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आधुनिकता के चोले में पनप रहा विकृत मानसिकता का मैल
Updated Thu, 11 Jan 2018 11:13 PM IST
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आधुनिकता के चोले में पनप रहा विकृत मानसिकता का मैल
आशीष शुक्ला
- समाज शास्त्रियों की मानें तो संस्कार को धूमिल कर रही आधुनिकता
- टीवी और इंटरनेट पर परोसी जा रही अश्लीलता है मुख्य कारण
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
सिकंदराबाद क्षेत्र में स्कूली बच्चों द्वारा पहली क्लास की छात्रा से रेप की कोशिश के बाद से क्षेत्र के लोग सकते में हैं। इस प्रकार की घटनाओं पर समाजशास्त्री नैतिक शिक्षा में कमी, बढ़ते टीवी और आधुनिकता को कारक मान रहे हैं। इस तरह की घटनाएं बढ़ने से समाजशास्त्री भविष्य के बारे में सोच कर भी विचलित नजर आ रहे हैं।
समाजशास्त्री व समाजसेवी शारदा चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जो सभ्यता और संस्कार बुजुर्ग अपनी संतान को देते थे, वही संस्कार आधुनिक युग में कहीं गुम होते नजर आ रहे हैं। एक ओर टीवी, मोबाइल के इस युग में परिजनों का अपने बच्चों को समय न दे पाना भी इसका एक कारण है। अधिकतर परिजन अपने बच्चों के साथ समय ही नहीं बिता पाते हैं, कोई नौकरी के चक्कर में तो कोई मोबाइल की व्यस्तता में अपना समय व्यतीत कर देते हैं। जिससे बच्चों को अपने माता-पिता से मिलने वाले संस्कारों में भी कमी आ रही है। दूसरी ओर वर्तमान समय में टीवी पर और इंटरनेट पर धड़ल्ले से अश्लीलता परोसी जा रही है। बच्चे इंटरनेट का प्रयोग अच्छी बातों को सीखने में कम और बेकार की चीजों में अधिक समय गुजार रहे हैं। जिससे उनकी मानसिकता पर भी असर पड़ रहा है। वर्तमान समय में मासूमों के बीच बढ़ रही अपराध की प्रवृत्ति का मुख्य कारण इंटरनेट और टीवी हैं। दूसरा परिजन भी अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो भविष्य में इस तरह की वारदातों में बढ़ोेत्तरी ही होगी।
कोट
इस प्रकार की घटनाओं पर सीधे-सीधे किसी की जिम्मेदारी बनती है तो वह बच्चे के माता-पिता पर। बच्चे जो भी घटनाएं अपने आसपास देखते हैं उन्हें करने की चाह रखते हैं। ऐसे में अभिभावकों की पूरी तरह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चे को सही और गलत की सीख दें। - डॉ. संध्या द्विवेदी, मनोवैज्ञानिक
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बेटियों की हिफाजत के लिए चलाए जा रहे हैं कार्यक्रम
सिकंदराबाद विधानसभा की विधायक विमला सोलंकी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज को झकझोर के रख देती हैं। उन्होंने बताया कि बेटियों की सुरक्षा के लिए, उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आत्मसुरक्षा के विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। छात्राओं को स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर कराटे की ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ की विपदा की घड़ी में महिला सुरक्षा के लिए कई हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। स्कूलों में कार्यक्रमों के माध्यम से छोटे बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में जागरूक किया जा रहा है। समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए परिवार को अपने बच्चों को संस्कार देने होंगे।
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आशीष शुक्ला
- समाज शास्त्रियों की मानें तो संस्कार को धूमिल कर रही आधुनिकता
- टीवी और इंटरनेट पर परोसी जा रही अश्लीलता है मुख्य कारण
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
सिकंदराबाद क्षेत्र में स्कूली बच्चों द्वारा पहली क्लास की छात्रा से रेप की कोशिश के बाद से क्षेत्र के लोग सकते में हैं। इस प्रकार की घटनाओं पर समाजशास्त्री नैतिक शिक्षा में कमी, बढ़ते टीवी और आधुनिकता को कारक मान रहे हैं। इस तरह की घटनाएं बढ़ने से समाजशास्त्री भविष्य के बारे में सोच कर भी विचलित नजर आ रहे हैं।
समाजशास्त्री व समाजसेवी शारदा चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जो सभ्यता और संस्कार बुजुर्ग अपनी संतान को देते थे, वही संस्कार आधुनिक युग में कहीं गुम होते नजर आ रहे हैं। एक ओर टीवी, मोबाइल के इस युग में परिजनों का अपने बच्चों को समय न दे पाना भी इसका एक कारण है। अधिकतर परिजन अपने बच्चों के साथ समय ही नहीं बिता पाते हैं, कोई नौकरी के चक्कर में तो कोई मोबाइल की व्यस्तता में अपना समय व्यतीत कर देते हैं। जिससे बच्चों को अपने माता-पिता से मिलने वाले संस्कारों में भी कमी आ रही है। दूसरी ओर वर्तमान समय में टीवी पर और इंटरनेट पर धड़ल्ले से अश्लीलता परोसी जा रही है। बच्चे इंटरनेट का प्रयोग अच्छी बातों को सीखने में कम और बेकार की चीजों में अधिक समय गुजार रहे हैं। जिससे उनकी मानसिकता पर भी असर पड़ रहा है। वर्तमान समय में मासूमों के बीच बढ़ रही अपराध की प्रवृत्ति का मुख्य कारण इंटरनेट और टीवी हैं। दूसरा परिजन भी अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो भविष्य में इस तरह की वारदातों में बढ़ोेत्तरी ही होगी।
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कोट
इस प्रकार की घटनाओं पर सीधे-सीधे किसी की जिम्मेदारी बनती है तो वह बच्चे के माता-पिता पर। बच्चे जो भी घटनाएं अपने आसपास देखते हैं उन्हें करने की चाह रखते हैं। ऐसे में अभिभावकों की पूरी तरह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चे को सही और गलत की सीख दें। - डॉ. संध्या द्विवेदी, मनोवैज्ञानिक
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बेटियों की हिफाजत के लिए चलाए जा रहे हैं कार्यक्रम
सिकंदराबाद विधानसभा की विधायक विमला सोलंकी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज को झकझोर के रख देती हैं। उन्होंने बताया कि बेटियों की सुरक्षा के लिए, उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आत्मसुरक्षा के विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। छात्राओं को स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर कराटे की ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ की विपदा की घड़ी में महिला सुरक्षा के लिए कई हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। स्कूलों में कार्यक्रमों के माध्यम से छोटे बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में जागरूक किया जा रहा है। समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए परिवार को अपने बच्चों को संस्कार देने होंगे।