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अब त्रिस्तरीय जियो टैगिंग से रुकेगा मनरेगा का गड़बड़झाला
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:31 PM IST
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अब त्रिस्तरीय जियो टैगिंग से रुकेगी मनरेगा में गड़बड़ी
- व्यवस्था लागू, दो अलग एंगल से फोटो भी करने होंगे अपलोड
- नई व्यवस्था से अब एक कार्य की तीन बार होगी टैगिंग
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कामों में अब गड़बड़झाला नहीं होगा। इसे रोकने के लिए अब सभी कार्यों की त्रिस्तरीय जियो टैगिंग होगी। इसके साथ ही सबकुछ मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होगा। गड़बड़ी करने की कोशिश हुई तो पकड़ में आ जाएगी।
बता दें कि जियो टैगिंग यूं तो दो साल पहले शुरू हुई थी। अब एक कार्य की तीन बार टैगिंग होगी। संबंधित विभाग के कार्मचारियों के मोबाइल में भुवन एप डाउनलोड कराया गया है। ग्राम पंचायत स्तर से विकास कार्यों के जो प्रस्ताव भेजे जाते हैं, उनका चयन होने के बाद कार्मिक मौके पर जाकर एप में स्थल की कम से कम दो अलग-अलग एंगल से फोटो अपलोड करेंगे। इसके बाद ही कार्य का खाका जारी होगा। 30 से 60 फीसद तक काम पूरा होने पर दूसरे चरण की जियो टैगिंग होगी। अगर इसमें एक फीसदी भी कम या ज्यादा का अंतर आया तो साफ्टवेयर रिजेक्ट कर देगा। अंतिम जियो टैगिंग काम पूरा होने के बाद की जाएगी। इस व्यवस्था से गड़बड़ी नहीं हो पाएगी।
डीपीआर भी होगी अपलोड
भुवन एप मनरेगा के सॉफ्टवेयर से कनेक्ट है। इस सॉफ्टवेयर में कार्य की डीपीआर की विस्तृत जानकारी अपलोड होगी। बिना डीपीआर अपलोड किए काम शुरू करने की स्वीकृति नहीं मिलेगी। साथ ही मनरेगा कार्यों का इस्टीमेट अब बढ़ाया नहीं जा सकेगा। अब तक निर्माण सामग्री महंगाई और तमाम कारण बताते हुए इस्टीमेट बढ़ा लिया जाता था। कार्य पूर्ण होने के बाद अगर इस्टीमेट बढ़ाया गया तो सॉफ्टवेयर रिजेक्ट कर देगा। भुवन एप जीपीआरएस से लैस है। अगर किसी कर्मचारी ने कोई गड़बड़ी करने का प्रयास किया तो जीपीआरएस पोल खोल देगा। मसलन, मिलीभगत के चलते कार्यस्थल से इतर कहीं और की फोटो आदि अपलोड़ या जियो टैगिंग करने की कोशिश करना।
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कोट्स-----
मनरेगा के तहत होने वाले कार्यो की अब तीन बार जियो टैगिंग हो रही है। पहले सिर्फ एक बार हुआ कर करती थी। निश्चित रूप से इससे मनरेगा में कोई गड़बड़ी नहीं होगी। - सर्वेश चंद, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास विभाग, बुलंदशहर।
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- व्यवस्था लागू, दो अलग एंगल से फोटो भी करने होंगे अपलोड
- नई व्यवस्था से अब एक कार्य की तीन बार होगी टैगिंग
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कामों में अब गड़बड़झाला नहीं होगा। इसे रोकने के लिए अब सभी कार्यों की त्रिस्तरीय जियो टैगिंग होगी। इसके साथ ही सबकुछ मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होगा। गड़बड़ी करने की कोशिश हुई तो पकड़ में आ जाएगी।
बता दें कि जियो टैगिंग यूं तो दो साल पहले शुरू हुई थी। अब एक कार्य की तीन बार टैगिंग होगी। संबंधित विभाग के कार्मचारियों के मोबाइल में भुवन एप डाउनलोड कराया गया है। ग्राम पंचायत स्तर से विकास कार्यों के जो प्रस्ताव भेजे जाते हैं, उनका चयन होने के बाद कार्मिक मौके पर जाकर एप में स्थल की कम से कम दो अलग-अलग एंगल से फोटो अपलोड करेंगे। इसके बाद ही कार्य का खाका जारी होगा। 30 से 60 फीसद तक काम पूरा होने पर दूसरे चरण की जियो टैगिंग होगी। अगर इसमें एक फीसदी भी कम या ज्यादा का अंतर आया तो साफ्टवेयर रिजेक्ट कर देगा। अंतिम जियो टैगिंग काम पूरा होने के बाद की जाएगी। इस व्यवस्था से गड़बड़ी नहीं हो पाएगी।
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डीपीआर भी होगी अपलोड
भुवन एप मनरेगा के सॉफ्टवेयर से कनेक्ट है। इस सॉफ्टवेयर में कार्य की डीपीआर की विस्तृत जानकारी अपलोड होगी। बिना डीपीआर अपलोड किए काम शुरू करने की स्वीकृति नहीं मिलेगी। साथ ही मनरेगा कार्यों का इस्टीमेट अब बढ़ाया नहीं जा सकेगा। अब तक निर्माण सामग्री महंगाई और तमाम कारण बताते हुए इस्टीमेट बढ़ा लिया जाता था। कार्य पूर्ण होने के बाद अगर इस्टीमेट बढ़ाया गया तो सॉफ्टवेयर रिजेक्ट कर देगा। भुवन एप जीपीआरएस से लैस है। अगर किसी कर्मचारी ने कोई गड़बड़ी करने का प्रयास किया तो जीपीआरएस पोल खोल देगा। मसलन, मिलीभगत के चलते कार्यस्थल से इतर कहीं और की फोटो आदि अपलोड़ या जियो टैगिंग करने की कोशिश करना।
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कोट्स-----
मनरेगा के तहत होने वाले कार्यो की अब तीन बार जियो टैगिंग हो रही है। पहले सिर्फ एक बार हुआ कर करती थी। निश्चित रूप से इससे मनरेगा में कोई गड़बड़ी नहीं होगी। - सर्वेश चंद, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास विभाग, बुलंदशहर।