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जगत,म्याऊं में गेहूं  खरीद बनी मखौल

Mon, 02 May 2016 12:20 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Mon, 02 May 2016 12:20 AM IST
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World, Myaun wheat The purchase mockery
गेहूं - फोटो : अमर उजाला

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केंद्रों पर किसानों को मिलने वाली सुविधाएं नदारद 
 किसानों को उनकी फसल का सही दाम देने का सरकारी आदेश को उनके मातहत ही पलीता लगा रहे हैं। खरीद केंद्र का लक्ष्य पूरा करने केे लिए सेंटर प्रभारी बिचौलियों के माध्यम से खरीद कर गेहूं को सेंटर के नाम से गोदामों को भेज रहे है। इस बार पैदावार प्रभावित होने और खुले मार्केट में सरकारी रेट के करीब कीमत पहुंच जाने के कारण किसानों को गेहूं बेचने में सरकारी झंझट से छुटकारा सा मिल गया है। वह केंद्रों की हालत देखकर भी वहां नहीं जा रहे हैं। बावजूद इसके खरीद केंद्रों पर जमकर खरीद दिखाई जा रही है। 
बताते चलें कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल जाए इसके लिए सरकार गेंहू क्रय केंद्र खोलती है और इन केंद्रों पर गेहूं की खरीद कराती है। किसानों को उनकी फसल का वाजिव दाम मिल सके। इस लिहाज से इस बार भी पूर्व की भांति जगत और म्याऊं ब्लाक क्षेत्र में जगह-जगह गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों पर गेहूं खरीद का जिम्मा भी सरकारी कर्मियों का हैं लेकिन देखने को मिलता है कि केंद्रों पर किसान पहुंच नहीं रहे हैं और कागजों में क्विटलों गेहूं की खरीद हो गई है। सेंटरों पर गेहूं न पहुंचने की प्रमुख वजह पूछने पर गांव जगत के किसान रामकिशोर, अनिल कुमार गौंतरा गांव के रूमसिंह और पातीराम ने बताया कि एक तो पैदावार कम है और दूसरी प्रमुख वजह इस बार सरकारी रेट से कुछ कम कीमत पर ही उनका गेहूं खुले बाजार में बिक जाता है। बाजार में उन्हें अपनी फसल का मूल्य हाथोंहाथ मिल रहे। जबकि सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने के बाद पता नहीं कि कब तक उनकी फसल का पैसा आएगा। इसलिए सरकारी झंझट में न पड़कर खुले बाजार में गेहूं बेच रहा है। 
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उधर, सेंटरों पर सरकार द्वारा किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं पर गौर करें तो न तो किसानों को बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का कोई इंतजाम है। जिस गांव के नाम से सेंटर है, वहां सेंटर दिखाई ही नहीं देता। जहां पर हैं वहां बैनर तक नहीं दिखाई पड़ता। कुछ स्थानों पर सुविधाएं तो ठीकठाक है लेकिन खरीद के नाम पर कुछ नहीं है। जानकारों की मानें तो खरीद करने का जिम्मा जिन लोगों को सौंपा गया है, वह लक्ष्य पूरा करने के लिए बिचौलियों का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। सूत्रों की माने तो जिले के अफसर भी इससे बेखबर नहीं हैं लेकिन लक्ष्य पूरा कराना उनकी जिम्मेदारी है। लक्ष्य हासिल करने को हर हथकंडा अपनाया जा रहा है।
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