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बहन और भाइयों को जेल खींच लाया प्यार
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:49 AM IST
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बहन और भाइयों को जेल खींच लाया प्यार
बुलंदशहर। रक्षाबंधन के मौके पर भाइयों के प्यार ने बहनों को जेल तक खींच लाया। कोई बहन जेल में बंद अपने भाई को राखी बांधने से वंचित न रह जाए इसके लिए जेल प्रशासन की ओर से सुबह से ही मुलाकात कराना शुरू कर दिया गया था। जेल परिसर में बंद अपने भाइयों की कलाई पर बहनों ने राखी बांध मिठाई खिलाई। इस दौरान जेल प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे।
बुलंदशहर कारागार में करीब 2000 पुरुष और 70 महिला बंदी बंद हैं। कोई पुरुष अपनी बहन से और कोई महिला अपने भाई के प्यार से वंचित न रह जाए इसके लिए जेल प्रशासन ने खास इंतजाम किए थे। रविवार को जेल परिसर में राखी बांधने पहुंचने वाली बहनों के लिए कोई पाबंदी नहीं लगाई गई। बंदी भाइयों को जेल परिसर के खुले मैदान में लाइनवार बैठा दिया गया। उसके बाद सामने बैठकर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान एक-दूसरे को देखकर भाई-बहन की आंखे भर आईं। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने बताया कि रविवार को किसी भी महिला को भाई से मिलने से नहीं रोका गया। बहनों के साथ पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन भी अपनों से मिलने के लिए जेल पहुंचे। सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे के बाद तक भी राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा। शाम तक 1700 से अधिक बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधी।
पहले बहन को खानी पड़ी मिठाई
जेल परिसर में बाहर से निर्मित खाद्य पदार्थ ले जाना वर्जित है, लेकिन रक्षा बंधन के दिन बाहर से निर्मित मिठाई तो ले जाने की छूट है, लेकिन उसमें से पहले कोई पीस बहन को खुद खाकर दिखाना पड़ा कि इसमें कुछ भी गड़बड़ नहीं है।
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65 महिला कैदियों का नहीं मना त्योहार
कारागार में 70 महिलाएं भी बंद हैं। सभी को रक्षाबंधन की खुशी थी कि उनका भाई उनसे राखी बंधवाने आएग। इसके बावजूद 65 महिला कैदियों के परिजनों में से कोई भी उनसे मुलाकात के लिए नहीं पहुंच सका। भाइयों के जेल में मिलने के लिए न आने से कैदी महिला त्योहार मनाने से वंचित रह गई।
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बुलंदशहर। रक्षाबंधन के मौके पर भाइयों के प्यार ने बहनों को जेल तक खींच लाया। कोई बहन जेल में बंद अपने भाई को राखी बांधने से वंचित न रह जाए इसके लिए जेल प्रशासन की ओर से सुबह से ही मुलाकात कराना शुरू कर दिया गया था। जेल परिसर में बंद अपने भाइयों की कलाई पर बहनों ने राखी बांध मिठाई खिलाई। इस दौरान जेल प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे।
बुलंदशहर कारागार में करीब 2000 पुरुष और 70 महिला बंदी बंद हैं। कोई पुरुष अपनी बहन से और कोई महिला अपने भाई के प्यार से वंचित न रह जाए इसके लिए जेल प्रशासन ने खास इंतजाम किए थे। रविवार को जेल परिसर में राखी बांधने पहुंचने वाली बहनों के लिए कोई पाबंदी नहीं लगाई गई। बंदी भाइयों को जेल परिसर के खुले मैदान में लाइनवार बैठा दिया गया। उसके बाद सामने बैठकर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान एक-दूसरे को देखकर भाई-बहन की आंखे भर आईं। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने बताया कि रविवार को किसी भी महिला को भाई से मिलने से नहीं रोका गया। बहनों के साथ पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन भी अपनों से मिलने के लिए जेल पहुंचे। सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे के बाद तक भी राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा। शाम तक 1700 से अधिक बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधी।
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पहले बहन को खानी पड़ी मिठाई
जेल परिसर में बाहर से निर्मित खाद्य पदार्थ ले जाना वर्जित है, लेकिन रक्षा बंधन के दिन बाहर से निर्मित मिठाई तो ले जाने की छूट है, लेकिन उसमें से पहले कोई पीस बहन को खुद खाकर दिखाना पड़ा कि इसमें कुछ भी गड़बड़ नहीं है।
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65 महिला कैदियों का नहीं मना त्योहार
कारागार में 70 महिलाएं भी बंद हैं। सभी को रक्षाबंधन की खुशी थी कि उनका भाई उनसे राखी बंधवाने आएग। इसके बावजूद 65 महिला कैदियों के परिजनों में से कोई भी उनसे मुलाकात के लिए नहीं पहुंच सका। भाइयों के जेल में मिलने के लिए न आने से कैदी महिला त्योहार मनाने से वंचित रह गई।