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अपने सम्मान को फिर धरना-प्रदर्शन पर उतरे शिक्षामित्र
Updated Wed, 16 Aug 2017 11:00 PM IST
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हक के लिए शिक्षामित्रों ने फिर बुलंद की आवाज
- बीएसए कार्यालय पर किया धरना-प्रदर्शन, दिया ज्ञापन
- शिक्षामित्रों की चेतावनी- हर हाल में लेकर रहेंगे अपना हक
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
सरकार द्वारा निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं लेने से खफा शिक्षामित्र अपने हक के लिए फिर धरना-प्रदर्शन पर उतर आए हैं। बुधवार को उन्होंने बीएसए कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। चेतावनी दी कि वह हर हाल में अपना हक लेकर रहेंगे। उन्होंने बीएसए को अपनी मांगों का ज्ञापन भी दिया।
बीएसए कार्यालय पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले शुरू हुए धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता संरक्षक पूरन चंद शास्त्री ने की। जिलाध्यक्ष संजय चौधरी और महामंत्री सलीम खान ने कहा कि सरकार ने हमारी समस्या के निराकरण के लिए 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं ले पाई, जो खेद का विषय है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार और जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने कहा कि बीएसए कार्यालय पर 19 अगस्त तक लगातार धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। कल से सभी शिक्षमित्र धरने में तिरंगा झंडा लेकर आएंगे। पूरन चंद शास्त्री ने बताया कि सरकार को भेज गए गए ज्ञापन में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बरकरार रखने, अगला अध्यादेश आने तक समान कार्य समान वेतन के तहत वेतन दिए जाने, सरकार पुनर्विचार याचिका शीघ्र दाखिल करें और मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को 25-25 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ परिवार के सदस्य को नौकरी देने जैसी मांगें शामिल हैं।
परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई फिर चौपट
बुलंदशहर। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने विगत दिनों शिक्षामित्रों के धरना-प्रदर्शन से सबक नहीं लिया। इसका नतीजा यह रहा कि अब एक बार फिर शिक्षामित्रों का धरना-प्रदर्शन शुरू होने से परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई चौपट हो गई है। इससे अभिभावकों में गुस्सा है।
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जिले में लगभग 2700 शिक्षामित्र हैं। इनमें 1600 के आसपास ऐसे शिक्षामित्र हैं, जिन्हें पूर्व में समायोजित कर सहायक अध्यापक नियुक्त कर दिया था। जिले के करीब 80 परिषदीय स्कूलों के अलावा 100 से अधिक एकल स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे ही चलते हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया। इसके विरोध में वह धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री ने उनसे समाधान के लिए समय मांगा था, जिसके चलते 15 अगस्त तक धरना-प्रदर्शन स्थगित करने का निर्णय लिया था। सरकार द्वारा दिए गए समय में कोई समाधान नहीं हुआ तो वह दोबारा बीएसए कार्यालय में धरना-प्रदर्शन पर जम गए हैं। इसके चलते एक बार फिर जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई चौपट होने लगी है। अभिभावकों का कहना है कि यदि इसी तरह उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती रही तो वह अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने को मजबूर होंगे। स्कूल से बंक मारने वाले शिक्षक भी धरना-प्रदर्शन का फायदा उठाने लगे हैं। इस संबंध में बीएसए अजीत कुमार का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को लेकर सभी एबीएसए को आदेश जारी कर दिए हैं कि जहां भी कोई शिक्षक अनुपस्थित मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही जिस स्कूल में अधिक शिक्षक हों, वहां से उनको उन स्कूलों में भेजा जाए, जहां पर शिक्षामित्र तैनात हैं। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा के स्तर को किसी भी कीमत पर नहीं गिरने दिया जाएगा।
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हक के लिए शिक्षामित्रों ने फिर बुलंद की आवाज
- बीएसए कार्यालय पर किया धरना-प्रदर्शन, दिया ज्ञापन
- शिक्षामित्रों की चेतावनी- हर हाल में लेकर रहेंगे अपना हक
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
सरकार द्वारा निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं लेने से खफा शिक्षामित्र अपने हक के लिए फिर धरना-प्रदर्शन पर उतर आए हैं। बुधवार को उन्होंने बीएसए कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। चेतावनी दी कि वह हर हाल में अपना हक लेकर रहेंगे। उन्होंने बीएसए को अपनी मांगों का ज्ञापन भी दिया।
बीएसए कार्यालय पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले शुरू हुए धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता संरक्षक पूरन चंद शास्त्री ने की। जिलाध्यक्ष संजय चौधरी और महामंत्री सलीम खान ने कहा कि सरकार ने हमारी समस्या के निराकरण के लिए 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी सरकार अब तक कोई निर्णय नहीं ले पाई, जो खेद का विषय है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार और जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने कहा कि बीएसए कार्यालय पर 19 अगस्त तक लगातार धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। कल से सभी शिक्षमित्र धरने में तिरंगा झंडा लेकर आएंगे। पूरन चंद शास्त्री ने बताया कि सरकार को भेज गए गए ज्ञापन में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बरकरार रखने, अगला अध्यादेश आने तक समान कार्य समान वेतन के तहत वेतन दिए जाने, सरकार पुनर्विचार याचिका शीघ्र दाखिल करें और मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को 25-25 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ परिवार के सदस्य को नौकरी देने जैसी मांगें शामिल हैं।
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परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई फिर चौपट
बुलंदशहर। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने विगत दिनों शिक्षामित्रों के धरना-प्रदर्शन से सबक नहीं लिया। इसका नतीजा यह रहा कि अब एक बार फिर शिक्षामित्रों का धरना-प्रदर्शन शुरू होने से परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई चौपट हो गई है। इससे अभिभावकों में गुस्सा है।
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जिले में लगभग 2700 शिक्षामित्र हैं। इनमें 1600 के आसपास ऐसे शिक्षामित्र हैं, जिन्हें पूर्व में समायोजित कर सहायक अध्यापक नियुक्त कर दिया था। जिले के करीब 80 परिषदीय स्कूलों के अलावा 100 से अधिक एकल स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे ही चलते हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया। इसके विरोध में वह धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री ने उनसे समाधान के लिए समय मांगा था, जिसके चलते 15 अगस्त तक धरना-प्रदर्शन स्थगित करने का निर्णय लिया था। सरकार द्वारा दिए गए समय में कोई समाधान नहीं हुआ तो वह दोबारा बीएसए कार्यालय में धरना-प्रदर्शन पर जम गए हैं। इसके चलते एक बार फिर जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई चौपट होने लगी है। अभिभावकों का कहना है कि यदि इसी तरह उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती रही तो वह अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने को मजबूर होंगे। स्कूल से बंक मारने वाले शिक्षक भी धरना-प्रदर्शन का फायदा उठाने लगे हैं। इस संबंध में बीएसए अजीत कुमार का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को लेकर सभी एबीएसए को आदेश जारी कर दिए हैं कि जहां भी कोई शिक्षक अनुपस्थित मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही जिस स्कूल में अधिक शिक्षक हों, वहां से उनको उन स्कूलों में भेजा जाए, जहां पर शिक्षामित्र तैनात हैं। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा के स्तर को किसी भी कीमत पर नहीं गिरने दिया जाएगा।