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अब बिना पहचान पत्र चालक नहीं चला पाएंगे स्कूली वाहन
Updated Sat, 02 Sep 2017 11:00 PM IST
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अब बिना पहचान पत्र चालक नहीं चला पाएंगे स्कूली वाहन
- एआरटीओ की पहचान पत्र पर लगेगी मुहर, चालकों का मांगा डाटा
- एआरटीओ ने डीआईओएस और बीएसए को डाटा के लिए लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। सरकारी हो या फिर प्राइवेट, किसी भी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालक अब बिना पहचान पत्र के स्कूली वाहन नहीं चलाएंगे, इसकी जिले में शुरूआत हो चुकी है। एआरटीओ ने डीआईओएस व बीएसए को पत्र लिखकर चालकों का डाटा मांग लिया है। उधर, दोनों शिक्षा विभागों की ओर से शिक्षण संस्थानों से चालकों का डाटा एकत्रित करने का काम शुरू हो गया है।
एआरटीओ मोहम्मद कय्यूम के अनुसार शासन का आदेश प्राप्त हुआ है कि सभी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालकों के पहचान पत्र बनाए जाने हैं। कोई भी संस्थान ऐसा नहीं होना चाहिए, जहां कोई चालक बिना इसके वाहन चलाए। पहचान पत्र बनाने के बाद विभाग की ओर से अभियान चलाकर पता किया जाएगा कि किस वाहन चालक के पास पहचान पत्र नहीं है। इसमें चालक का नाम, पता, फोटो आदि सभी जानकारी होगी। जब भी कभी अभियान चलेगा तो पहचान पत्र नहीं होने पर चालक और शिक्षण संस्थान पर कार्रवाई होगी। उन्होंने डीआईओएस और बीएसए को पत्र जारी कर सभी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालकों का डाटा मांग लिया है।
डीआईओएस मनोज कुमार आर्य और बीएसए अजीत सिंह का कहना है कि एआरटीओ का पत्र मिलने पर सभी शिक्षण संस्थानों से वाहन चालकों का डाटा मांग लिया है। जल्द ही डाटा एकत्रित कर एआरटीओ कार्यालय को भेज दिया जाएगा। ज्ञात रहे कि जिले में सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की संख्या 4500 से अधिक है। इनमें 10 हजार से अधिक वाहन हैं।
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- एआरटीओ की पहचान पत्र पर लगेगी मुहर, चालकों का मांगा डाटा
- एआरटीओ ने डीआईओएस और बीएसए को डाटा के लिए लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। सरकारी हो या फिर प्राइवेट, किसी भी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालक अब बिना पहचान पत्र के स्कूली वाहन नहीं चलाएंगे, इसकी जिले में शुरूआत हो चुकी है। एआरटीओ ने डीआईओएस व बीएसए को पत्र लिखकर चालकों का डाटा मांग लिया है। उधर, दोनों शिक्षा विभागों की ओर से शिक्षण संस्थानों से चालकों का डाटा एकत्रित करने का काम शुरू हो गया है।
एआरटीओ मोहम्मद कय्यूम के अनुसार शासन का आदेश प्राप्त हुआ है कि सभी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालकों के पहचान पत्र बनाए जाने हैं। कोई भी संस्थान ऐसा नहीं होना चाहिए, जहां कोई चालक बिना इसके वाहन चलाए। पहचान पत्र बनाने के बाद विभाग की ओर से अभियान चलाकर पता किया जाएगा कि किस वाहन चालक के पास पहचान पत्र नहीं है। इसमें चालक का नाम, पता, फोटो आदि सभी जानकारी होगी। जब भी कभी अभियान चलेगा तो पहचान पत्र नहीं होने पर चालक और शिक्षण संस्थान पर कार्रवाई होगी। उन्होंने डीआईओएस और बीएसए को पत्र जारी कर सभी शिक्षण संस्थानों के वाहन चालकों का डाटा मांग लिया है।
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डीआईओएस मनोज कुमार आर्य और बीएसए अजीत सिंह का कहना है कि एआरटीओ का पत्र मिलने पर सभी शिक्षण संस्थानों से वाहन चालकों का डाटा मांग लिया है। जल्द ही डाटा एकत्रित कर एआरटीओ कार्यालय को भेज दिया जाएगा। ज्ञात रहे कि जिले में सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की संख्या 4500 से अधिक है। इनमें 10 हजार से अधिक वाहन हैं।
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