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14,677 अति कुपोषित बच्चे लाल श्रेणी से हुए बाहर
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:36 PM IST
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14,677 अति कुपोषित बच्चे लाल श्रेणी से बाहर
- दिसंबर 2016 में वजन दिवस पर 29,954 बच्चे थे अति कुपोषित
- बच्चों को स्वस्थ करने में कुपोषण पुनर्वास केेंद्र का भी रहा विशेष योगदान
- अब 15,277 अति कुपोषित, 33514 बच्चे रह गए कुपोषित
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
अफसरों के अथक प्रयास का नतीजा रहा कि जिले के 14,677 अति कुपोषित बच्चे लाल श्रेणी से बाहर हो गए। इन बच्चों को स्वस्थ करने में जिला अस्पताल में संचालित पुनर्वास केंद्र का भी विशेष योगदान रहा। शेष बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। अफसरों का दावा है कि आगामी वर्ष तक जिले को कुपोषण से मुक्त कर दिया जाएगा।
शासन की ओर से बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कई अहम योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिले में कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के लिए दिसंबर 2016 में वजन किया था। उस समय जिले में 29,954 बच्चों को अति कुपोषित (लाल श्रेणी) में शामिल किया गया था। इन बच्चों को बीमारी से छुटकारा दिलाने के लिए शासन की ओर से विभागीय अफसरों ने योजनाओं का लाभ समय पर दिया गया। इतना ही नहीं बच्चों को समय-समय पर जिला अस्पताल में संचालित कुपोषण से मुक्ति को पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर अब तक 14,677 बच्चों को लाल श्रेणी से बाहर कर कुपोषण की पीली श्रेणी में पहुंचा दिया है। इसके चलते अब कुपोषण की पीली श्रेणी में 33,514 बच्चे हो गए हैं। जबकि हरी श्रेणी में सामान्य बच्चों की संख्या 3 लाख 87 हजार 382 है। जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभांगी कुलकर्णी ने बताया कि जिले को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं। अति कुपोषित 30 से 40 बच्चों को प्रत्येक माह पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जा रहा है। शेष बच्चों को समय पर दवा और और पुष्टाहार आदि दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले को आगामी वर्ष तक कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य है।
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- दिसंबर 2016 में वजन दिवस पर 29,954 बच्चे थे अति कुपोषित
- बच्चों को स्वस्थ करने में कुपोषण पुनर्वास केेंद्र का भी रहा विशेष योगदान
- अब 15,277 अति कुपोषित, 33514 बच्चे रह गए कुपोषित
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
अफसरों के अथक प्रयास का नतीजा रहा कि जिले के 14,677 अति कुपोषित बच्चे लाल श्रेणी से बाहर हो गए। इन बच्चों को स्वस्थ करने में जिला अस्पताल में संचालित पुनर्वास केंद्र का भी विशेष योगदान रहा। शेष बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। अफसरों का दावा है कि आगामी वर्ष तक जिले को कुपोषण से मुक्त कर दिया जाएगा।
शासन की ओर से बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कई अहम योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिले में कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के लिए दिसंबर 2016 में वजन किया था। उस समय जिले में 29,954 बच्चों को अति कुपोषित (लाल श्रेणी) में शामिल किया गया था। इन बच्चों को बीमारी से छुटकारा दिलाने के लिए शासन की ओर से विभागीय अफसरों ने योजनाओं का लाभ समय पर दिया गया। इतना ही नहीं बच्चों को समय-समय पर जिला अस्पताल में संचालित कुपोषण से मुक्ति को पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर अब तक 14,677 बच्चों को लाल श्रेणी से बाहर कर कुपोषण की पीली श्रेणी में पहुंचा दिया है। इसके चलते अब कुपोषण की पीली श्रेणी में 33,514 बच्चे हो गए हैं। जबकि हरी श्रेणी में सामान्य बच्चों की संख्या 3 लाख 87 हजार 382 है। जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभांगी कुलकर्णी ने बताया कि जिले को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं। अति कुपोषित 30 से 40 बच्चों को प्रत्येक माह पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जा रहा है। शेष बच्चों को समय पर दवा और और पुष्टाहार आदि दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले को आगामी वर्ष तक कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य है।
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