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मौसम की ठंडक से ईट-भट्ठा उद्योग बेदम
Updated Sun, 21 Jan 2018 10:13 PM IST
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मांग कम होने से ईंटों के गिरे दाम, कारोबारी परेशान
- 5500 से गिरकर 4500 प्रति हजार तक पहुंचे ईंटों के दाम
- कारोबारियों का लागत निकालना भी हो रहा मुश्किल
जहांगीराबाद। मौसम की ठंडक और बाजार के हालातों से ईट-भट्ठा कारोबार फिर मंदा पड़ गया है। पिछले दो महीनों में कारोबार ने गति पकड़ी, लेकिन एक पखवाड़े से निर्माण कार्यों के थमने और बाहरी बाजारों से ईंट की डिमांड कम होने से बिक्री थम गई है।
गत वर्ष 2017 के मार्च महीने से ही समूचे तहसील क्षेत्र में संचालित ईट-भट्ठों पर कच्ची ईंट की पथाई का काम जोरों पर चला। इसके चलते चिमनियां सुलगने के बाद पक्की ईंट का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर हुआ, लेकिन ईंट के मूल्य पिछले साल के सापेक्ष काफी कम होने से कारोबारी हताश रहे। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद बालू खनन की प्रक्रिया शुरू न हो पाने के कारण बालू के मूल्य 100 रुपये वर्ग फीट तक हो गए और निर्माण कार्यों का काम मंदा हो गया। इसके चलते ईंट की डिमांड भी कम हो गई। इधर उत्पादन अधिक होने की स्थिति में कारोबारियों का माल की कीमत निकालना भी मुश्किल हो गया। अक्टूबर के अंतिम दिनों जब बालू की कीमतों में गिरावट आई तो नवंबर से निर्माण कार्यों में तेजी आई। इसके बाद ईंट के दाम भी पांच हजार से 5500 रुपये प्रति हजार तक पहुंच गए। 15 दिसंबर के बाद फिर से ईंट-भट्ठा उद्योग ठंडा पड़ने लगा। एक पखवाड़े से तो कारोबार सिर्फ 10 फीसद तक ही रह गया है। अचानक ठंड बढ़ने के बाद हर तरह के निर्माण कार्य थम जाने का असर उद्योगों पर दिख रहा है। बाहरी क्षेत्रों से भी डिमांड कम है। बिक्री बढ़ाने के लिए अब ईंट का मूल्य 4500 से 4800 प्रति हजार किए गए हैं, लेकिन कारोबार में गति नहीं दिख रही।
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- 5500 से गिरकर 4500 प्रति हजार तक पहुंचे ईंटों के दाम
- कारोबारियों का लागत निकालना भी हो रहा मुश्किल
जहांगीराबाद। मौसम की ठंडक और बाजार के हालातों से ईट-भट्ठा कारोबार फिर मंदा पड़ गया है। पिछले दो महीनों में कारोबार ने गति पकड़ी, लेकिन एक पखवाड़े से निर्माण कार्यों के थमने और बाहरी बाजारों से ईंट की डिमांड कम होने से बिक्री थम गई है।
गत वर्ष 2017 के मार्च महीने से ही समूचे तहसील क्षेत्र में संचालित ईट-भट्ठों पर कच्ची ईंट की पथाई का काम जोरों पर चला। इसके चलते चिमनियां सुलगने के बाद पक्की ईंट का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर हुआ, लेकिन ईंट के मूल्य पिछले साल के सापेक्ष काफी कम होने से कारोबारी हताश रहे। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद बालू खनन की प्रक्रिया शुरू न हो पाने के कारण बालू के मूल्य 100 रुपये वर्ग फीट तक हो गए और निर्माण कार्यों का काम मंदा हो गया। इसके चलते ईंट की डिमांड भी कम हो गई। इधर उत्पादन अधिक होने की स्थिति में कारोबारियों का माल की कीमत निकालना भी मुश्किल हो गया। अक्टूबर के अंतिम दिनों जब बालू की कीमतों में गिरावट आई तो नवंबर से निर्माण कार्यों में तेजी आई। इसके बाद ईंट के दाम भी पांच हजार से 5500 रुपये प्रति हजार तक पहुंच गए। 15 दिसंबर के बाद फिर से ईंट-भट्ठा उद्योग ठंडा पड़ने लगा। एक पखवाड़े से तो कारोबार सिर्फ 10 फीसद तक ही रह गया है। अचानक ठंड बढ़ने के बाद हर तरह के निर्माण कार्य थम जाने का असर उद्योगों पर दिख रहा है। बाहरी क्षेत्रों से भी डिमांड कम है। बिक्री बढ़ाने के लिए अब ईंट का मूल्य 4500 से 4800 प्रति हजार किए गए हैं, लेकिन कारोबार में गति नहीं दिख रही।
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