में शौचालय निर्माण के काम ने तेजी पकड़ी। हालांकि अफसर दावे कर रहे हैं कि समय से पहले जिले को ओडीएफ कर दिया जाएगा और पांच हजार और शौचालय बनाए जाने शेष रह गए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जो गांव पिछले वर्षों में ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। उनमें भी अभी तक पूरे शौचालय नहीं बन पाए हैं। राशि लेकर शौचालय भी नहीं बनवाए गए। ऐसे लोगों पर अभी तक कार्रवाई भी नहीं हो पाई है।
वहीं ओडीएफ हो चुके गांव ईसापुर के ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक उनका न तो शौचालय बना है और न ही राशि मिली है। गांव भैंसरौली के पिंटू आदि ने बताया कि अभी उनके शौचालय राशि पूरी नहीं मिलने पर बीच में अटके हुए हैं। इसी तरह की शिकायत गांव रसूलपुर, हुर्थला, नयाबांस, मिर्जापुर, नयागांव, जसनावली खुर्द आदि के ग्रामीणों ने की है।
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एक ग्राम सचिव के पास है छह से आठ गांव, नहीं बन पा रही योजनाएं
- जिले के ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लक्ष्य को समय पर पूरा करने के पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। रोजाना बनने वाले शौचालय की विकास भवन में बने कंट्रोल रूम में रिपोर्ट एकत्रित की जा रही है। प्रदेश के दूसरे जिले के अलावा मध्यप्रदेश से भी शौचालय निर्माण को मजदूर बुलाए गए हैं, लेकिन एक ग्राम सचिव के पास छह से आठ गांव तक की जिम्मेदारी है। जिसके चलते योजनाएं भी नहीं बन पा रही हैं। जिले की 951 ग्राम पंचायतों पर 167 ग्राम सचिव तैनात हैं, 52 ग्राम सचिवों के पद पिछले काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। एक ग्राम सचिव पर कई-कई गांव होने के कारण वह सभी गांवों में नहीं पहुंच रहे।
कोट
जिले को समय से पहले ओडीएफ करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां भी कोई कमी है, उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम प्रधान और सचिवों को इस कार्य में शिथिलता न बरतने के आदेश भी समय-समय पर दिए जा रहे हैं। शौचायल निर्माण की स्थिति की पूरी जानकारी रोजाना जिला प्रशासन के साथ शासन को भेजी जा रही है। - अमरजीत सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी।
दौलतगढ़ में डीएम की खुली बैठक में भी खुला शौाचलय का सच
बुलंदशहर। डीएम अनुज कुमार झा बृहस्पतिवार को गांव दौलतगढ़ पहुंचे और प्राथमिक स्कूल में ग्रामीणों की खुली बैठक ली। उन्होंने ग्रामीणों से शौचालय निर्माण की जानकारी ली और निरीक्षण भी किया। इस दौरान बताया गया कि गांव में 204 के सापेक्ष 184 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। 33 शौचालयों की अभी रंगाई-पुताई नहीं हुई। आठ शौचालय का निर्माण कार्य जारी है और 14 शौचालय का निर्माण शेष रहा है। शौचालय निर्माण का सच उस समय खुल गया, जब डीएम के समक्ष लोगों ने बताया कि अभी तक नौ ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण के लिए गड्डे भी नहीं खुदवाए हैं। कुल मिलाकर गांव में शौचालय निर्माण का कार्य अपूर्ण पाया गया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और डीपीआरओ को जल्द शौचालय निर्माण करवाने के आदेश ए।ि उनके साथ डीडीओ आशुतोष दूबे, डीपीआरओ अमरजीत तिसंह ओर ग्राम प्रधान दिनेश कुमार आदि ग्रामीण शामिल रहे। डीएम अनुज कुमार झा ने थैलीसिमिया पीड़िता शिवानी और उसके पिता मनवीर से भी मुलाकात की। साथ ही उनको मदद का आश्वासन देने के साथ कैंप कार्यालय पर आने का न्यौता दिया।
प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाकर किया प्रदर्शन
ऊंचागांव। क्षेत्र के गांव थाना गजरौला में शौचालय लाभार्थियों ने ग्राम प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। साथ ही उनका यह भी आरोप है कि शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री के प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रधान का धेराव कर खरी-खोटी भी सुनाई। लाभार्थी सोनम, सुमन्त्रा, शीला, सुमन, रूपवती, अनारों देवी, राजकुमारी, जयवंती, रामेश्वरी देवी आदि ने आरोप लगाया कि शौचालय निर्माण में पीली ईंट लगाने के साथ कम सीमेंट का प्रयोग कियया जा रहा है। इसका विरोध करने पर ठेकेदार कहता है कि ऊपर से इतना ही सीमेंट मिलता है। शौचालय का निर्माण पूरा होने के बाद भी मसाला अभी तक सेट नहीं हो पाया है। वहीं, ग्राम प्रधान दबंगी दिखा रहा है और शिकायत करने पर धमकाने लगता है। प्रदर्शन में मथुरा देवी, आशा देवी, सोना देवी, राकेश देवी, पिन्टू लोधी, सुरेश, किरनपाल, धर्मवीर, निगम, रनवीर आदि सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे है। उधर एडीओ पंचायत कांती प्रसाद का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करवाई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
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बुलंदशहर। दो अक्टूबर नजदीक आ गया, लेकिन अभी शौचालय निर्माण जारी है। जिले के लगभग सभी गांवों में अभी भी कई-कई घर शौचालय विहीन हैं। साथ ही लोटा परेड भी जारी है। वहीं, अभी तक राशि लेकर शौचालय न बनवाने वालों पर अभी कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) को लेकर किए जा रहे दावे हवा में तैरते दिखाई दे रहे हैं। इसकी सच्चाई का पता कई गांवों का दौरा करने पर ग्रामीणों ने किया है।
सरकार ने पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान शहरी व ग्रामीण योजना की शुरूआत की है। इस योजना की शुरूआत वर्ष 2014 में हुई थी और उस समय वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 2.65 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिले में शौचालय निर्माण का काम भी समय पर शुरू हो गया था, लेकिन इसके साथ ही समय-समय पर अफसर और ग्राम प्रधानों पर अवैध वसूली आदि अनियमितताएं बरतने के आरोप लगते रहे। गांवों में अपात्रों के घर शौचालय बनाने और पुराने शौचालयों को नया दिखाने के मामले भी उजागर होते रहे। अब जाकर जब सरकार की ओर से दो अक्टूबर तक जिले को ओडीएफ करने का आदेश मिला तो जिले में शौचालय निर्माण के काम ने तेजी पकड़ी। हालांकि अफसर दावे कर रहे हैं कि समय से पहले जिले को ओडीएफ कर दिया जाएगा और पांच हजार और शौचालय बनाए जाने शेष रह गए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जो गांव पिछले वर्षों में ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। उनमें भी अभी तक पूरे शौचालय नहीं बन पाए हैं। राशि लेकर शौचालय भी नहीं बनवाए गए। ऐसे लोगों पर अभी तक कार्रवाई भी नहीं हो पाई है।
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वहीं ओडीएफ हो चुके गांव ईसापुर के ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक उनका न तो शौचालय बना है और न ही राशि मिली है। गांव भैंसरौली के पिंटू आदि ने बताया कि अभी उनके शौचालय राशि पूरी नहीं मिलने पर बीच में अटके हुए हैं। इसी तरह की शिकायत गांव रसूलपुर, हुर्थला, नयाबांस, मिर्जापुर, नयागांव, जसनावली खुर्द आदि के ग्रामीणों ने की है।
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एक ग्राम सचिव के पास है छह से आठ गांव, नहीं बन पा रही योजनाएं
- जिले के ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लक्ष्य को समय पर पूरा करने के पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। रोजाना बनने वाले शौचालय की विकास भवन में बने कंट्रोल रूम में रिपोर्ट एकत्रित की जा रही है। प्रदेश के दूसरे जिले के अलावा मध्यप्रदेश से भी शौचालय निर्माण को मजदूर बुलाए गए हैं, लेकिन एक ग्राम सचिव के पास छह से आठ गांव तक की जिम्मेदारी है। जिसके चलते योजनाएं भी नहीं बन पा रही हैं। जिले की 951 ग्राम पंचायतों पर 167 ग्राम सचिव तैनात हैं, 52 ग्राम सचिवों के पद पिछले काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। एक ग्राम सचिव पर कई-कई गांव होने के कारण वह सभी गांवों में नहीं पहुंच रहे।
कोट
जिले को समय से पहले ओडीएफ करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां भी कोई कमी है, उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम प्रधान और सचिवों को इस कार्य में शिथिलता न बरतने के आदेश भी समय-समय पर दिए जा रहे हैं। शौचायल निर्माण की स्थिति की पूरी जानकारी रोजाना जिला प्रशासन के साथ शासन को भेजी जा रही है। - अमरजीत सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी।
दौलतगढ़ में डीएम की खुली बैठक में भी खुला शौाचलय का सच
बुलंदशहर। डीएम अनुज कुमार झा बृहस्पतिवार को गांव दौलतगढ़ पहुंचे और प्राथमिक स्कूल में ग्रामीणों की खुली बैठक ली। उन्होंने ग्रामीणों से शौचालय निर्माण की जानकारी ली और निरीक्षण भी किया। इस दौरान बताया गया कि गांव में 204 के सापेक्ष 184 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। 33 शौचालयों की अभी रंगाई-पुताई नहीं हुई। आठ शौचालय का निर्माण कार्य जारी है और 14 शौचालय का निर्माण शेष रहा है। शौचालय निर्माण का सच उस समय खुल गया, जब डीएम के समक्ष लोगों ने बताया कि अभी तक नौ ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण के लिए गड्डे भी नहीं खुदवाए हैं। कुल मिलाकर गांव में शौचालय निर्माण का कार्य अपूर्ण पाया गया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और डीपीआरओ को जल्द शौचालय निर्माण करवाने के आदेश ए।ि उनके साथ डीडीओ आशुतोष दूबे, डीपीआरओ अमरजीत तिसंह ओर ग्राम प्रधान दिनेश कुमार आदि ग्रामीण शामिल रहे। डीएम अनुज कुमार झा ने थैलीसिमिया पीड़िता शिवानी और उसके पिता मनवीर से भी मुलाकात की। साथ ही उनको मदद का आश्वासन देने के साथ कैंप कार्यालय पर आने का न्यौता दिया।
प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाकर किया प्रदर्शन
ऊंचागांव। क्षेत्र के गांव थाना गजरौला में शौचालय लाभार्थियों ने ग्राम प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। साथ ही उनका यह भी आरोप है कि शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री के प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रधान का धेराव कर खरी-खोटी भी सुनाई। लाभार्थी सोनम, सुमन्त्रा, शीला, सुमन, रूपवती, अनारों देवी, राजकुमारी, जयवंती, रामेश्वरी देवी आदि ने आरोप लगाया कि शौचालय निर्माण में पीली ईंट लगाने के साथ कम सीमेंट का प्रयोग कियया जा रहा है। इसका विरोध करने पर ठेकेदार कहता है कि ऊपर से इतना ही सीमेंट मिलता है। शौचालय का निर्माण पूरा होने के बाद भी मसाला अभी तक सेट नहीं हो पाया है। वहीं, ग्राम प्रधान दबंगी दिखा रहा है और शिकायत करने पर धमकाने लगता है। प्रदर्शन में मथुरा देवी, आशा देवी, सोना देवी, राकेश देवी, पिन्टू लोधी, सुरेश, किरनपाल, धर्मवीर, निगम, रनवीर आदि सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे है। उधर एडीओ पंचायत कांती प्रसाद का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करवाई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी।