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परिवार नियोजन में महिलाओं ने पुरुषों को पछाड़ा
Updated Sat, 10 Feb 2018 10:47 PM IST
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परिवार नियोजन में महिलाओं ने पुरुषों को पछाड़ा
- 2017 में मात्र 26 पुरुषों ने कराई नसबंदी
- साल में 2498 महिलाओं ने कराई नसबंदी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। परिवार नियोजन की कमान महिलाओं के कंधे पर ही टिकी है। पुरुषों द्वारा अभियान में रुचि न लेने पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। योजना के तहत वर्ष 2017 में 2498 महिलाएं और 26 पुरुषोें ने नसबंदी कराई।
बढ़ती आबादी को रोकने के लिए परिवार नियोजन के लिए प्रत्येक वर्ष लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके बाद भी इसमें पुरुषों की भूमिका न के बराबर है। अब भी परिवार नियोजन की कमान सिर्फ महिलाओं ने ही संभाल रखी है। महिला सशक्तीकरण की बात करें तो हर स्थान पर कहा जाता है कि महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहीं है, लेकिन यहां तो महिलाएं पुरुषों से इतनी आगे निकल गई है कि पुरुषों को इनकी बराबरी कर पाना संभव नही दिख रहा है। अधिकारियों के अनुसार परिवार नियोजन के लिए परिवारों की ओर से अब कॉपर टी, निरोध, गर्भनिरोधक गोलियों के साथ अन्य प्रकार के उपायों को भी अपनाया जा रहा है। इससे भी नसबंदी के ग्राफ पर असर पड़ा है। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि नसबंदी के लिए प्रतिमाह कैंपों का आयोजन किया जाता है। इससे महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। योजना को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
ज्यादा है प्रोत्साहन राशि, फिर भी पीछे है पुरुष
संसाधन होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग पुरुषों में नसबंदी को लेकर उत्साह नहीं बढ़ा पा रहा है। जो पुरुष नसबंदी के लिए पहुंचते भी है, वो प्रोत्साहन राशि के लालच में आते हैं। इसमें ज्यादातर गरीब और मजदूर तबके के लोग होते हैं। नसबंदी कराने के लिए पुरुषों को जहां तीन हजार रुपये मिलता है वहीं, महिलाओं को सिर्फ दो हजार रुपये ही मिलते है। इसके बाद भी पुरुष नसबंदी के लिए आगे नहीं आ रहे हैं ।
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- 2017 में मात्र 26 पुरुषों ने कराई नसबंदी
- साल में 2498 महिलाओं ने कराई नसबंदी
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। परिवार नियोजन की कमान महिलाओं के कंधे पर ही टिकी है। पुरुषों द्वारा अभियान में रुचि न लेने पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। योजना के तहत वर्ष 2017 में 2498 महिलाएं और 26 पुरुषोें ने नसबंदी कराई।
बढ़ती आबादी को रोकने के लिए परिवार नियोजन के लिए प्रत्येक वर्ष लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके बाद भी इसमें पुरुषों की भूमिका न के बराबर है। अब भी परिवार नियोजन की कमान सिर्फ महिलाओं ने ही संभाल रखी है। महिला सशक्तीकरण की बात करें तो हर स्थान पर कहा जाता है कि महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहीं है, लेकिन यहां तो महिलाएं पुरुषों से इतनी आगे निकल गई है कि पुरुषों को इनकी बराबरी कर पाना संभव नही दिख रहा है। अधिकारियों के अनुसार परिवार नियोजन के लिए परिवारों की ओर से अब कॉपर टी, निरोध, गर्भनिरोधक गोलियों के साथ अन्य प्रकार के उपायों को भी अपनाया जा रहा है। इससे भी नसबंदी के ग्राफ पर असर पड़ा है। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि नसबंदी के लिए प्रतिमाह कैंपों का आयोजन किया जाता है। इससे महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। योजना को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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ज्यादा है प्रोत्साहन राशि, फिर भी पीछे है पुरुष
संसाधन होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग पुरुषों में नसबंदी को लेकर उत्साह नहीं बढ़ा पा रहा है। जो पुरुष नसबंदी के लिए पहुंचते भी है, वो प्रोत्साहन राशि के लालच में आते हैं। इसमें ज्यादातर गरीब और मजदूर तबके के लोग होते हैं। नसबंदी कराने के लिए पुरुषों को जहां तीन हजार रुपये मिलता है वहीं, महिलाओं को सिर्फ दो हजार रुपये ही मिलते है। इसके बाद भी पुरुष नसबंदी के लिए आगे नहीं आ रहे हैं ।
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